गंदगी,पेयजल संकट और प्रशासनिक चुप्पी से उबाल पर छात्र,शासकीय महाविद्यालय उमरिया पान की बदहाली उजागर।
परिसर में कचरे के ढेर,बाथरूमों में जलभराव और फूटी पाइपलाइन से जर्जर हो रही दीवारें,शिकायतों के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं,हादसे की आशंका से सहमे विद्यार्थी।
उमरिया पान,ग्रामीण खबर MP।
शासकीय महाविद्यालय उमरिया पान में व्याप्त अव्यवस्थाएं अब एक गंभीर जनचिंता का विषय बन चुकी हैं। स्वच्छता, पेयजल और आधारभूत सुविधाओं की कमी ने विद्यार्थियों के धैर्य की परीक्षा ले ली है। शिक्षा ग्रहण करने के उद्देश्य से प्रतिदिन महाविद्यालय पहुंचने वाले छात्र-छात्राएं इन दिनों मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि पढ़ाई से अधिक समय उन्हें गंदगी, पानी की समस्या और असुरक्षित भवन की चिंता में बिताना पड़ रहा है।
महाविद्यालय परिसर में चारों ओर फैली गंदगी संस्थान की स्थिति को बयां कर रही है। जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं, जिनकी नियमित सफाई नहीं हो रही। कक्षाओं के बाहर और गलियारों में धूल, प्लास्टिक कचरा और अन्य अपशिष्ट पदार्थ देखे जा सकते हैं। छात्रों का आरोप है कि सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। परिसर में दुर्गंध के कारण वातावरण असहज हो गया है, जिससे अध्ययन का माहौल प्रभावित हो रहा है। विद्यार्थियों का कहना है कि जब परिसर ही अस्वच्छ हो, तो मन एकाग्र करना कठिन हो जाता है।
पेयजल संकट ने समस्या को और गंभीर बना दिया है। महाविद्यालय में शुद्ध पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है। कई नलों में पानी नहीं आता, तो कहीं पानी की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न है। विद्यार्थियों को या तो घर से पानी लाना पड़ता है या फिर दिनभर प्यासे रहना पड़ता है। गर्मी के मौसम में यह स्थिति और विकराल रूप ले सकती है। छात्र-छात्राओं का कहना है कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव किसी भी शैक्षणिक संस्थान के लिए शर्मनाक है।
शौचालयों की स्थिति अत्यंत दयनीय बताई जा रही है। बाथरूमों में नियमित सफाई का अभाव है, जिससे गंदगी फैली रहती है। कई स्थानों पर पाइपलाइन फूटी हुई हैं और लगातार लीकेज के कारण पानी एक मंजिल से दूसरी मंजिल तक बहता रहता है। फर्श पर जमा पानी से फिसलने की आशंका बनी रहती है। छात्राओं ने विशेष रूप से बताया कि शौचालयों की बदहाल स्थिति के कारण उन्हें भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है, जो उनकी गरिमा और स्वास्थ्य दोनों के लिए चिंताजनक है।
लगातार हो रहे जलभराव और रिसाव का असर भवन की संरचना पर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। दीवारों में सीलन आ चुकी है, प्लास्टर झड़ने लगा है और कई स्थानों पर दरारें उभर आई हैं। विद्यार्थियों और अभिभावकों ने आशंका जताई है कि यदि शीघ्र मरम्मत कार्य नहीं कराया गया तो किसी बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि प्रशासन की अनदेखी से न केवल पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि छात्रों की सुरक्षा भी खतरे में है।
छात्र-छात्राओं का कहना है कि उन्होंने कई बार प्राचार्य के समक्ष लिखित एवं मौखिक शिकायतें प्रस्तुत की हैं। हर बार समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया गया, किंतु जमीनी स्तर पर कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दी। शिकायतों की फाइलें आगे बढ़ने के बजाय दफ्तरों में ही सिमट कर रह गईं। विद्यार्थियों का आरोप है कि यदि समय रहते कार्रवाई की जाती, तो हालात इतने खराब नहीं होते।
कुछ विद्यार्थियों ने यह भी बताया कि महाविद्यालय में नियमित निरीक्षण और रखरखाव की व्यवस्था का अभाव है। यदि समय-समय पर भवन, जल व्यवस्था और स्वच्छता की समीक्षा की जाती, तो समस्याएं इस स्तर तक नहीं पहुंचतीं। उनका कहना है कि प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा सीधे विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
अभिभावकों में भी इस स्थिति को लेकर चिंता व्याप्त है। उनका कहना है कि वे अपने बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने के लिए भेजते हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां आश्वस्त करने वाली नहीं हैं। यदि शीघ्र ही सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो वे भी सामूहिक रूप से उच्च अधिकारियों से शिकायत करने पर विचार करेंगे।
विद्यार्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि स्वच्छता, पेयजल और भवन मरम्मत से संबंधित कार्य तत्काल प्रारंभ नहीं किए गए, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे। उनका कहना है कि वे किसी टकराव की स्थिति नहीं चाहते, बल्कि केवल बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, जो उनका अधिकार है।
महाविद्यालय प्रशासन की चुप्पी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। अब प्रश्न यह है कि संबंधित विभाग और उच्च अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं। शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता, विद्यार्थियों की सुरक्षा और संस्थान की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। यदि शीघ्र ठोस और पारदर्शी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मुद्दा व्यापक जनआक्रोश का रूप ले सकता है।




