सूचना का अधिकार अधिनियम की अनदेखी पर सख्त रुख,ढीमरखेड़ा सीईओ ने सचिव को जारी किया अंतिम चेतावनी पत्र।

 सूचना का अधिकार अधिनियम की अनदेखी पर सख्त रुख,ढीमरखेड़ा सीईओ ने सचिव को जारी किया अंतिम चेतावनी पत्र।

24 घंटे में जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश,अन्यथा वेतन रोकने व अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव जिला पंचायत कटनी को भेजने की चेतावनी।

ढीमरखेड़ा,ग्रामीण खबर MP।

 सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जानकारी समय-सीमा में उपलब्ध न कराए जाने के मामले में जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के मुख्यकार्यपालन अधिकारी यजुर्वेन्द्र कोरी ने कड़ा प्रशासनिक रुख अपनाते हुए ग्राम पंचायत सचिव शंकर लाल साहू को अंतिम चेतावनी पत्र जारी किया है। इस कार्रवाई को प्रशासनिक सख्ती और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

प्रकरण के अनुसार ग्राम मुरवारी निवासी आवेदक राजेंद्र प्रसाद पाठक ने दिनांक 19 जनवरी 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6(1) के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत कर जून 2022 से वर्तमान तिथि तक आयोजित ग्राम सभाओं की कार्यवाही पुस्तिका, पारित प्रस्तावों तथा उनसे संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की थी। आवेदन प्राप्त होने के उपरांत कार्यालयीन पत्र क्रमांक 5840 दिनांक 29 जनवरी 2026 एवं पत्र क्रमांक 7196 दिनांक 12 फरवरी 2026 के माध्यम से संबंधित सचिव को आवश्यक कार्यवाही कर जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे।

इसके बावजूद निर्धारित समयावधि में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। मुख्यकार्यपालन अधिकारी द्वारा जारी अंतिम चेतावनी पत्र में उल्लेख किया गया है कि संबंधित सचिव को कई बार दूरभाष के माध्यम से भी निर्देशित किया गया, किंतु न तो कार्यालय में और न ही आवेदक को जानकारी उपलब्ध कराई गई। पत्र में इस आचरण को स्वेच्छाचारिता, घोर लापरवाही तथा वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना बताया गया है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त आवेदन का समयबद्ध निराकरण करना संबंधित लोक सूचना अधिकारी या जिम्मेदार अधिकारी का विधिक दायित्व होता है। निर्धारित अवधि में जानकारी न देना अधिनियम की भावना के विपरीत है और इससे पारदर्शिता व जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़ा होता है।

आवेदक द्वारा समय पर जानकारी न मिलने के कारण संबंधित सचिव के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग भी की गई है। इसी संदर्भ में मुख्यकार्यपालन अधिकारी ने अंतिम अवसर प्रदान करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 24 घंटे के भीतर मांगी गई समस्त जानकारी की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं।

पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित समयसीमा में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती है तो संबंधित सचिव का वेतन रोके जाने की कार्रवाई की जाएगी तथा विधिवत अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु प्रस्ताव जिला पंचायत कटनी को प्रेषित किया जाएगा। ऐसी स्थिति में समस्त उत्तरदायित्व संबंधित सचिव का व्यक्तिगत रूप से माना जाएगा।

प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि सूचना के अधिकार जैसे संवेदनशील विषयों पर किसी भी प्रकार की ढिलाई या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 नागरिकों को शासन-प्रशासन से जानकारी प्राप्त करने का वैधानिक अधिकार प्रदान करता है और यह कानून पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासन की आधारशिला माना जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्राम पंचायत स्तर पर अभिलेखों का संधारण एवं उपलब्धता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यही अभिलेख ग्रामीण विकास कार्यों, योजनाओं के क्रियान्वयन और वित्तीय व्यय की पारदर्शिता का आधार होते हैं। यदि इन अभिलेखों को उपलब्ध कराने में लापरवाही बरती जाती है तो इससे न केवल आमजन का विश्वास प्रभावित होता है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ता है।

स्थानीय नागरिकों के बीच भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चा का माहौल है। लोगों का कहना है कि यदि समय पर सूचना उपलब्ध कराई जाए तो अनावश्यक विवादों और शिकायतों की स्थिति ही उत्पन्न न हो। पारदर्शी कार्यप्रणाली से प्रशासन और जनता के बीच विश्वास मजबूत होता है।

अब देखना यह होगा कि संबंधित सचिव निर्धारित 24 घंटे की समयसीमा के भीतर जानकारी उपलब्ध कराते हैं या नहीं। यदि निर्देशों की पुनः अवहेलना होती है तो वेतन रोकने और अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। फिलहाल यह मामला क्षेत्र में प्रशासनिक सख्ती और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

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