सिहोरा जिला गठन की मांग तेज,पुनर्गठन आयोग को सौंपा गया विस्तृत दावा पत्र।
मझगवां,गोसलपुर और गांधीग्राम को नई तहसील बनाने का सुझाव,700 से अधिक अभ्यावेदन आयोग के समक्ष,6 दिसंबर से अन्न सत्याग्रह और 9 दिसंबर से आमरण आंदोलन की तैयारी।
सिहोरा,ग्रामीण खबर MP।
सिहोरा को जिला बनाने की मांग अब पहले से कहीं अधिक मजबूत और व्यापक होती जा रही है। लंबे समय से क्षेत्र की जनता एवं सामाजिक संगठनों द्वारा उठाई जा रही यह मांग अब प्रशासनिक रूप से भी गंभीर रूप ले चुकी है। लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति ने भोपाल में प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग के समक्ष एक विस्तृत, तथ्य आधारित व सुविचारित दावा पत्र प्रस्तुत किया है, जिसमें सिहोरा को जिला घोषित किए जाने की हर सम्भावित योग्यता का विस्तार से उल्लेख किया गया है।
समिति द्वारा सौंपे गए इस विस्तृत दस्तावेज में सिहोरा की ऐतिहासिक, भौगोलिक, सांस्कृतिक, आर्थिक तथा प्रशासनिक महत्व को विभिन्न उदाहरणों और आंकड़ों के साथ रेखांकित किया गया है। विशेष रूप से यह बताया गया है कि सिहोरा लंबे समय से कटनी जिले का सबसे बड़ा एवं सबसे अधिक जनसंख्या वाला उपखंड है, जो स्वयं में जिले का स्वरूप रखता है। समिति ने आयोग को स्पष्ट किया है कि सिहोरा का विस्तृत भौगोलिक दायरा, राजस्व आय, शैक्षणिक संस्थान, स्वास्थ्य सुविधाएँ और प्रशासनिक बोझ इसे जिला बनाने के लिए पूर्ण रूप से सक्षम बनाते हैं।
समिति ने यह भी तर्क दिया कि वर्तमान समय में कटनी जिले के कई दूरस्थ क्षेत्र—विशेषकर गांधीग्राम, मझौली, स्लीमनाबाद, बहोरीबंद, सिलौंडी, ढीमरखेड़ा आदि—जिला मुख्यालय तक की दूरी के कारण अनेक तरह की समस्याओं का सामना करते हैं। सरकार की यह घोषित मंशा कि किसी भी ग्राम की जिला मुख्यालय से दूरी 70 किलोमीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए, समिति के दावे को और मजबूत करती है। इसी आधार पर समिति ने एक नए सिहोरा जिले के गठन का प्रस्ताव रखा है, जिसमें उपरोक्त क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
दावा पत्र में समिति ने तीन बड़े एवं पुराने ग्राम पंचायतों—मझगवां, गोसलपुर और गांधीग्राम—को नई तहसील घोषित किए जाने की भी सशक्त अनुशंसा की है। समिति ने उल्लेख किया कि ये क्षेत्र न केवल जनसंख्या के आधार पर, बल्कि व्यापार, शिक्षा, कृषि एवं कनेक्टिविटी के लिहाज से भी पूर्ण रूप से तहसील का दर्जा पाने की क्षमता रखते हैं। इसके अलावा समिति ने ऐसे कई गांवों की सूची भी आयोग को सौंपने की बात कही है, जिन्हें वर्तमान तहसील व्यवस्था की दूरी और असुविधा के कारण निरंतर परेशानी उठानी पड़ती है। समिति का कहना है कि प्रशासनिक इकाईयों के पुनर्गठन में सड़क मार्ग, दूरी, जनसुविधा और राजस्व क्षमता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा पदभार संभालते ही प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग का गठन किए जाने को समिति ने प्रदेश की प्रशासनिक संरचना को सरल, सुलभ और जनकेन्द्री बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि आयोग की रिपोर्ट आगामी महीनों में सरकार को सौंप दी जाएगी और संभव है कि 1 जनवरी 2026 से शुरू होने वाली जनगणना से पहले ही नए जिलों और तहसीलों की घोषणा कर दी जाए। यह स्थिति सिहोरा के लिए विशेष रूप से आशाजनक मानी जा रही है, क्योंकि सिहोरा की भौगोलिक स्थिति और जनसंख्या घनत्व इसे जिला बनने की श्रेणी में सर्वोच्च स्थान देते हैं।
सिहोरा जिला आंदोलन केवल कागजी कार्यवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि जनस्तर पर भी इसका प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। समिति के आह्वान पर अब तक 700 से अधिक व्यक्तिगत एवं सामूहिक अभ्यावेदन आयोग को सौंपे जा चुके हैं। आमजन, सामाजिक संगठन, व्यापारी, किसान और युवा इस आंदोलन में सक्रिय रूप से जुड़ रहे हैं। आगामी 6 दिसंबर से समिति द्वारा अन्न सत्याग्रह प्रारम्भ करने की घोषणा की गई है, जबकि 9 दिसंबर से अनिश्चितकालीन आमरण सत्याग्रह की तैयारी अंतिम चरण में है।
व्यापारी संघ भी 9 दिसंबर से सिहोरा बंद की दिशा में सामूहिक सहमति बनाने हेतु लगातार बैठकों का आयोजन कर रहा है। सिहोरा क्षेत्र में पिछले चार दिनों से समिति के सदस्य घर-घर जाकर जिले की मांग के समर्थन में पर्चे वितरित कर रहे हैं। जनता का उत्साह और समर्थन लगातार बढ़ रहा है, जिससे यह आंदोलन अब व्यापक जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
दावा पत्र सौंपने के दौरान समिति के प्रमुख सदस्यों—अनिल जैन, विकास दुबे, कृष्ण कुमार कुररिया, मानस तिवारी सहित कई अन्य कार्यकर्ता—भोपाल में उपस्थित रहे। समिति को उम्मीद है कि आयोग उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा और शीघ्र ही सिहोरा को जिला बनाने की दिशा में सकारात्मक निर्णय देखने को मिलेगा।
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