बजट में कटनी की अनदेखी,प्रदेश पर 5 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज-पूर्व जिलाध्यक्ष करण सिंह चौहान।
एयरपोर्ट,हवाई पट्टी और नर्मदा नहर पर नहीं हुआ कोई प्रावधान,सरकार पर कर्ज के बोझ से प्रदेश को दबाने का आरोप।
कटनी,ग्रामीण खबर MP।
मध्यप्रदेश विधानसभा में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा प्रस्तुत बजट को लेकर प्रदेशभर में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में कटनी जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं छिंदवाड़ा प्रभारी करण सिंह चौहान ने बजट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इस बार के बजट में कटनी जिले को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने विकास के बड़े दावे तो किए हैं, लेकिन हकीकत में कटनी के हिस्से में निराशा ही आई है।
पूर्व जिलाध्यक्ष करण सिंह चौहान ने कहा कि बजट भाषण में प्रदेश के विभिन्न शहरों में एयरपोर्ट विकास और अधोसंरचना विस्तार का उल्लेख किया गया, लेकिन कटनी की बहुप्रतीक्षित हवाई पट्टी के संबंध में कोई स्पष्ट घोषणा या बजटीय प्रावधान सामने नहीं आया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से जिले के जनप्रतिनिधि और व्यापारी वर्ग हवाई पट्टी के विस्तार और नियमित उड़ानों की मांग करते रहे हैं, जिससे उद्योग, व्यापार और पर्यटन को गति मिल सके, लेकिन इस दिशा में बजट मौन रहा।
पूर्व जिलाध्यक्ष करण सिंह चौहान ने कहा कि कटनी भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जिला है और यहां खनिज, कृषि तथा व्यापार की अपार संभावनाएं हैं। यदि हवाई सुविधा विकसित होती तो निवेश को बढ़ावा मिलता, युवाओं को रोजगार के अवसर मिलते और जिले की आर्थिक तस्वीर बदल सकती थी। लेकिन सरकार ने इस महत्वपूर्ण विषय को प्राथमिकता नहीं दी।
किसानों के मुद्दे पर बोलते हुए पूर्व जिलाध्यक्ष करण सिंह चौहान ने कहा कि कटनी जिले के किसानों को पिछले लगभग 25 वर्षों से नर्मदा जल मिलने का सपना दिखाया जा रहा है। हर चुनाव में नर्मदा नहर का वादा दोहराया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रगति बेहद धीमी है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के बजट में भी कटनी तक नर्मदा जल पहुंचाने के लिए कोई स्पष्ट और ठोस प्रावधान नजर नहीं आया, जिससे यह आशंका प्रबल हो गई है कि अगले वर्ष भी जिले के किसानों को नर्मदा का पानी नहीं मिल पाएगा।
उन्होंने कहा कि नर्मदा जल मिलने से जिले की हजारों एकड़ कृषि भूमि सिंचित हो सकती है, फसल उत्पादन बढ़ सकता है और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। लेकिन बजट में इस संबंध में कोई समयसीमा या धनराशि निर्धारित नहीं की गई, जो किसानों के साथ अन्याय है।
प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए पूर्व जिलाध्यक्ष करण सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश पर 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लगातार कर्ज लेकर वित्तीय संतुलन साधने का प्रयास कर रही है, जबकि विकास की वास्तविक तस्वीर अलग है। उन्होंने कहा कि बजट सत्र से पहले ही 5,600 करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया जाना इस बात का संकेत है कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति दबाव में है।
पूर्व जिलाध्यक्ष करण सिंह चौहान ने कहा कि बढ़ता हुआ कर्ज अंततः आम जनता पर करों और शुल्कों के रूप में बोझ बनकर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसान, युवा, छोटे व्यापारी और मध्यम वर्ग पहले से ही महंगाई और बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। ऐसे समय में अपेक्षा थी कि बजट में राहत और प्रोत्साहन के ठोस कदम दिखाई देंगे, लेकिन कटनी सहित कई जिलों के लिए विशेष घोषणाएं न होना निराशाजनक है।
उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए था कि वह क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए पिछड़े और उपेक्षित जिलों के लिए विशेष पैकेज की घोषणा करती। कटनी जैसे औद्योगिक और कृषि प्रधान जिले को बुनियादी ढांचे, सिंचाई, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में विशेष सहायता मिलनी चाहिए थी, लेकिन बजट में ऐसा कोई स्पष्ट रोडमैप सामने नहीं आया।
पूर्व जिलाध्यक्ष करण सिंह चौहान ने मांग की कि सरकार कटनी जिले के लिए अलग से विशेष विकास पैकेज की घोषणा करे। हवाई पट्टी के विकास को प्राथमिकता सूची में शामिल किया जाए और नर्मदा नहर परियोजना के लिए निश्चित समयसीमा तय कर पर्याप्त बजट आवंटित किया जाए। साथ ही जिले में उद्योगों को बढ़ावा देने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए विशेष योजनाएं शुरू की जाएं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी जनहित के मुद्दों पर चुप नहीं बैठेगी। यदि कटनी जिले की लगातार अनदेखी जारी रही तो पार्टी व्यापक जनआंदोलन करेगी और जिले के अधिकारों की आवाज को सड़क से लेकर सदन तक मजबूती से उठाएगी।
अंत में पूर्व जिलाध्यक्ष करण सिंह चौहान ने कहा कि बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं होना चाहिए, बल्कि यह प्रदेश और जिलों के संतुलित विकास का मार्गदर्शक होना चाहिए। कटनी को उसका अधिकार और विकास का उचित हिस्सा मिलना ही चाहिए, अन्यथा जनता आने वाले समय में इसका जवाब देगी।
