कन्हवारा के प्राचीन शिव मंदिर के पीछे अवैध उत्खनन का आरोप,आस्था और पर्यावरण पर मंडराया खतरा।

 कन्हवारा के प्राचीन शिव मंदिर के पीछे अवैध उत्खनन का आरोप,आस्था और पर्यावरण पर मंडराया खतरा।

रात के अंधेरे में मजदूरों से कथित खुदाई,ग्रामीणों ने प्रशासन पर अनदेखी का लगाया आरोप,निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग।

कटनी। जिले के कन्हवारा स्थित प्राचीन शिव मंदिर परिसर के पीछे कथित रूप से आयरन ओर (काले पत्थर) के अवैध उत्खनन का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि मंदिर के पीछे स्थित पहाड़ी क्षेत्र में लंबे समय से रात के अंधेरे का फायदा उठाकर सुनियोजित ढंग से अवैध उत्खनन किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह कार्य मशीनों से नहीं बल्कि मजदूरों के माध्यम से कराया जाता है, जिससे आवाज कम हो और गतिविधियां लोगों तथा प्रशासन की नजरों से बची रहें।

ग्रामीणों के अनुसार यह मामला केवल अवैध खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक आस्था, प्राकृतिक धरोहर और पर्यावरण के साथ गंभीर खिलवाड़ का भी है। वर्षों पुराना शिव मंदिर आसपास के गांवों सहित दूर-दराज के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर के पीछे स्थित पहाड़ी और तालाब क्षेत्र धार्मिक, सामाजिक और प्राकृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यहां लगातार हो रही कथित खुदाई को लेकर लोगों में गहरी चिंता व्याप्त है।

स्थानीय लोगों द्वारा उपलब्ध कराए गए वीडियो और तस्वीरों में मंदिर के पीछे की पहाड़ी पर बड़े पैमाने पर खुदाई के निशान दिखाई दे रहे हैं। कुछ तस्वीरों में काले तथा लाल रंग के पत्थरों का ढेर भी नजर आता है। ग्रामीणों का दावा है कि यह पत्थर कथित अवैध उत्खनन के बाद एकत्र किए गए हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित विभाग द्वारा आधिकारिक जांच की प्रतीक्षा है।

ग्रामीणों का कहना है कि दिन में क्षेत्र सामान्य दिखाई देता है, लेकिन रात होते ही मजदूरों को लगाकर पहाड़ी की खुदाई शुरू कर दी जाती है। उनका आरोप है कि इस पूरे कार्य को इस प्रकार अंजाम दिया जाता है कि किसी प्रकार का शोर-शराबा न हो और प्रशासन को इसकी जानकारी न मिल सके। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन रात के समय आकस्मिक निरीक्षण करे तो पूरे मामले का खुलासा हो सकता है।

स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि इस संबंध में कई बार मौखिक और लिखित शिकायतें संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई गईं, लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इससे ग्रामीणों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो मंदिर परिसर और उसके आसपास का पूरा क्षेत्र गंभीर क्षति का शिकार हो सकता है।

ग्रामीणों ने कहा कि वे लंबे समय से प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि जिम्मेदार विभाग यदि अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन समय पर करता तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि अब उन्हें ऐसा महसूस होने लगा है कि भगवान शिव ही अपने धाम की रक्षा करेंगे, क्योंकि प्रशासनिक स्तर पर उन्हें कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर के पीछे लगातार हो रही कथित खुदाई से पहाड़ी की प्राकृतिक संरचना कमजोर होती जा रही है। यदि इसी प्रकार उत्खनन जारी रहा तो भविष्य में भूस्खलन, मिट्टी कटाव अथवा अन्य प्राकृतिक जोखिम भी उत्पन्न हो सकते हैं। इससे मंदिर, तालाब और आसपास बसे लोगों की सुरक्षा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

पर्यावरण से जुड़े जानकारों का मानना है कि किसी भी धार्मिक एवं प्राकृतिक क्षेत्र के आसपास अनियंत्रित उत्खनन से भूमि का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे जल संरक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के साथ-साथ जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र भी प्रभावित हो सकता है। यदि समय रहते इस प्रकार की गतिविधियों पर नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

मामले में ग्राम पंचायत सरपंच से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। वहीं ग्राम पंचायत सचिव नरेश पटेल ने मिडिया से बात करते हुए कहा कि उन्हें इस संबंध में जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी लेकर आवश्यक स्तर पर इसे दिखवाया जाएगा।

पटवारी रामगोपाल यादव से बात करने पर उन्होंने कहा की मुझे इस विषय की जानकारी है मैं मौके पर गया था व आसपास के लोगों से पूंछताँच किया तो कोई भी बता नहीं रहा की कौन और कितने बजे खुदाई करता है, उन्होंने बताया की मेरे द्वारा कोटवार को कह रखा है की वो शाम सबेरे राउंड करता रहे एवं ऐसी कोई सम्भावना दिखे तो मुझे तत्काल सूचना देवें या वीडियो बना कर देवें ताकि हम एफ आर आई करा सकें।

समाचार प्रकाशित किए जाने तक मंदिर के मुख्य पुजारी से भी संपर्क का प्रयास जारी था। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा, ताकि समाचार का दूसरा पक्ष भी पाठकों के सामने रखा जा सके।

स्थानीय नागरिकों ने जिला कलेक्टर, खनिज विभाग, राजस्व विभाग तथा पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में अवैध उत्खनन की पुष्टि होती है तो सम्बंधित दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्र को पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाए तथा भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नियमित निगरानी और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि धार्मिक स्थलों की गरिमा और प्राकृतिक धरोहर की रक्षा करना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बल्कि पूरे समाज का दायित्व है। उनका मानना है कि यदि समय रहते इस मामले में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों के लिए यह ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर गंभीर संकट में पड़ सकती है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं कि वह इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराता है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के विरुद्ध क्या कदम उठाए जाते हैं।

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