शासकीय महाविद्यालय बड़वारा की बदहाली पर सवाल,नए सिलेबस की किताबें न प्रैक्टिकल की समुचित व्यवस्था।

 शासकीय महाविद्यालय बड़वारा की बदहाली पर सवाल,नए सिलेबस की किताबें न प्रैक्टिकल की समुचित व्यवस्था।

छात्रों का आरोप-लाइब्रेरी में पुराने सिलेबस की पुस्तकें,प्रयोगशालाओं में नहीं हो रहे नियमित प्रयोग,निर्माण कार्य और गंदगी से भी परेशानी।

कटनी। शासकीय महाविद्यालय बड़वारा में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं ने महाविद्यालय की शैक्षणिक एवं बुनियादी व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। छात्रों का आरोप है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत नया सिलेबस लागू हुए लंबा समय बीत जाने के बावजूद महाविद्यालय की लाइब्रेरी में नए पाठ्यक्रम के अनुरूप पर्याप्त पुस्तकें उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा प्रैक्टिकल कक्षाओं के संचालन, प्रयोगशाला की व्यवस्थाओं, भवन के रखरखाव और साफ-सफाई को लेकर भी समस्याएं बनी हुई हैं। छात्रों का कहना है कि इन परिस्थितियों का सीधा असर उनकी पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी पर पड़ रहा है।

छात्रों के अनुसार महाविद्यालय की लाइब्रेरी में नए सिलेबस के अनुरूप पुस्तकों की कमी सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। रसायन विज्ञान विषय के छात्र सत्येंद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने लाइब्रेरी से अध्ययन के लिए एक पुस्तक जारी कराई थी। घर पहुंचकर जब उन्होंने पुस्तक का अध्ययन शुरू किया तो उसमें उपलब्ध अधिकांश पाठ्य सामग्री वर्तमान सिलेबस से अलग मिली। छात्र के मुताबिक जब उन्होंने इस संबंध में शिक्षिका से जानकारी ली तो उन्हें बताया गया कि पुस्तक उनके वर्तमान पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयोगी नहीं है और उसे वापस करने की सलाह दी गई।

छात्रों का कहना है कि जब उच्च शिक्षा व्यवस्था में पाठ्यक्रम में बदलाव किया जा चुका है तो उसके अनुरूप अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना भी महाविद्यालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। नई पुस्तकों के अभाव में विद्यार्थियों को निजी स्तर पर अध्ययन सामग्री जुटानी पड़ रही है, जिससे विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

दूसरी ओर महाविद्यालय की प्रयोगशालाओं में प्रैक्टिकल कक्षाओं के संचालन को लेकर भी छात्रों ने सवाल उठाए हैं। छात्रों का आरोप है कि सत्र शुरू होने के बावजूद प्रयोगशाला में नियमित रूप से प्रयोगात्मक कक्षाएं नहीं हो रही हैं। उनके अनुसार प्रयोगशाला में आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। कुछ छात्रों ने दावा किया कि प्रैक्टिकल कार्य कराए जाने के बजाय उपस्थिति के आधार पर ही प्रैक्टिकल के अंक दिए जाने की स्थिति बन रही है।

छात्रों का सवाल है कि यदि प्रयोगशाला में उन्हें निर्धारित प्रयोग स्वयं करने और उनका व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने का अवसर नहीं मिलेगा, तो केवल उपस्थिति के आधार पर अंक मिलने से उनकी वास्तविक शैक्षणिक क्षमता का आकलन किस प्रकार होगा। विद्यार्थियों ने मांग की है कि सभी विषयों की प्रयोगात्मक कक्षाएं निर्धारित पाठ्यक्रम और विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार नियमित रूप से संचालित कराई जाएं तथा प्रयोगशालाओं में आवश्यक उपकरण एवं अन्य संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।

महाविद्यालय भवन की स्थिति को लेकर भी विद्यार्थियों में नाराजगी बताई जा रही है। छात्रों के अनुसार भवन में मरम्मत और निर्माण से संबंधित कार्य पिछले कई महीनों से अधूरे पड़े हैं। जिन कक्षाओं में नियमित रूप से विद्यार्थियों की कक्षाएं संचालित हो रही हैं, वहां धूल और गंदगी की समस्या बनी हुई है। छात्रों का कहना है कि डेस्क पर धूल की परत जमा रहती है और दीवारों पर भी गंदगी के निशान दिखाई देते हैं। ऐसे वातावरण में विद्यार्थियों को अध्ययन करने में असुविधा होती है।

छात्रों का कहना है कि महाविद्यालय केवल डिग्री प्राप्त करने का स्थान नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य को तैयार करने का महत्वपूर्ण केंद्र है। यदि पुस्तकालय में पाठ्यक्रम के अनुरूप अध्ययन सामग्री उपलब्ध न हो, प्रयोगशालाओं में नियमित प्रैक्टिकल न कराए जाएं और कक्षाओं की मूलभूत व्यवस्थाएं भी दुरुस्त न हों तो इसका असर विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर पर पड़ना स्वाभाविक है।

विद्यार्थियों के अनुसार वे अपनी समस्याओं को लेकर शिक्षकों के समक्ष भी अपनी बात रख चुके हैं। छात्रों का दावा है कि कुछ शिक्षकों ने भी व्यवस्थागत सीमाओं की बात कहते हुए उच्च स्तर पर समस्या उठाए जाने की आवश्यकता बताई है। इससे विद्यार्थियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर उनकी समस्याओं का समाधान किस स्तर पर और कब होगा।

छात्रों ने उच्च शिक्षा विभाग एवं जिला प्रशासन से महाविद्यालय की व्यवस्थाओं की गंभीरता से जांच कराने की मांग की है। विद्यार्थियों की मांग है कि लाइब्रेरी में वर्तमान सिलेबस के अनुरूप पर्याप्त संख्या में पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएं, प्रयोगशालाओं में आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था कराकर नियमित प्रैक्टिकल कक्षाएं संचालित की जाएं तथा भवन के लंबित मरम्मत एवं निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा कराया जाए। साथ ही कक्षाओं और पूरे महाविद्यालय परिसर में नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी छात्रों ने की है।

अब देखना यह होगा कि विद्यार्थियों द्वारा उठाई गई इन समस्याओं पर महाविद्यालय प्रबंधन, उच्च शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं। छात्रों को उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी महाविद्यालय की शैक्षणिक एवं बुनियादी व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर समस्याओं का शीघ्र समाधान कराएंगे, ताकि उन्हें बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।

Post a Comment

Previous Post Next Post