बचहा पंचायत में ₹3,950 के नाश्ते के बिल पर उठे सवाल,दूसरी पंचायत के नाम का बिल लगाने का आरोप।
सरपंच-सचिव पर शासकीय राशि के दुरुपयोग के आरोप,ग्रामीणों ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
मानपुर। जनपद पंचायत मानपुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत बचहा एक बार फिर कथित वित्तीय अनियमितता को लेकर चर्चा में है। ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और जानकारी के आधार पर पंचायत के सरपंच एवं सचिव पर शासकीय राशि के उपयोग में गंभीर अनियमितता किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। मामला ₹3,950 के नाश्ते के बिल से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि बचहा पंचायत के खर्च को दर्शाने के लिए ग्राम पंचायत बडछड़ के नाम से जारी बिल का उपयोग किया गया।
ग्रामीणों के अनुसार, पंचायत के रिकॉर्ड में ₹3,950 के नाश्ते से संबंधित खर्च दर्ज किया गया है। इस खर्च के समर्थन में लगाए गए बिल को लेकर सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि बिल पर ग्राम पंचायत बचहा के बजाय ग्राम पंचायत बडछड़ का नाम अंकित बताया जा रहा है। दस्तावेज सामने आने के बाद ग्रामीणों ने पंचायत के वित्तीय लेन-देन और अभिलेखों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि किसी पंचायत के नाम से होने वाले शासकीय खर्च के लिए संबंधित भुगतान और उसके समर्थन में प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों की वैधता एवं प्रामाणिकता स्पष्ट होना आवश्यक है। ऐसे में दूसरी ग्राम पंचायत के नाम से जारी बिल का उपयोग किस आधार पर किया गया, यह जांच का विषय है।
इस मामले को लेकर ग्रामीणों के बीच यह भी चर्चा है कि यदि छोटे स्तर के खर्च में भी दस्तावेजों के इस्तेमाल को लेकर ऐसी स्थिति सामने आ रही है, तो पंचायत में कराए गए अन्य विकास कार्यों और विभिन्न मदों में खर्च की गई राशि की भी जांच की जानी चाहिए। हालांकि, पंचायत में व्यापक स्तर पर किसी वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार की पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही हो सकती है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनपद पंचायत मानपुर के अधिकारियों से मांग की है कि ₹3,950 के उक्त भुगतान से संबंधित मूल बिल, वाउचर, भुगतान रजिस्टर, पंचायत के लेखा अभिलेख और संबंधित स्वीकृतियों की जांच कराई जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि ग्राम पंचायत बडछड़ के नाम से जारी बिल बचहा पंचायत के रिकॉर्ड में किस प्रक्रिया के तहत शामिल किया गया।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति सामने आनी चाहिए और पंचायत के शासकीय धन के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
वहीं, ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की शीघ्र जांच नहीं की गई तो वे संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराने के साथ आंदोलन का रास्ता अपनाने पर विचार करेंगे। अब देखना यह होगा कि सामने आए दस्तावेजों की जांच के बाद प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और ₹3,950 के इस भुगतान से जुड़ी वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।


