विविध प्रतियोगी परीक्षाओं में व्याकरण की भूमिका विषय पर विशिष्ट व्याख्यान सत्र सम्पन्न।

 विविध प्रतियोगी परीक्षाओं में व्याकरण की भूमिका विषय पर विशिष्ट व्याख्यान सत्र सम्पन्न।

महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय में व्याकरण को प्रतियोगी सफलता की कुंजी बताया विद्वानों ने।

कटनी,ग्रामीण खबर MP।

दिनांक 7 फरवरी 2026, शनिवार को अपराह्न 2:00 बजे माननीय कुलगुरू जी के संरक्षण में महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय के वेद एवं संस्कृत विभाग के संयुक्त आध्वर्यव से वेद विभाग में “विविध प्रतियोगी परीक्षाओं में व्याकरण की भूमिका” विषय पर एक विशिष्ट व्याख्यान सत्र का गरिमामयी एवं सफल आयोजन किया गया। यह शैक्षणिक कार्यक्रम विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी तथा भाषा-शुद्धि के महत्व को केंद्र में रखकर आयोजित किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के आचार्यगण, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में अमित उपाध्याय, सहायक प्राध्यापक, व्याकरण विभाग, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली (सदाशिव परिसर, पुरी) उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. मानवेन्द्र पाण्डेय ने की, जबकि सारस्वत अतिथि के रूप में डॉ. नित्येश्वर चतुर्वेदी की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की विद्वतापूर्ण गरिमा को और अधिक बढ़ाया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ वैदिक मंगलाचरण के साथ हुआ, जिससे संपूर्ण वातावरण वैदिक चेतना एवं शैक्षणिक गंभीरता से परिपूर्ण हो गया। इसके पश्चात कार्यक्रम संयोजक एवं वेद विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक चन्द्र परिडा ने सभी अतिथियों का औपचारिक स्वागत किया तथा विषय की भूमिका प्रस्तुत करते हुए व्याख्यान सत्र की प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग में UPSC, SSC, राज्य सेवा आयोग, शिक्षक भर्ती, धर्मगुरु, एवं अन्य विविध प्रतियोगी परीक्षाओं में व्याकरण का सुदृढ़ एवं व्यावहारिक ज्ञान सफलता की आधारशिला है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि व्याकरण केवल परीक्षा तक सीमित विषय नहीं, बल्कि भाषा की आत्मा है, जो विचारों की शुद्धता और अभिव्यक्ति की स्पष्टता सुनिश्चित करता है।

मुख्य वक्ता अमित उपाध्याय ने अपने अत्यंत सारगर्भित, तथ्यपूर्ण एवं प्रेरणादायक व्याख्यान में व्याकरण की मूलभूत अवधारणाओं पर क्रमबद्ध ढंग से प्रकाश डाला। उन्होंने भाषा-शुद्धि, वाक्य-विन्यास, संधि, समास, कारक, शब्द-रचना, धातु-विचार एवं प्रयोगात्मक व्याकरण की उपयोगिता को प्रतियोगी परीक्षाओं के संदर्भ में उदाहरणों सहित स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि अधिकांश प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से व्याकरण आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें सफलता के लिए अवधारणात्मक स्पष्टता अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने यह भी कहा कि व्याकरण केवल अंक प्राप्त करने का साधन नहीं है, बल्कि यह तार्किक चिंतन, विश्लेषणात्मक क्षमता और प्रभावी अभिव्यक्ति को सुदृढ़ करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास, पूर्व वर्षों के प्रश्न-पत्रों के सूक्ष्म विश्लेषण, पाठ्यक्रम की गहन समझ तथा मानक एवं प्रमाणिक ग्रंथों के सतत अध्ययन की प्रेरणा दी। उन्होंने व्याकरण को जीवनोपयोगी विषय बताते हुए इसके माध्यम से व्यक्तित्व विकास की संभावना पर भी प्रकाश डाला।

सारस्वत अतिथि डॉ. नित्येश्वर चतुर्वेदी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए व्याकरण को भाषा की आत्मा बताया। उन्होंने कहा कि शुद्ध, संयत एवं संस्कारित भाषा व्यक्ति की वैचारिक परिपक्वता का परिचायक होती है। भाषा की शुद्धता न केवल संप्रेषण को प्रभावी बनाती है, बल्कि सामाजिक, शैक्षणिक एवं बौद्धिक प्रतिष्ठा को भी सुदृढ़ करती है।

अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. मानवेन्द्र पाण्डेय ने विषय की सामयिकता एवं उपयोगिता पर विशेष बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि व्याकरण को कठिन या बोझिल विषय मानने के बजाय उसे प्रतियोगी सफलता एवं बौद्धिक विकास का सशक्त साधन समझकर अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि निरंतर अभ्यास और सही मार्गदर्शन से व्याकरण विषय में दक्षता प्राप्त की जा सकती है।

कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित व्याकरणिक जिज्ञासाओं के समाधान प्राप्त किए। मुख्य वक्ता एवं अतिथियों द्वारा दिए गए उत्तरों से विद्यार्थियों को विषय की व्यावहारिक समझ प्राप्त हुई।

धन्यवाद ज्ञापन डॉ. चन्द्रशेखर मिश्र द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं, आचार्यगणों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन शान्तिपाठ के साथ हुआ।

इस अवसर पर डॉ. खुशेन्द्र देव चतुर्वेदी, हरिनारायण शर्मा, धनीराम त्रिपाठी सहित अनेक आचार्यगण, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। यह विशिष्ट व्याख्यान सत्र विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक, उपयोगी एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।

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