यूजीसी एक्ट के समर्थन में ओबीसी महासभा और लोधी क्रांति सेना का जोरदार प्रदर्शन,मुख्य कार्यपालन अधिकारी को सौंपा ज्ञापन।
ढीमरखेड़ा तहसील में रैली निकालकर शासन से प्रभावी क्रियान्वयन की मांग,शिक्षा में सामाजिक न्याय और ओबीसी अधिकारों की सुरक्षा पर दिया बल।
ढीमरखेड़ा,ग्रामीण खबर MP।
जिले की तहसील ढीमरखेड़ा में आज ओबीसी महासभा एवं लोधी क्रांति सेना संगठन के संयुक्त तत्वावधान में यूजीसी एक्ट के समर्थन में एक व्यापक एवं संगठित प्रदर्शन किया गया। बड़ी संख्या में एकत्रित हुए कार्यकर्ताओं ने रैली निकालकर अपनी मांगों को लेकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी को विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए शासन से ठोस और प्रभावी कदम उठाने की अपील की।
कार्यक्रम की शुरुआत तहसील मुख्यालय परिसर में संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के एकत्रीकरण से हुई। सुबह से ही विभिन्न ग्रामों और आसपास के क्षेत्रों से लोग ढीमरखेड़ा पहुंचे। सभा स्थल पर सामाजिक न्याय, शिक्षा में समान अवसर और पिछड़े वर्गों के अधिकारों से संबंधित नारे गूंजते रहे। इसके बाद संगठित रूप से एक रैली निकाली गई, जो मुख्य मार्गों से होते हुए तहसील कार्यालय पहुंची।
रैली के दौरान कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण और अनुशासित ढंग से मार्च किया। हाथों में तख्तियां, बैनर और ज्ञापन की प्रतियां लिए हुए प्रतिभागियों ने शिक्षा व्यवस्था में समान भागीदारी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाई। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यूजीसी एक्ट उच्च शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ सामाजिक संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बशर्ते इसके प्रावधानों को पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ लागू किया जाए।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक उन्नति का आधार है। यदि शिक्षा में अवसरों की समानता सुनिश्चित नहीं की जाएगी तो समाज के वंचित और पिछड़े वर्ग मुख्यधारा से दूर रह जाएंगे। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यूजीसी एक्ट के प्रावधानों का सही क्रियान्वयन ओबीसी समाज सहित अन्य पिछड़े वर्गों को शैक्षणिक संस्थानों में उचित प्रतिनिधित्व और अवसर दिलाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।
ओबीसी महासभा के जिला अध्यक्ष डॉ. बीके पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि संगठन का उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव उत्पन्न करना नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि यूजीसी एक्ट के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, गुणवत्ता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने शासन से मांग की कि एक्ट के सभी प्रावधानों को जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू किया जाए तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही या भेदभाव को बर्दाश्त न किया जाए।
डॉ. पटेल ने यह भी कहा कि ओबीसी वर्ग देश की सामाजिक संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उसकी शैक्षणिक उन्नति राष्ट्र के समग्र विकास से जुड़ी हुई है। यदि पिछड़े वर्गों को शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर मिलेंगे तो वे भी देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगे। उन्होंने प्रशासन से अपेक्षा जताई कि ज्ञापन की मांगों को गंभीरता से शासन तक पहुंचाया जाएगा और सकारात्मक पहल की जाएगी।
लोधी क्रांति सेना के पदाधिकारियों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा समाज की प्रगति की धुरी है। उन्होंने कहा कि यदि उच्च शिक्षा संस्थानों में समान अवसर और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा तो सामाजिक असमानताओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। वक्ताओं ने यह भी कहा कि संगठन भविष्य में भी समाजहित के मुद्दों पर लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाता रहेगा।
ज्ञापन में संगठन द्वारा मांग की गई कि यूजीसी एक्ट से संबंधित सभी प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू किया जाए, निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाए तथा ओबीसी वर्ग के अधिकारों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। साथ ही यह भी मांग की गई कि शिक्षा संस्थानों में किसी प्रकार की अनदेखी या भेदभाव की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने ज्ञापन प्राप्त करते हुए प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों को संबंधित विभाग और शासन स्तर तक विधिवत प्रेषित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन लोकतांत्रिक तरीके से रखी गई मांगों का सम्मान करता है और नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में संगठन के पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं समाज के वरिष्ठजन उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में अनुशासन और शांति बनाए रखी गई, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित नहीं हुई।
ढीमरखेड़ा में आयोजित यह प्रदर्शन न केवल एक संगठनात्मक गतिविधि रहा, बल्कि शिक्षा और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को लेकर समाज में बढ़ती जागरूकता का भी संकेत देता है। अब सभी की निगाहें शासन स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ज्ञापन में उठाई गई मांगों पर किस प्रकार के ठोस कदम उठाए जाते हैं और यूजीसी एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में क्या पहल की जाती है।



