उमरपानी में वन भूमि पर अतिक्रमण के आरोप से ग्रामीणों में आक्रोश,मवेशी चराने गई महिला से अभद्रता के बाद फिर।

 उमरपानी में वन भूमि पर अतिक्रमण के आरोप से ग्रामीणों में आक्रोश,मवेशी चराने गई महिला से अभद्रता के बाद फिर।

जंगल की जमीन घेरकर खेती करने का आरोप,चराई को लेकर बढ़ा विवाद,महिला की शिकायत पर ढीमरखेड़ा पुलिस ने दर्ज किया मामला,जांच शुरू।

ढीमरखेड़ा। जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा क्षेत्र के ग्राम उमरपानी में वन भूमि पर कथित अतिक्रमण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्राम छाहर निवासी फूल चंद गोंड पर ग्रामीणों ने वन विभाग की शासकीय भूमि पर कब्जा कर खेती किए जाने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल की भूमि के कथित रूप से घेर लिए जाने के कारण गांव के पालतू मवेशियों के लिए चराई का क्षेत्र लगातार सीमित होता जा रहा है, जिससे ग्रामीणों के सामने पशुओं को चराने की समस्या खड़ी हो गई है।

ग्रामीणों के अनुसार, लंबे समय से वन भूमि पर कथित अतिक्रमण को लेकर असंतोष बना हुआ था। ग्रामीणों का आरोप है कि जंगल के जिस हिस्से में मवेशी पहले चरते थे, वहां कथित रूप से खेती किए जाने और क्षेत्र को घेरने के कारण पशुपालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही थी।

मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब एक महिला अपनी भैंस चराने के लिए जंगल की ओर गई। ग्रामीणों के मुताबिक, महिला जब कथित अतिक्रमण वाले क्षेत्र के पास पहुंची तो वहां मौजूद कुछ लोगों ने उसके साथ अभद्र व्यवहार किया और गाली-गलौज करते हुए उसे वहां से जाने के लिए कहा। घटना के बाद महिला भयभीत हो गई और उसने मामले की शिकायत पुलिस से करने का निर्णय लिया।

बताया गया कि पीड़ित महिला सुबह करीब 10 बजे ढीमरखेड़ा थाना पहुंची और पुलिस को लिखित शिकायत देकर घटना की जानकारी दी। महिला ने संबंधित लोगों पर अभद्रता और गाली-गलौज करने के आरोप लगाए। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेते हुए FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस की कार्रवाई के बाद अब मामले की जांच के साथ-साथ वन भूमि पर कथित अतिक्रमण का मुद्दा भी चर्चा में आ गया है। ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग संबंधित भूमि की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे और यदि शासकीय वन भूमि पर अवैध कब्जा पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जंगल की भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण होने से गांव के पशुपालकों को सीधे तौर पर परेशानी होती है और उनके मवेशियों के लिए चराई का संकट पैदा होता है।

घटना के बाद उमरपानी और छाहर क्षेत्र में ग्रामीणों के बीच नाराजगी का माहौल बताया जा रहा है। ग्रामीण प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, वन भूमि की सीमांकन प्रक्रिया कराने तथा कथित अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल पुलिस द्वारा महिला की शिकायत के आधार पर दर्ज मामले की जांच की जा रही है। वहीं वन भूमि पर अतिक्रमण के आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। अब ग्रामीणों की निगाहें पुलिस जांच और वन विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

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