सिलौड़ी में श्रीमद भागवत कथा में व्यवधान का प्रयास,आयोजन समिति व ग्रामीणों ने एसडीएम को सौंपा शिकायत पत्र।
शांतिपूर्ण धार्मिक आयोजन को बाधित करने वाले असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था की मांग।
सिलौड़ी,ग्रामीण खबर MP।
ढीमरखेड़ा तहसील अंतर्गत ग्राम सिलौड़ी में स्वर्गीय शिक्षक प्रतापभानु राय की पुण्यतिथि (बरसी) के अवसर पर आयोजित श्रीमद भागवत कथा के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा लगातार व्यवधान उत्पन्न किए जाने के प्रयास का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में आक्रोश और चिंता का माहौल बन गया है। इस गंभीर विषय को लेकर आयोजन समिति एवं समस्त ग्रामवासियों ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ढीमरखेड़ा को एक विस्तृत लिखित शिकायत पत्र सौंपते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई एवं धार्मिक आयोजन के दौरान पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है।
शिकायत पत्र में उल्लेख किया गया है कि ग्राम सिलौड़ी में ग्रामीणों की सर्वसम्मति से दिनांक 17 जनवरी 2026 से श्रीमद भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। इस पावन धार्मिक आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में धार्मिक आस्था, सद्भाव, नैतिक मूल्यों एवं सकारात्मक विचारधारा का प्रचार-प्रसार करना है, जिससे समाज में शांति, सदाचार एवं आपसी भाईचारे की भावना को मजबूती मिल सके। आयोजन को विधिसम्मत रूप से संपन्न कराने हेतु संबंधित ग्राम पंचायत सिलौड़ी से पूर्व में ही अनुमति प्राप्त की गई है, साथ ही पंचायत द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र भी जारी किया गया है।
कथा आयोजन में ग्राम सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष, बच्चे एवं बुजुर्ग श्रद्धा भाव से सहभागिता कर रहे हैं। प्रतिदिन कथा स्थल पर भक्ति, श्रद्धा और सौहार्द का वातावरण देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा आपसी मेल-जोल और सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलता है।
ग्रामीणों ने बताया कि स्वर्गीय शिक्षक प्रतापभानु राय, जिन्हें पूरे क्षेत्र में स्नेह और सम्मान के साथ ‘मासाहब’ कहा जाता था, ने लगभग चार दशकों तक शिक्षा के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान दिया। उन्होंने अपने सेवा काल में हजारों विद्यार्थियों को शिक्षित कर जीवन की सही दिशा प्रदान की। उनके मार्गदर्शन में शिक्षा प्राप्त अनेक छात्र आज प्रशासनिक सेवाओं, शिक्षण संस्थानों एवं अन्य महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत होकर समाज और राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं।
स्वर्गीय प्रतापभानु राय न केवल एक आदर्श शिक्षक थे, बल्कि समाजसेवा और राष्ट्रप्रेम के भी प्रतीक रहे। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सम्मान और स्मरण में ‘जंगे आजादी’ नामक पुस्तक का लेखन किया था, जिसकी व्यापक सराहना हुई और इस उल्लेखनीय कार्य के लिए उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती द्वारा सम्मानित भी किया गया था। उनके संपूर्ण जीवन का उद्देश्य समाज को शिक्षित, जागरूक एवं संस्कारित बनाना रहा। ऐसे महान व्यक्तित्व की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रीमद भागवत कथा को बाधित करने का प्रयास ग्रामीणों के अनुसार अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं निंदनीय है।
शिकायत पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ असामाजिक तत्व जानबूझकर अनावश्यक आपत्तियां उठाकर कथा आयोजन में बाधा डालने का प्रयास कर रहे हैं। इनके द्वारा ग्राम में तनाव की स्थिति निर्मित करने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने तथा शांतिपूर्ण माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। संबंधित व्यक्तियों का पूर्व में भी इस प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त रहना बताया गया है, जिससे ग्राम की शांति व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकार के कृत्य न केवल धार्मिक आस्था पर आघात पहुंचाते हैं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और भाईचारे को भी नुकसान पहुंचाते हैं। ग्रामवासियों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है कि किसी भी परिस्थिति में श्रीमद भागवत कथा का आयोजन शांतिपूर्ण, मर्यादित एवं गरिमामय ढंग से संपन्न कराया जाएगा तथा गांव की शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन का पूरा सहयोग किया जाएगा।
आयोजन समिति एवं ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ढीमरखेड़ा से आग्रह किया है कि मामले की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए तत्काल प्रभाव से असामाजिक तत्वों के विरुद्ध सख्त एवं प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। साथ ही कथा आयोजन की शेष अवधि के दौरान पर्याप्त पुलिस बल एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे श्रद्धालु बिना किसी भय के धार्मिक अनुष्ठान में सम्मिलित होकर कथा श्रवण कर सकें और कार्यक्रम शांतिपूर्ण व सौहार्दपूर्ण वातावरण में निर्विघ्न रूप से संपन्न हो सके।
ग्रामीणों को पूर्ण विश्वास है कि प्रशासन इस गंभीर विषय को प्राथमिकता से लेते हुए शीघ्र आवश्यक कदम उठाएगा, जिससे ग्राम में शांति, सद्भाव एवं धार्मिक सौहार्द की परंपरा अक्षुण्ण बनी रहेगी।
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