विधानसभा में विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने उठाया किसानों का मुद्दा,जलाशयों और नहरों की मरम्मत की मांग।

 विधानसभा में विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने उठाया किसानों का मुद्दा,जलाशयों और नहरों की मरम्मत की मांग।

विजयराघवगढ़ के खितौली और जगुआ जलाशयों में सिल्ट,रिसाव व कच्ची नहरों से सिंचाई प्रभावित,अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने को उठाई आवाज।

विजयराघवगढ़,ग्रामीण खबर MP।

विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र के विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने एक बार फिर किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए विधानसभा में खितौली एवं जगुआ जलाशयों और उनसे निकलने वाली नहरों की जर्जर स्थिति का मुद्दा प्रभावी ढंग से उठाया। उन्होंने याचिका प्रस्तुत कर जल संसाधन विभाग का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया कि यदि समय रहते इन जलाशयों और नहरों की मरम्मत नहीं की गई तो क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था गंभीर संकट में पड़ सकती है।

विधानसभा में अपने वक्तव्य के दौरान विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने कहा कि विजयराघवगढ़ क्षेत्र के खितौली और जगुआ जलाशय वर्षों से किसानों की जीवनरेखा रहे हैं। इन जलाशयों के माध्यम से हजारों एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलती है, जिससे रबी और खरीफ दोनों ही फसलों का उत्पादन बेहतर होता है। लेकिन वर्तमान में इन जलाशयों में अत्यधिक सिल्ट जमा हो जाने से जल संग्रहण क्षमता में निरंतर कमी आ रही है। परिणामस्वरूप पर्याप्त वर्षा होने के बावजूद जलाशय अपनी पूर्ण क्षमता से पानी संग्रहित नहीं कर पा रहे हैं।

विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने सदन को बताया कि बांधों की संरचना भी अब पुरानी हो चुकी है। कई स्थानों पर कटाव और रिसाव की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे जल संरक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यदि इन संरचनाओं का समय पर सुदृढ़ीकरण नहीं किया गया तो भविष्य में सुरक्षा संबंधी खतरे भी उत्पन्न हो सकते हैं। उन्होंने मांग की कि जलाशयों की व्यापक तकनीकी जांच कराई जाए और आवश्यक मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृति दी जाए।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जलाशयों से निकलने वाली नहरों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। अधिकांश नहरें कच्ची हैं और वर्षों से उनकी लाइनिंग नहीं की गई है। इसके कारण नहरों से पानी का भारी रिसाव होता है और बीच रास्ते में ही बड़ी मात्रा में पानी व्यर्थ बह जाता है। विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने कहा कि जब पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंचता तो सबसे अधिक नुकसान उन किसानों को होता है जिनके खेत नहरों के अंत में स्थित हैं। ऐसे किसानों को या तो सिंचाई के वैकल्पिक साधनों पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है या फिर फसल उत्पादन में कमी का सामना करना पड़ता है।

विधानसभा में प्रस्तुत याचिका के माध्यम से विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने स्पष्ट मांग की कि खितौली और जगुआ जलाशयों की गहरी सफाई कर सिल्ट हटाई जाए, जलाशयों के गेट्स की मरम्मत कर उन्हें सुचारु संचालन योग्य बनाया जाए तथा नहरों की पक्की लाइनिंग कर पानी की बर्बादी को रोका जाए। उन्होंने कहा कि यदि इन सभी कार्यों को योजनाबद्ध तरीके से क्रियान्वित किया जाए तो न केवल जलाशयों की आयु बढ़ेगी बल्कि हजारों एकड़ भूमि को नियमित और पर्याप्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने यह भी कहा कि कृषि प्रधान क्षेत्र में जल प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण विषय है। जब जलाशयों में पर्याप्त जल उपलब्ध रहता है, तब उसका वैज्ञानिक और संतुलित वितरण सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब पानी अंतिम छोर के खेत तक पहुंचे।

उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष के माध्यम से विभाग को निर्देशित किए जाने की मांग की कि इस विषय पर शीघ्र सर्वे कर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए और आवश्यक बजट का प्रावधान किया जाए। विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने यह भी कहा कि क्षेत्र के किसान लंबे समय से इस समस्या से जूझ रहे हैं और अब उन्हें ठोस समाधान की अपेक्षा है।

क्षेत्र के किसानों ने विधायक संजय सत्येंद्र पाठक द्वारा इस मुद्दे को विधानसभा में उठाए जाने का स्वागत किया है। किसानों का कहना है कि यदि जलाशयों की क्षमता बढ़ाई जाती है और नहरों की मरम्मत कर पक्की लाइनिंग की जाती है तो सिंचाई की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। इससे उत्पादन बढ़ेगा, लागत घटेगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी।

विजयराघवगढ़ क्षेत्र में कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ऐसे में जलाशयों और नहरों की मजबूती केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि किसानों के भविष्य और क्षेत्र के समग्र विकास से जुड़ा प्रश्न है। विधायक संजय सत्येंद्र पाठक द्वारा सदन में उठाया गया यह मुद्दा आने वाले समय में क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है, बशर्ते विभाग समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करे।

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