कृषि उद्यमी प्रशिक्षण की परीक्षा संपन्न,35 महिलाओं-पुरुषों ने लिया स्वरोजगार का संकल्प।

 कृषि उद्यमी प्रशिक्षण की परीक्षा संपन्न,35 महिलाओं-पुरुषों ने लिया स्वरोजगार का संकल्प।

ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से 13 दिवसीय प्रशिक्षण पूर्ण,आरसेटी के मार्गदर्शन में परीक्षा आयोजित।

उमरिया,ग्रामीण खबर MP।

मध्य प्रदेश शासन के ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से जिले के जनपद पंचायत करकेली अंतर्गत ग्राम चंदवार में आयोजित 13 दिवसीय कृषि उद्यमी प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन परीक्षा के साथ हुआ। इस प्रशिक्षण में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले 35 स्व सहायता समूह की महिलाओं एवं पुरुषों ने सहभागिता की और स्वरोजगार की दिशा में ठोस कदम बढ़ाते हुए आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया।

यह प्रशिक्षण स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसमें संस्थान के प्रबंधक डॉ. तरुण कुमार सिंह के मार्गदर्शन तथा प्रशिक्षण समन्वयक राज बहादुर जायसवाल के सहयोग से समस्त गतिविधियां संपन्न हुईं। प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीण प्रतिभागियों को कृषि आधारित सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने हेतु तकनीकी दक्षता, वित्तीय साक्षरता तथा व्यावसायिक प्रबंधन कौशल प्रदान करना था, ताकि वे स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर स्थायी आजीविका का साधन विकसित कर सकें।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कृषि की मूलभूत अवधारणाओं से लेकर उन्नत तकनीकों तक का व्यापक ज्ञान प्रदान किया गया। इसमें जलवायु के अनुरूप फसल चयन, भूमि के प्रकारों की पहचान, मिट्टी परीक्षण की प्रक्रिया, पोषक तत्व प्रबंधन, जैविक खाद निर्माण की विधियां तथा जैविक कीटनाशकों के उपयोग की जानकारी विस्तार से दी गई। प्रशिक्षुओं को यह भी बताया गया कि रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता, मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर किस प्रकार प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, तथा जैविक खेती अपनाकर इन दुष्प्रभावों को किस प्रकार कम किया जा सकता है।

खाद्यान्न, दलहन, तिलहन एवं सब्जी फसलों की उन्नत खेती पद्धतियों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। कीट एवं रोग नियंत्रण के समेकित उपायों, कम लागत में अधिक उत्पादन की तकनीकों तथा आधुनिक सिंचाई प्रणालियों जैसे स्प्रिंकलर और टपक सिंचाई के महत्व को व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया। शुष्क भूमि कृषि तकनीक, वर्षा जल संरक्षण, तथा लघु एवं सीमांत कृषकों के लिए एकीकृत कृषि प्रणाली की उपयोगिता पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

इसके अतिरिक्त औषधीय एवं सुगंधित पौधों, फूलों की व्यवसायिक खेती, तथा बाजार आधारित उत्पादन योजना तैयार करने के संबंध में जानकारी दी गई। पशुपालन को कृषि के पूरक व्यवसाय के रूप में अपनाने के लाभ, दुग्ध उत्पादन, बकरी पालन एवं मुर्गी पालन जैसे आयवर्धक गतिविधियों पर भी प्रकाश डाला गया। पादप प्रसार तकनीकों के अंतर्गत ग्राफ्टिंग, बडिंग, लेयरिंग तथा नर्सरी प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी देकर प्रतिभागियों को स्वरोजगार के नए अवसरों से परिचित कराया गया।

जैविक कीटनाशकों के निर्माण एवं उपयोग पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें गोमूत्र, नीम पत्ती, पांच पत्ती काढ़ा, नीमच ब्रह्मास्त्र एवं आग्नेयास्त्र जैसे घोलों को तैयार करने की विधि तथा उनके प्रभावी उपयोग की जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को लागत विश्लेषण, लाभ-हानि का आकलन, विपणन रणनीति एवं बैंकिंग प्रक्रियाओं की जानकारी भी प्रदान की गई, जिससे वे योजनाबद्ध तरीके से अपना उद्यम स्थापित कर सकें।

प्रशिक्षण उपरांत कृषि उद्यमी की परीक्षा ओम प्रकाश चतुर्वेदी, परीक्षा नियंत्रक एवं प्रमाणीकरण, रुडसेटी ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार मुख्यालय भोपाल के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में आयोजित की गई। कृषि विषयक मूल्यांकन परीक्षक रामसुख दुबे कटनी द्वारा किया गया, जबकि बैंकिंग एवं वित्तीय साक्षरता से संबंधित मूल्यांकन आशीष खरे मैहर द्वारा संपन्न कराया गया। परीक्षा प्रक्रिया निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से संपन्न हुई।

परीक्षा आयोजन में आशीष पटेल, कपिल श्रीवास्तव एवं सोम साहू ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया। प्रशिक्षण के समापन अवसर पर प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस कार्यक्रम से उन्हें नई दिशा और आत्मविश्वास मिला है। कई प्रतिभागियों ने निकट भविष्य में जैविक खेती, नर्सरी प्रबंधन एवं मिश्रित कृषि प्रणाली के माध्यम से स्वरोजगार प्रारंभ करने की योजना व्यक्त की।

कार्यक्रम से ग्रामीण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की भावना को बल मिला है। यह प्रशिक्षण न केवल आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी महिलाओं एवं पुरुषों में नेतृत्व क्षमता और उद्यमिता का विकास करने में सहायक रहा। उम्मीद जताई जा रही है कि प्रशिक्षित प्रतिभागी अपने गांवों में अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बनेंगे और कृषि आधारित उद्यमों के माध्यम से क्षेत्र की आर्थिक प्रगति में योगदान देंगे।

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