गुरु पूर्णिमा पर शासकीय कन्या हाई स्कूल सिलौंडी में गुरुजनों का भव्य सम्मान,शिक्षा,संस्कार और सेवा की परंपरा को किया नमन।
सुंदरकांड पाठ,भजन-कीर्तन और सम्मान समारोह के माध्यम से विद्यार्थियों,सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं शिक्षकों ने गुरु-शिष्य परंपरा का किया अभिनंदन,स्वर्गीय कमलेश राय के प्रेरणादायी जीवन को किया याद।
सिलौंडी। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर शासकीय कन्या हाई स्कूल, सिलौंडी में श्रद्धा, भक्ति और भारतीय संस्कृति की गौरवशाली गुरु-शिष्य परंपरा को समर्पित एक गरिमामय एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम विद्यालय के प्राचार्य विशाल वरकड़े तथा सेवानिवृत्त शिक्षक जीवन लाल बागरी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस अवसर पर सुंदरकांड पाठ, भजन-कीर्तन, गुरु वंदना तथा शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, अभिभावकों एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए गुरुजनों के प्रति अपनी कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्रीराम एवं गुरु वंदना के साथ सुंदरकांड पाठ से हुआ। इसके पश्चात भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिससे पूरा विद्यालय परिसर भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान हो उठा। उपस्थित सभी लोगों ने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान भगवान से भी श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि गुरु ही अपने ज्ञान, अनुभव और संस्कारों से शिष्य के जीवन को नई दिशा प्रदान करते हैं। गुरु का ज्ञान वह दिव्य प्रकाश है जो अज्ञान, भ्रम और निराशा के अंधकार को समाप्त कर जीवन को सफलता, सदाचार और आत्मविश्वास के मार्ग पर अग्रसर करता है।
इस अवसर पर सेवानिवृत्त शिक्षक जीवन लाल बागरी ने अपने प्रेरणास्रोत एवं आदर्श गुरु स्वर्गीय कमलेश राय का स्मरण करते हुए उनके संघर्षपूर्ण, अनुशासित और सेवा-समर्पित जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि स्वर्गीय कमलेश राय शिक्षा को केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज निर्माण का सबसे बड़ा माध्यम मानते थे। वे प्रतिदिन सिलौंडी से लगभग सात किलोमीटर दूर स्थित लालपुर प्राथमिक विद्यालय तक पैदल पहुंचते थे। रास्ते में नदी-नाले, ऊबड़-खाबड़ मार्ग और बरसात के मौसम में कीचड़ जैसी अनेक कठिन परिस्थितियां आती थीं, लेकिन उन्होंने कभी अपने कर्तव्य से समझौता नहीं किया। समय पर विद्यालय पहुंचकर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना उनकी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा था। उनके जीवन का प्रत्येक क्षण शिक्षा, अनुशासन, सेवा और समाज के उत्थान के लिए समर्पित रहा।
जीवन लाल बागरी ने कहा कि स्वर्गीय कमलेश राय का जीवन आज भी समाज और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने अपने जीवनकाल में जहां हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने का कार्य किया, वहीं निधन के उपरांत भी मानवता की सेवा का सर्वोच्च उदाहरण प्रस्तुत करते हुए देहदान किया। आज मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राएं उनके पार्थिव शरीर के माध्यम से चिकित्सा विज्ञान का अध्ययन कर रहे हैं। उनका यह महान निर्णय समाज में सेवा, त्याग और मानव कल्याण का अनुपम संदेश देता है तथा आने वाली पीढ़ियों को मानवता की सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर स्वर्गीय कमलेश राय के पुत्र एवं सामाजिक कार्यकर्ता अमरेश राय ने विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं का शाल एवं सम्मान स्वरूप भेंट देकर अभिनंदन किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि माता-पिता जीवन देते हैं, लेकिन गुरु उस जीवन को उद्देश्य, संस्कार और पहचान देते हैं। उन्होंने अपने पिता के संघर्ष, समर्पण और शिक्षा के प्रति उनके अद्वितीय योगदान को याद करते हुए कहा कि आज जो भी सम्मान शिक्षकों को दिया जा रहा है, वह समस्त गुरु समाज के प्रति समाज की कृतज्ञता का प्रतीक है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने गुरुजनों के बताए मार्ग पर चलकर परिवार, समाज और राष्ट्र का नाम रोशन करें।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की छात्राओं ने भी अपने गुरुजनों का पुष्पगुच्छ एवं सम्मान सामग्री भेंट कर अभिनंदन किया। छात्राओं ने अपने शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु ही उनके व्यक्तित्व, चरित्र और भविष्य के वास्तविक निर्माता हैं। विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त कर सदैव ईमानदारी, अनुशासन और परिश्रम के साथ जीवन में आगे बढ़ने का संकल्प लिया।
प्राचार्य विशाल वरकड़े ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक पर्व नहीं, बल्कि अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान, आभार और आत्ममंथन का अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी यदि अपने गुरु के बताए मार्ग पर ईमानदारी और निष्ठा के साथ चले, तो वह जीवन में निश्चित रूप से सफलता प्राप्त कर सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को भी जीवन में अपनाने का आग्रह किया।
समारोह के अंत में सभी उपस्थितजनों ने गुरुजनों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए भारतीय संस्कृति की महान गुरु-शिष्य परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। श्रद्धा, भक्ति, संस्कार और सम्मान से ओत-प्रोत यह आयोजन सभी के लिए प्रेरणादायी एवं अविस्मरणीय बन गया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि समाज के निर्माण, राष्ट्र के विकास और आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की नींव सदैव गुरु के ज्ञान, मार्गदर्शन और संस्कारों पर ही टिकी रहती है। गुरु का सम्मान करना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी और नागरिक का नैतिक दायित्व भी है।


