फ्लोरी मशीन से बन रही सीसी सड़क,गरीब मजदूरों का छीना जा रहा हक।ग्राम पंचायत पाली में गुणवत्ता पर गंभीर सवाल।

 फ्लोरी मशीन से बन रही सीसी सड़क,गरीब मजदूरों का छीना जा रहा हक।ग्राम पंचायत पाली में गुणवत्ता पर गंभीर सवाल।

सरपंच,सचिव और इंजीनियर पर मिलीभगत के आरोप,साइड में खुदाई कर मोटाई दिखाने का खेल,बीच में मात्र 2–3 इंच ढलाई का आरोप।

ढीमरखेड़ा,ग्रामीण खबर MP।

 जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा अंतर्गत ग्राम पंचायत पाली में निर्माणाधीन सीसी सड़क को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। गांव के लोगों ने निर्माण कार्य में अनियमितता, घटिया गुणवत्ता और स्थानीय मजदूरों की अनदेखी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस सड़क को गांव के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था, वही अब भ्रष्टाचार और लापरवाही की मिसाल बनती जा रही है।

ग्रामीणों के अनुसार पंचायत क्षेत्र में सीसी सड़क का निर्माण फ्लोरी मशीन से कराया जा रहा है। उनका आरोप है कि इस मशीन के उपयोग से गांव के गरीब और जरूरतमंद मजदूरों को काम से वंचित किया जा रहा है। पंचायत चुनाव के दौरान रोजगार और पारदर्शिता का वादा करने वाले जनप्रतिनिधि अब मशीनों के माध्यम से कार्य कराकर श्रमिकों के हक पर कुठाराघात कर रहे हैं। गांव के कई मजदूरों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि निर्माण कार्य में उन्हें रोजगार मिलेगा, लेकिन मशीनों के कारण उन्हें दरकिनार कर दिया गया।

मामले का दूसरा और अधिक गंभीर पक्ष निर्माण की गुणवत्ता से जुड़ा है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच, सचिव और संबंधित इंजीनियर की कथित मिलीभगत से निर्माण में मानकों की अनदेखी की जा रही है। लोगों का कहना है कि सड़क की मोटाई निर्धारित मानक के अनुरूप नहीं रखी जा रही। किनारों पर अधिक गहराई तक खुदाई कर मोटाई का आभास कराया जा रहा है, जबकि बीच हिस्से में मात्र 2 से 3 इंच की ही ढलाई की जा रही है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह तकनीकी नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। सीमेंट और गिट्टी का अनुपात ठीक न होने की बात कही जा रही है। जिससे भविष्य में इसके जल्दी खराब होने की आशंका जताई जा रही है। यदि सड़क कुछ ही समय में उखड़ जाती है तो यह शासकीय धन की बर्बादी होगी और ग्रामीणों को पुनः असुविधा का सामना करना पड़ेगा।

ग्राम पंचायत पाली के कई बुजुर्गों और युवाओं ने संयुक्त रूप से उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष तकनीकी जांच नहीं कराई गई तो यह मामला और गंभीर रूप ले सकता है। ग्रामीणों ने जनपद पंचायत और जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि निर्माण स्थल का भौतिक सत्यापन कराया जाए, सड़क की वास्तविक मोटाई की माप की जाए तथा उपयोग की गई सामग्री का परीक्षण कराया जाए।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि यदि जांच में अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित सरपंच, सचिव और इंजीनियर के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में पंचायत स्तर पर होने वाले निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि इस प्रकार की शिकायतों की पुनरावृत्ति न हो।

यह मामला केवल एक सड़क के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण विकास योजनाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा प्रश्न है। सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ऐसे में यदि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता किया जाता है, तो इससे शासन की मंशा पर भी सवाल खड़े होते हैं।

गांव के सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि पंचायतों में विकास कार्य तभी सार्थक माने जाएंगे जब उनमें स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो और मजदूरों को प्राथमिकता दी जाए। मशीनों के अत्यधिक उपयोग से जहां एक ओर लागत कम दिखाई जा सकती है, वहीं दूसरी ओर रोजगार के अवसर भी प्रभावित होते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर यदि गरीबों का हक छीना जाएगा और गुणवत्ता से समझौता होगा, तो इसका विरोध जारी रहेगा।

अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का आंकलन करेंगे या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा, यह आने वाला समय बताएगा। फिलहाल ग्राम पंचायत पाली में बन रही सीसी सड़क ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब मिलना आवश्यक है।

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