दुबई एयर शो में भारतीय फाइटर जेट तेजस क्रैश,बहादुर पायलट की दुखद मौत से देश शोक में।

 दुबई एयर शो में भारतीय फाइटर जेट तेजस क्रैश,बहादुर पायलट की दुखद मौत से देश शोक में।

एरोबैटिक प्रदर्शन के दौरान नियंत्रण खोने से हुआ हादसा,भारतीय वायुसेना ने कोर्ट ऑफ इनक्वायरी गठित की,अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंजा भारत के वीर पायलट का साहस।

कटनी,ग्रामीण खबर MP।

दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित एयरोस्पेस आयोजनों में शामिल दुबई एयर शो में शुक्रवार को वह क्षण आया जिसने न केवल भारत बल्कि पूरी अंतरराष्ट्रीय वायुसेना बिरादरी को गहरे दुख में डाल दिया। भारतीय वायुसेना का स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान तेजस एक जटिल एरोबैटिक प्रदर्शन के दौरान नियंत्रण खो बैठा और कुछ ही क्षणों में जमीन से टकराकर आग के विशाल गुबार में तब्दील हो गया। इस दर्दनाक दुर्घटना में भारतीय वायुसेना के एक बहादुर और निडर पायलट ने अपनी जान गंवा दी। उनकी शहादत की खबर फैलते ही देशभर में शोक की लहर दौड़ गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना उस समय हुई जब तेजस अपने प्रदर्शन की सबसे चुनौतीपूर्ण manoeuvre की तैयारी कर रहा था। कम ऊंचाई पर तेज़ गति से किए जा रहे इस मोड़ के दौरान विमान अचानक नीचे की ओर झुक गया और पायलट के तमाम प्रयासों के बावजूद नियंत्रण में नहीं आ सका। कुछ ही पलों में विमान धरती से टकराया और धमाके के साथ आग का भीषण गोला बन गया, जिसे देखने वाले हजारों दर्शक दहल उठे। दुबई के अल-मकतूम इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास हुए इस हादसे का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जो घटना की भयावहता को स्पष्ट दिखाता है।

बचाव दल की टीमें तत्काल घटनास्थल पर पहुंचीं, लेकिन आग और धुएं की तीव्रता के कारण पायलट को जीवित नहीं बचाया जा सका। भारतीय वायुसेना ने पायलट की वीरता, दक्षता और कर्तव्यनिष्ठा को नमन करते हुए कहा कि उन्होंने अंतिम क्षण तक विमान को आबादी वाले हिस्से से दूर ले जाने की कोशिश की, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे न केवल एक कुशल पायलट थे, बल्कि एक सच्चे सैनिक भी थे।

हादसे के तुरंत बाद भारतीय वायुसेना ने कोर्ट ऑफ इनक्वायरी का गठन कर दिया है, जो दुर्घटना के तकनीकी, संचालनात्मक और सुरक्षा पहलुओं की गहन जांच करेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि एरोबैटिक प्रदर्शन अक्सर विमान और पायलट दोनों से अत्यधिक दक्षता और सूक्ष्म नियंत्रण की मांग करते हैं, जहाँ एक छोटी-सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। हालांकि, तेजस की तकनीकी क्षमताओं और सुरक्षा मानकों पर सवाल तभी उठाए जाएंगे जब जांच पूरी हो जाएगी।

तेजस को भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता का प्रतीक माना जाता है। यह लड़ाकू विमान न केवल देश की तकनीकी प्रगति का परिचायक है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में भारत की बढ़ती उपस्थिति का भी प्रमाण है। ऐसे में विदेशी धरती पर हुए इस हादसे ने स्वदेशी तकनीक और सुरक्षा पैमाने पर चर्चाओं को फिर से जीवित कर दिया है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस प्रकार के बड़े आयोजनों में जोखिम हमेशा रहता है और दुनिया की कई बड़ी वायु सेनाएँ ऐसे हादसों का सामना करती रही हैं।

घटना के बाद दुबई एयर शो को कुछ समय के लिए रोक दिया गया। आयोजकों ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल और पायलट के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। वहीं, कई देशों के सैन्य प्रतिनिधियों ने भी भारत के इस वीर पायलट को श्रद्धांजलि दी। सोशल मीडिया पर आम लोग भावुक संदेशों के साथ पायलट को नमन कर रहे हैं और उनकी शहादत को राष्ट्र के प्रति सर्वोच्च बलिदान बताया जा रहा है।

भारत सरकार के शीर्ष स्तर से भी इस हादसे पर गहरी संवेदना व्यक्त की गई है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि पायलट की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी और तेजस सहित समस्त स्वदेशी रक्षा परियोजनाएँ पहले की अपेक्षा और भी मजबूती के साथ आगे बढ़ेंगी। पायलट के परिजन और साथी उसे एक विनम्र, निडर और अत्यंत कुशल अधिकारी के रूप में याद कर रहे हैं, जिसने हर चुनौती में राष्ट्र को सर्वोपरि रखा।

यह दुखद घटना न सिर्फ एक विमान दुर्घटना है, बल्कि यह उस जोखिम की याद भी दिलाती है जिसे हर दिन देश की रक्षा में लगे हमारे योद्धा उठाते हैं। वे आकाश की हर उड़ान में अपनी जान दांव पर लगाते हैं ताकि देश सुरक्षित रह सके। इसी साहस, निष्ठा और बलिदान के कारण राष्ट्र सदैव उनका ऋणी रहेगा।

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