डाक विभाग के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों का राष्ट्रव्यापी आंदोलन,चरणबद्ध कार्यक्रम घोषित।
20 जुलाई से काली पट्टी बांधकर विरोध की शुरुआत,5 अगस्त को प्रदेशव्यापी हड़ताल और 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी,कर्मचारियों ने निजीकरण,टारगेट आधारित कार्यप्रणाली और रिक्त पदों समेत कई मुद्दों पर उठाई आवाज।
सिलौंडी। भारतीय डाक विभाग कर्मचारी संघ ने डाक विभाग के कथित निजीकरण, कर्मचारियों पर बढ़ते कार्यभार और टारगेट आधारित कार्यप्रणाली के विरोध में राष्ट्रव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। संघ के संभागीय सचिव अनिल सिंह बागरी ने पत्र जारी कर बताया कि विभाग में लागू की जा रही नीतियों के कारण कर्मचारियों पर लगातार मानसिक एवं आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी कंपनी मैकेंजी के सुझावों के आधार पर डाक विभाग को निजीकरण की दिशा में ले जाया जा रहा है, जिससे विभाग की पारंपरिक व्यवस्था और कर्मचारियों के हित प्रभावित हो रहे हैं।
संघ का कहना है कि वर्तमान में कर्मचारियों एवं ग्रामीण डाक सेवकों से विभिन्न योजनाओं के लक्ष्य पूरे कराने के लिए अत्यधिक दबाव बनाया जा रहा है। कई स्थानों पर कर्मचारियों को अपने ही वेतन से बैंक खाते खुलवाकर लक्ष्य पूरे करने के लिए बाध्य किया जा रहा है। संघ ने इसे कर्मचारियों का आर्थिक और मानसिक शोषण बताते हुए तत्काल इस व्यवस्था को समाप्त करने की मांग की है।
संघ ने यह भी कहा कि एक शहर से दूसरे शहर तक डाक पहुंचाने के लिए संचालित रेल डाक सेवा के स्थान पर आरटीएन (रोड ट्रांसपोर्ट नेटवर्क) व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे सरकारी धन निजी ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने में खर्च हो रहा है। संगठन ने मांग की है कि रेल डाक सेवा के अनुभागों को पुनः प्रारंभ किया जाए ताकि डाक परिवहन की पारंपरिक एवं विश्वसनीय व्यवस्था बहाल हो सके तथा सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग हो।
आंदोलन के तहत जबलपुर संभाग सहित प्रदेशभर में चरणबद्ध कार्यक्रम तय किए गए हैं। इसके अनुसार 20 जुलाई से 27 जुलाई 2026 तक सभी डाकघरों में कर्मचारी काली पट्टी बांधकर कार्य करते हुए विरोध दर्ज कराएंगे। इसके बाद 28 जुलाई को लंच अवधि के दौरान मंडलीय कार्यालयों में विशाल प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। यदि इसके बावजूद मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 5 अगस्त 2026 को पूरे मध्यप्रदेश में एक दिवसीय हड़ताल की जाएगी। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और विभाग द्वारा कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो 18 अगस्त 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल प्रारंभ की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विभाग और सरकार की होगी।
संघ ने अपनी मांगों में टारगेट के नाम पर कर्मचारियों का शोषण समाप्त करने, ग्रामीण एवं विभागीय कर्मचारियों को गली-गली घूमकर व्यावसायिक लक्ष्य पूरे कराने की व्यवस्था बंद करने, रेल डाक सेवा की पुनर्बहाली, मेल मोटर विभाग सहित विभिन्न रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती, विभाग में बढ़ रहे भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं पर कठोर कार्रवाई, पोस्टल अकाउंट के विकेंद्रीकरण पर रोक, भूतपूर्व सैनिक कोटे से नियुक्त कर्मचारियों की वेतन विसंगति का शीघ्र निराकरण तथा वर्तमान एनडीसी/आईडीसी डिलीवरी प्रणाली समाप्त कर पुरानी एवं प्रभावी डाक वितरण व्यवस्था बहाल करने की मांग प्रमुख रूप से रखी है।
इसके अलावा संगठन ने आगामी 17 दिसंबर को आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय श्रम दिवस घोषित किए जाने की भी मांग उठाई है। संघ का कहना है कि डाक विभाग देश की सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं में से एक है और इसे मजबूत करने के लिए कर्मचारियों की समस्याओं का समय रहते समाधान किया जाना आवश्यक है। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी जायज मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा।


