मुरवारी ग्राम पंचायत के सरपंच पर भ्रष्टाचार के आरोप,जिला पंचायत कटनी ने अपर संचालक पंचायत राज को भेजा जांच प्रतिवेदन।

 मुरवारी ग्राम पंचायत के सरपंच पर भ्रष्टाचार के आरोप,जिला पंचायत कटनी ने अपर संचालक पंचायत राज को भेजा जांच प्रतिवेदन।

सीपी ग्राम पोर्टल की शिकायतों में अनियमितताएं प्रमाणित,शासन की राशि परिजनों को लाभ पहुंचाने और नियमों के उल्लंघन का मामला,सरपंच-सचिव के विरुद्ध कार्रवाई प्रक्रिया प्रारंभ।

कटनी,ग्रामीण खबर MP।

जिले की ढीमरखेड़ा तहसील अंतर्गत मुरवारी ग्राम पंचायत में विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों का मामला अब उच्च स्तर तक पहुंच गया है। शिकायतों की विस्तृत जांच के बाद जिला पंचायत कटनी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने संपूर्ण प्रतिवेदन अपर संचालक, पंचायत राज संचालनालय मध्यप्रदेश को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दिया है। इस घटनाक्रम के बाद पंचायत स्तर पर जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

मामले की शुरुआत पीजी सीपी ग्राम पोर्टल पर दर्ज दो शिकायतों से हुई। शिकायतकर्ता राजेंद्र प्रसाद पाठक द्वारा क्रमांक MOPRJ/E/2025/0007775 दिनांक 28 अगस्त 2025 तथा MOPRJ/E/2025/0010354 दिनांक 10 अक्टूबर 2025 के माध्यम से ग्राम पंचायत मुरवारी के विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप था कि पंचायत में शासन की विभिन्न योजनाओं के तहत स्वीकृत राशि का उपयोग नियमों के अनुरूप नहीं किया गया तथा कुछ मामलों में पक्षपातपूर्ण ढंग से कार्य आवंटित किए गए।

भोपाल स्तर से प्राप्त पत्र क्रमांक /शिकायत/रा.पं./15916/CPGRAM दिनांक 28 अगस्त 2025 एवं पत्र क्रमांक /शिकायत/रा.पं./सीपी ग्राम/2025/19136 दिनांक 28 अक्टूबर 2025 के संदर्भ में जिला पंचायत कटनी द्वारा आदेश क्रमांक /6795/सीपी ग्राम शिकायत/जिलापंचायत/2025 दिनांक 17 नवंबर 2025 जारी कर विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए। इसके पश्चात संबंधित अधिकारियों द्वारा अभिलेखों का परीक्षण, भुगतान विवरण की समीक्षा तथा संबंधित पक्षों से जानकारी प्राप्त कर जांच प्रतिवेदन तैयार किया गया।

जांच में यह तथ्य सामने आया कि ग्राम पंचायत द्वारा कराए गए कुछ विकास कार्यों में व्यय की गई राशि का अप्रत्यक्ष लाभ साईं ट्रेडर्स नामक फर्म को पहुंचा। प्रतिवेदन में उल्लेख है कि उक्त फर्म के संचालक निशांत कुमार लोधी हैं, जो सरपंच अजय पटेल लोधी के पुत्र बताए गए हैं। यदि यह तथ्य अंतिम रूप से स्थापित होता है तो इसे हितों के टकराव तथा पद के दुरुपयोग की श्रेणी में देखा जा सकता है। शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में पारिवारिक लाभ पहुंचाना पंचायत राज व्यवस्था की मूल भावना के विपरीत माना जाता है।

जांच में सामग्री भंडार क्रय प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। नियमानुसार सामग्री क्रय के लिए निर्धारित प्रक्रिया, निविदा आमंत्रण तथा प्रतिस्पर्धी दरों का पालन आवश्यक होता है, किंतु अभिलेखों में इस प्रक्रिया के पालन में कमी पाई गई। यह वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता के मानकों के अनुरूप नहीं माना गया है।

इसके अतिरिक्त साईं ट्रेडर्स द्वारा प्राप्त जीएसटी राशि शासन के पक्ष में जमा कर चालान प्रस्तुत नहीं किए जाने का उल्लेख भी प्रतिवेदन में किया गया है। यदि जीएसटी की राशि का समुचित समायोजन नहीं हुआ है तो यह कर संबंधी नियमों के उल्लंघन का विषय भी बन सकता है।

मजदूरी भुगतान के संबंध में भी जांच में अनियमितता सामने आई है। प्रतिवेदन के अनुसार कुछ मामलों में मजदूरों के खातों में सीधे भुगतान करने के बजाय अन्य खातों में राशि अंतरित किए जाने की पुष्टि हुई है। शासन द्वारा श्रमिक भुगतान में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण की व्यवस्था पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू की गई है, ऐसे में इस प्रकार की गड़बड़ी को गंभीर माना गया है।

जांच प्रतिवेदन में बिंदु क्रमांक 2 एवं 5 को प्रमाणित पाया गया है, जबकि भंडार क्रय नियमों के उल्लंघन संबंधी बिंदुओं को भी गंभीर अनियमितता की श्रेणी में रखा गया है। जिला पंचायत कटनी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा अपर संचालक पंचायत राज संचालनालय मध्यप्रदेश को भेजे गए पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि शिकायतों की जांच उपरांत सरपंच एवं सचिव के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है तथा विस्तृत प्रतिवेदन आगामी आवश्यक निर्णय हेतु प्रस्तुत है।

स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामवासियों का कहना है कि पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में पारदर्शिता और जनभागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंचे।

प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि यदि जांच में पाए गए तथ्यों के आधार पर कठोर कार्रवाई होती है तो यह अन्य पंचायत प्रतिनिधियों के लिए भी एक संदेश होगा कि शासन की राशि के उपयोग में किसी भी प्रकार की लापरवाही या पक्षपात स्वीकार्य नहीं है। पंचायत राज प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए वित्तीय अनुशासन, नियमों का पालन और सामाजिक जवाबदेही अत्यंत आवश्यक है।

अब सभी की निगाहें पंचायत राज संचालनालय मध्यप्रदेश के आगामी निर्णय पर टिकी हैं। यदि दोष सिद्ध होता है तो संबंधित पदाधिकारियों के विरुद्ध निलंबन, पदच्युत करने अथवा अन्य दंडात्मक कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि इस प्रकरण में प्रशासनिक स्तर पर क्या अंतिम निर्णय लिया जाता है और पंचायत स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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