बिहार बंद से गरमाया राजनीतिक माहौल,सड़कों पर उतरे एनडीए कार्यकर्ता, विपक्ष ने बताया गुंडागर्दी।
प्रधानमंत्री की दिवंगत माता पर की गई टिप्पणी के विरोध में बुलाया गया बंद,बाज़ार और यातायात ठप,आरोप-प्रत्यारोप से गूंजा बिहार।
कटनी,ग्रामीण खबर MP:
बिहार की राजनीति गुरुवार को उस समय पूरी तरह उबाल पर आ गई जब एनडीए ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत माता पर की गई कथित अपमानजनक टिप्पणी के विरोध में पांच घंटे का बिहार बंद बुलाया। सुबह सात बजे से दोपहर बारह बजे तक आयोजित इस बंद में भाजपा और जदयू कार्यकर्ताओं ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में एकजुट होकर प्रदर्शन किया। सत्ता पक्ष का दावा रहा कि जनता ने इस बंद का व्यापक समर्थन किया, जबकि विपक्ष ने इसे जनजीवन से खिलवाड़ बताते हुए पूरी तरह असफल और गुंडागर्दी करार दिया।
बिहार बंद का असर सुबह से ही स्पष्ट नजर आने लगा। पटना, गया, दरभंगा, भागलपुर, पूर्णिया, मुजफ्फरपुर और कई अन्य जिलों में दुकानें, बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। सार्वजनिक परिवहन आंशिक रूप से प्रभावित हुआ, जिससे यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी। कई स्थानों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही। वहीं, स्कूल और कॉलेजों में छात्रों की उपस्थिति बेहद कम रही, जिससे शैक्षणिक गतिविधियां भी प्रभावित हुईं। हालांकि अस्पताल, एम्बुलेंस सेवाएं और दूध, सब्ज़ी जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को जारी रखा गया।
बंद के दौरान एनडीए कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। टायर जलाकर, पुतले फूंककर और जोरदार नारेबाजी करते हुए उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया। कई स्थानों पर जुलूस निकाले गए जिनमें महिला मोर्चा कार्यकर्ताओं की भी बड़ी भागीदारी रही। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि राजनीति में वैचारिक मतभेद स्वीकार्य हैं लेकिन किसी भी स्थिति में व्यक्तिगत स्तर पर अपमानजनक टिप्पणियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा कि यह आंदोलन प्रधानमंत्री और उनकी माता के सम्मान की रक्षा के लिए था और जनता ने इसका समर्थन कर यह संदेश दे दिया है कि बिहार अपमान सहन नहीं करेगा।
जदयू नेताओं ने भी इस बंद को आत्मसम्मान की लड़ाई बताते हुए जनता से एकजुटता की अपील की। उनका कहना था कि विपक्षी दल चुनावी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए मर्यादाओं को तोड़ रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
उधर, राजद और कांग्रेस ने इस बंद पर कड़ी आपत्ति जताई। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने इस बंद के नाम पर गुंडागर्दी की और महिलाओं तक के साथ दुर्व्यवहार किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री ने खुद ऐसे कृत्यों की अनुमति दी है। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव से पहले जनता को गुमराह करने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रही है। कांग्रेस नेताओं ने भी इसे तानाशाही प्रवृत्ति करार दिया।
सोशल मीडिया पर भी बिहार बंद पूरे दिन चर्चा का विषय बना रहा। राजद ने एक वीडियो साझा कर भाजपा कार्यकर्ताओं पर गर्भवती महिला की गाड़ी रोकने का आरोप लगाया, जिससे माहौल और भी गरमा गया। एनडीए ने इन आरोपों को निराधार बताया और कहा कि विपक्ष केवल जनता को भड़काने का काम कर रहा है।
कुल मिलाकर, बिहार बंद ने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह से हिला दिया है। जहां एक ओर एनडीए ने इसे जनसमर्थन और सम्मान की रक्षा की लड़ाई बताया, वहीं विपक्ष ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए जनता को हुई असुविधाओं पर सवाल उठाए। बिहार की जनता ने इस दौरान दैनिक जीवन में बाधाओं को झेला और राज्य का राजनीतिक तापमान एक बार फिर चरम पर पहुंच गया।
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