शोक की घड़ी में संवेदना बनकर खड़े हुए थे विधायक संजय सत्येंद्र पाठक,दुखी परिवार को तत्काल सहायता पहुँची।
विजयराघवगढ़ बम्हनगवां स्कूल हादसे में मासूम की मृत्यु से क्षेत्र शोकाकुल,सहायता की आड़ में राजनीति पर उठे सवाल।
विजयराघवगढ़,ग्रामीण खबर MP।
विजयराघवगढ़ के बम्हनगवां स्थित शासकीय विद्यालय में जर्जर शौचालय की दीवार ढहने से मासूम राजकुमार वर्मन की असमय मृत्यु ने पूरे क्षेत्र को गहरे शोक में डुबो दिया है। एक मासूम, जो कुछ समय पहले तक अपने साथियों के साथ हंसी-खुशी विद्यालय परिसर में खेल रहा था, पलभर में काल के गाल में समा गया। इस दर्दनाक घटना ने न केवल एक परिवार की दुनिया उजाड़ दी, बल्कि पूरे क्षेत्र की संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया। गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा है और हर आंख नम दिखाई दे रही है।
बताया जाता है कि विद्यालय परिसर में स्थित शौचालय की दीवार लंबे समय से जर्जर अवस्था में थी। स्थानीय लोगों के अनुसार उसकी स्थिति चिंताजनक थी, लेकिन समय रहते मरम्मत नहीं हो सकी। हादसे वाले दिन अचानक दीवार भरभराकर गिर पड़ी, जिसकी चपेट में आकर मासूम राजकुमार गंभीर रूप से घायल हो गया। उपचार से पहले ही उसकी मृत्यु हो गई। यह समाचार फैलते ही पूरे विजयराघवगढ़ क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्रीय विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने तत्काल संवेदनशीलता दिखाते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया कि पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए। विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने एसडीएम एवं बीएमओ के माध्यम से 10 हजार रुपये की तात्कालिक सहायता राशि तुरंत भिजवाई तथा स्वयं की ओर से 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी परिवार तक पहुंचाई। विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की आर्थिक मदद इस अपूरणीय क्षति की भरपाई नहीं कर सकती, फिर भी शासन-प्रशासन की ओर से जो भी सहायता संभव होगी, वह सुनिश्चित की जाएगी।
विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने शोकाकुल माँ को संदेश भिजवाते हुए भरोसा दिलाया कि वे स्वयं शीघ्र ही परिवार से मिलने आएंगे और इस कठिन समय में उनके साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि विद्यालय भवनों की स्थिति का तत्काल निरीक्षण किया जाए और जहां कहीं भी जर्जर संरचनाएं हों, वहां शीघ्र मरम्मत या पुनर्निर्माण की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाएं दोबारा न हों।
हादसे के बाद जब पीड़ित परिवार जनपद कार्यालय पहुंचा, तो वहां का दृश्य अत्यंत मार्मिक था। मासूम की माँ की करुण पुकार सुनकर उपस्थित लोगों की आंखें भर आईं। वह बार-बार अपने बेटे का नाम लेकर बिलखती रही। उसकी गोद सूनी हो चुकी थी और उसका विलाप वातावरण को गमगीन कर रहा था। इसी दौरान विधायक संजय सत्येंद्र पाठक से दूरभाष पर उसकी बात कराई गई। विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने उसे ढांढस बंधाते हुए कहा कि यह दुख केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र का है और वे न्याय एवं सहायता दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
इस बीच कुछ लोगों द्वारा इस दुखद घटना को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज करने की कोशिशों ने भी चर्चा का विषय बना दिया। जानकारी के अनुसार परिवार को न्याय के नाम पर बस से कलेक्ट्रेट ले जाने की तैयारी की गई। क्षेत्र के अनेक नागरिकों ने इस कदम पर आपत्ति जताते हुए कहा कि शोक की इस घड़ी में प्रदर्शन और भीड़ जुटाने की अपेक्षा परिवार को मानसिक सहारा और प्रत्यक्ष सहयोग दिया जाना अधिक आवश्यक था।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हस्तक्षेप कर स्थिति को संभाला। कैमोर मंडल अध्यक्ष भवानी राजा मिश्रा एवं नगर परिषद उपाध्यक्ष हरिओम वर्मन मौके पर पहुंचे और परिवार को समझाइश देते हुए उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाया। उनका कहना था कि जब विधायक संजय सत्येंद्र पाठक पहले ही सहायता राशि प्रदान कर चुके हैं और न्याय का भरोसा दे चुके हैं, तब शोक संतप्त परिवार को राजनीतिक मंचों पर ले जाना उचित नहीं है।
क्षेत्रीय नागरिकों का मानना है कि आपदा और शोक की घड़ी राजनीति का अवसर नहीं हो सकती। एक माँ की सूनी गोद किसी नारे, प्रदर्शन या भाषण से नहीं भर सकती। ऐसे समय में सच्ची जनसेवा वही है, जो चुपचाप पीड़ित परिवार के साथ खड़ी हो और उनके आंसू पोंछने का प्रयास करे। विधायक संजय सत्येंद्र पाठक द्वारा दिखाई गई तत्परता और संवेदनशीलता को क्षेत्र के लोग इसी दृष्टि से देख रहे हैं।
आज पूरा विजयराघवगढ़ क्षेत्र मासूम राजकुमार वर्मन को नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। गांव के लोग परिवार के घर पहुंचकर सांत्वना दे रहे हैं और हर संभव सहयोग का आश्वासन दे रहे हैं। यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है।
शोक की इस घड़ी में जरूरत है संवेदना, सहयोग और सजग प्रशासनिक कार्रवाई की। विधायक संजय सत्येंद्र पाठक द्वारा प्रदर्शित मानवीय दृष्टिकोण ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि जनप्रतिनिधित्व का अर्थ केवल राजनीति नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में जनता के साथ खड़ा होना भी है।
