सुदामा चरित्र जीवन की कठिनाइयों से जूझने की प्रेरणा देता है:श्री मुरारीदास जी महाराज।

 सुदामा चरित्र जीवन की कठिनाइयों से जूझने की प्रेरणा देता है:श्री मुरारीदास जी महाराज।

खम्हरिया नं.1 में श्रीमद् भागवत कथा के विश्राम दिवस पर भावविभोर श्रोता,सुनाया गया श्रीकृष्ण-सुदामा प्रसंग।

रीठी,ग्रामीण खबर MP।

विकासखंड रीठी के ग्राम खम्हरिया नं.1 में बाबा हरिदास जी के बंगले में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का विश्राम दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच संपन्न हुआ। अंतिम दिवस कथावाचक श्री मुरारीदास जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा के चरित्र का विस्तार से भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

कथा में श्री मुरारीदास जी महाराज ने कहा कि सुदामा चरित्र मानव जीवन को धैर्य, संतोष, निस्वार्थता और सच्ची मित्रता का संदेश देता है। जीवन में चाहे कितनी ही कठिनाइयाँ क्यों न आएं, यदि मन में सच्चा समर्पण और विश्वास हो तो हर संकट का सामना किया जा सकता है। सच्ची मित्रता में कभी अमीरी-गरीबी, ऊँच-नीच या स्वार्थ का स्थान नहीं होता।

उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बालसखा सुदामा की दयनीय स्थिति देखकर करुणा से भरकर उन्हें राजसिंहासन पर बैठाया और स्नेहपूर्वक कहा कि संकट के समय मित्र के पास आना ही सच्ची मित्रता है। इसके बावजूद सुदामा ने भगवान से अपने लिए कुछ भी नहीं मांगा। यह प्रसंग निस्वार्थ प्रेम, निष्काम भक्ति और आदर्श मित्रता का अनुपम उदाहरण है।

कथावाचक ने कहा कि सुदामा का चरित्र यह सिखाता है कि परमात्मा के पास जाकर भी यदि व्यक्ति कुछ नहीं मांगता, बल्कि केवल प्रेम और समर्पण रखता है, तो वही सच्चा भक्त कहलाता है। सुदामा की यही भावना उन्हें महान बनाती है और उनका जीवन समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन जाता है।

श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र के साथ-साथ राजा परीक्षित के मोक्ष तथा भगवान सुखदेव की विदाई का भी मार्मिक वर्णन किया गया। कथा के दौरान प्रस्तुत भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए और वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो गया। बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

श्री मुरारीदास जी महाराज ने कहा कि भागवत कथा केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शन है। भागवत कथा का श्रवण करने से मन और आत्मा को परम शांति की अनुभूति होती है तथा व्यक्ति के भीतर सकारात्मक सोच और सद्गुणों का विकास होता है।

उन्होंने भागवत में बताए गए उपदेशों और उच्च आदर्शों को जीवन में उतारने पर बल देते हुए कहा कि इन्हें अपनाकर ही मानव जीवन का उद्देश्य पूर्ण होता है। सुदामा चरित्र के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि सच्चा मित्र वही होता है जो विपरीत परिस्थितियों में साथ निभाए, मित्र की गलतियों पर उसे रोके और उसे सदैव सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करे।

कथा के समापन अवसर पर ग्रामवासियों एवं श्रद्धालुओं ने आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर शिव चरण यादव, रामभगत यादव, नरेश यादव, प्रीतम यादव, रामनाथ यादव, अमृतलाल यादव,गजराज यादव, प्रहलाद यादव,कोमल यादव, विशाली यादव, सुक्खी लाल यादव, मोतीलाल यादव, निर्भय यादव, रामदास यादव, त्रिलोक यादव, ज्ञानचंद यादव, गर्जन यादव, शरद यादव, लखन यादव, पुरुषोत्तम यादव, संतोष यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।

कथा का सफल आयोजन बाबा हरिदास सेवा समिति, खम्हरिया नं.1, तहसील रीठी, जिला कटनी (मध्यप्रदेश) द्वारा किया गया, जिसमें ग्रामवासियों का सराहनीय सहयोग रहा।

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