जबलपुर NH-45 पर 400 करोड़ का ओवरब्रिज तीन साल में ध्वस्त,निर्माण गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल।

 जबलपुर NH-45 पर 400 करोड़ का ओवरब्रिज तीन साल में ध्वस्त,निर्माण गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल।

शहपुरा के पास रेलवे ओवरब्रिज का हिस्सा मरम्मत के दौरान गिरा,बड़ी जनहानि टली,ठेकेदार पर कार्रवाई और उच्च स्तरीय जांच के आदेश।

जबलपुर,ग्रामीण खबर MP।

मध्यप्रदेश के जबलपुर-भोपाल मार्ग पर स्थित नेशनल हाईवे-45 पर बने शहपुरा रेलवे ओवरब्रिज का एक बड़ा हिस्सा अचानक ध्वस्त हो जाने से प्रदेशभर में हड़कंप मच गया। लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह ओवरब्रिज महज तीन से चार वर्ष पूर्व ही तैयार हुआ था। इतने कम समय में संरचना का एक भाग गिर जाना निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रहा है।

घटना 22 फरवरी को उस समय हुई जब ओवरब्रिज के एक हिस्से पर मरम्मत कार्य चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अचानक तेज आवाज के साथ कंक्रीट और सरिया नीचे आ गिरे। राहत की बात यह रही कि जिस हिस्से में ध्वस्त हुआ, वहां उस समय नियमित यातायात चालू नहीं था, जिससे कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई। हालांकि घटना के तुरंत बाद राष्ट्रीय राजमार्ग-45 पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। प्रशासन ने तत्काल वैकल्पिक मार्गों से आवागमन शुरू कराया।

यह ओवरब्रिज जबलपुर और भोपाल को जोड़ने वाले अत्यंत व्यस्त मार्ग पर स्थित है। प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं। ऐसे में पुल के एक हिस्से का गिरना न केवल यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है बल्कि राज्य की आधारभूत संरचना की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि यह हादसा सामान्य यातायात के दौरान होता तो स्थिति बेहद भयावह हो सकती थी।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पुल के कुछ हिस्सों में दरारें और संरचनात्मक कमजोरियां सामने आने के बाद मरम्मत कार्य प्रारंभ किया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्माण के मात्र तीन-चार वर्षों में ही बड़े पैमाने पर मरम्मत की आवश्यकता पड़ रही थी तो यह स्वयं में गुणवत्ता संबंधी कमी की ओर संकेत करता है। तकनीकी दल द्वारा अब सैंपल जांच, डिजाइन मूल्यांकन और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच की जा रही है।

घटना के बाद लोक निर्माण विभाग के मंत्री राकेश सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने और प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि दोषी पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों और इंजीनियरों के विरुद्ध भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने उच्च स्तरीय तकनीकी जांच समिति गठित करने की घोषणा की है जो यह पता लगाएगी कि डिजाइन, सामग्री, निर्माण प्रक्रिया या निगरानी में कहां चूक हुई।

राजनीतिक स्तर पर भी यह मामला गर्मा गया है। विपक्षी दलों ने इसे निर्माण में कथित लापरवाही और भ्रष्टाचार का उदाहरण बताते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है। वहीं सरकार का कहना है कि पारदर्शी जांच कराई जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

इंजीनियरिंग विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी बड़े ओवरब्रिज या फ्लाईओवर की आयु सामान्यतः कई दशकों की होती है। ऐसे में तीन वर्ष के भीतर संरचना का हिस्सा ध्वस्त होना असामान्य घटना मानी जाती है। यदि जांच में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता या डिजाइन त्रुटि सामने आती है तो यह प्रदेश में चल रही अन्य परियोजनाओं की भी व्यापक समीक्षा का कारण बन सकता है।

फिलहाल प्रशासन द्वारा क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाने, मलबा साफ करने और शेष संरचना की स्थिरता की जांच का कार्य जारी है। यातायात को आंशिक रूप से वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट किया गया है। स्थानीय लोगों में घटना को लेकर चिंता और आक्रोश दोनों देखे जा रहे हैं। आमजन का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली परियोजनाओं में यदि गुणवत्ता से समझौता होगा तो जनता की जान जोखिम में पड़ेगी।

यह घटना प्रदेश में आधारभूत संरचना निर्माण की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही तंत्र की पुनर्समीक्षा की आवश्यकता को रेखांकित करती है। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि 400 करोड़ रुपये की इस परियोजना में आखिर चूक कहां हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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