सिलौंडी में श्री राम-जानकी नवीन मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा संपन्न,साधु-संतों की मौजूदगी में भक्तों ने किए दर्शन।

 सिलौंडी में श्री राम-जानकी नवीन मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा संपन्न,साधु-संतों की मौजूदगी में भक्तों ने किए दर्शन।

श्री मंगल पीठाधीश्वर श्री माधवचार्य जी का हुआ भव्य स्वागत,हजारों भक्तों ने लिया प्रसाद,मां जानकी को सोने की मोहोर अर्पित।

सिलौंडी,ग्रामीण खबर MP।

सिलौंडी में स्थित प्रसिद्ध श्री राम मंदिर के नवीन मंदिर परिसर में भगवान श्री राम-जानकी जी की प्राण प्रतिष्ठा विधि-विधान के साथ बड़े ही श्रद्धामय वातावरण में संपन्न हुई। प्रभात बेला से ही मंदिर प्रांगण में भक्तों और साधु-संतों का आगमन निरंतर बना रहा। गांव और आस-पास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस दिव्य अनुष्ठान के साक्षी बनने पहुंचे।

नवीन मंदिर के गर्भगृह में मुख्य प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान के लिए श्री मंगल पीठाधीश्वर श्री श्री माधवचार्य जी महाराज का आगमन हुआ। उनके सिलौंडी पहुंचते ही बस स्टैंड पर भक्तों ने भव्य स्वागत करते हुए पुष्पवर्षा की। परंपरा के अनुसार, क्षेत्र के लोगों ने अपने-अपने घरों के सामने भी धार्मिक भाव से महाराज जी का स्वागत किया, जिससे संपूर्ण गांव भक्ति के रंग में रंग गया।

अपने प्रवचन में श्री माधवचार्य जी महाराज ने भक्तों को आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन में सेवा, दान और सत्कार्यों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण और सामाजिक कल्याण के लिए अपनी जमा पूंजी में से भी सहयोग करना पुण्यफलदायी होता है। इसी अवसर पर सिलौंडी की सरिता सनत राय ने मां जानकी जी के चरणों में सोने की मोहोर अर्पित कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

इस दिव्य अनुष्ठान में श्री मंगल पीठाधीश्वर श्री श्री माधवचार्य जी महाराज के साथ श्री हरि ओम शरण जी महाराज, श्री राधे राधे महाराज, श्री 1008 दामोदर दास जी महाराज, श्री गोपाल दास जी महाराज तथा ग्राम के पुरोहित पंडित शैलेंद्र शास्त्री, संयोज शास्त्री, मुकेश महाराज, भोला महाराज और पंडित ओमप्रकाश जी ने मंत्रोच्चार एवं शास्त्रसम्मत विधियों के साथ प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराई। पूजा के दौरान वैदिक मन्त्रोंचार्य, शंखध्वनि और घंटानाद से वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक बना रहा।

पूरे क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान श्री राम-जानकी और भ्राता श्री लक्ष्मण जी के दर्शन कर अपने को धन्य महसूस किया। भव्य आरती के बाद भक्तों को प्रसाद वितरण हुआ, जिसमें लंबी कतारों के बावजूद श्रद्धालुओं में अद्भुत अनुशासन और उत्साह देखा गया।

ग्रामीणों के अनुसार, नवीन मंदिर में आयोजित यह प्राण प्रतिष्ठा समारोह वर्षों बाद देखा गया इतना दिव्य आयोजन था जिसने गांव को एक नई धार्मिक ऊर्जा और उत्साह से भर दिया। पूरा आयोजन ग्रामवासी, मंदिर समिति और सेवाभावी कार्यकर्ताओं की संगठित तैयारी और सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

इस प्रकार सिलौंडी का यह ऐतिहासिक आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना बल्कि सामाजिक एकता और आध्यात्मिकता का भी अद्वितीय प्रतीक बनकर क्षेत्र की स्मृतियों में सदा के लिए अंकित हो गया।

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