विद्यार्थियों को दिया गया जैविक खेती का प्रशिक्षण, स्वरोजगार के लिए किया गया प्रेरित।

 विद्यार्थियों को दिया गया जैविक खेती का प्रशिक्षण, स्वरोजगार के लिए किया गया प्रेरित।

वीरांगना रानी दुर्गावती शासकीय महाविद्यालय बहोरीबंद में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा कराया गया प्रशिक्षण, विशेषज्ञ रामसुख दुबे ने दी तकनीकी जानकारी।

कटनी,ग्रामीण खबर mp:

वीरांगना रानी दुर्गावती शासकीय महाविद्यालय बहोरीबंद में मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थियों को परंपरागत शिक्षा के साथ आत्मनिर्भरता, स्वावलंबन और स्वरोजगार की ओर अग्रसर करने हेतु जैविक खेती का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. इंद्र कुमार पटेल के कुशल मार्गदर्शन में एवं प्रशिक्षण समन्वयक मंजू द्विवेदी के सहयोग से संपन्न हुआ। प्रशिक्षण में जैविक कृषि विषय के विशेषज्ञ रामसुख दुबे द्वारा विद्यार्थियों को विषय से संबंधित गहन एवं तकनीकी जानकारी प्रदान की गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य डॉ. इंद्र कुमार पटेल द्वारा किया गया, जिन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में केवल डिग्री प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भर बनने के लिए व्यावसायिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण भी आवश्यक है। उन्होंने जैविक खेती को ग्रामीण युवाओं के लिए एक सशक्त माध्यम बताया जो उन्हें न केवल रोजगार बल्कि राष्ट्रहित में पर्यावरण-संरक्षण की दिशा में भी योगदान देने योग्य बनाएगा।

प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को जैविक खेती की परिभाषा, आवश्यकता, लाभ, कार्यप्रणाली एवं विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी गई। रामसुख दुबे ने बताया कि जैविक खेती एक ऐसी प्रणाली है, जिसमें रासायनिक खादों, कीटनाशकों और कृत्रिम हार्मोन्स के स्थान पर प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया जाता है। जैविक खाद, जीवाणु खाद, वर्मी कम्पोस्ट, नीम आधारित कीटनाशक, फसल चक्र, मिश्रित खेती, पशु आधारित कृषि आदि इसके प्रमुख आधार हैं।

प्रशिक्षण में विद्यार्थियों को बताया गया कि किस प्रकार रासायनिक खेती से भूमि की उर्वरा शक्ति में गिरावट, जल स्रोतों में प्रदूषण और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल रहा है। इसके समाधान के रूप में जैविक खेती अपनाना आवश्यक हो गया है। जैविक खेती से भूमि की उर्वरता में दीर्घकालीन सुधार होता है, जल की कम आवश्यकता होती है, उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर होती है और पर्यावरणीय संतुलन भी बना रहता है।

विशेषज्ञ द्वारा जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग, कम लागत अधिक उत्पादन तकनीक, पारंपरिक एवं वैज्ञानिक विधियों का समन्वय, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, कृषि मित्र जीवों की भूमिका, फसल अवशेषों के पुनः उपयोग, और पशुपालन को जैविक खेती से जोड़ने के विषय में व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया।

प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई और विभिन्न प्रकार के जैविक उत्पादों के निर्माण, उनकी पहचान एवं विपणन की प्रक्रिया की भी जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि जैविक खेती न केवल पर्यावरण हितैषी विकल्प है, बल्कि यह भविष्य की टिकाऊ कृषि प्रणाली है, जिससे ग्रामीण युवा अपने गांवों में ही रहकर आत्मनिर्भर जीवनशैली अपना सकते हैं।

प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों में रोजगारोन्मुखी दृष्टिकोण विकसित करना एवं उन्हें तकनीकी रूप से सशक्त बनाना रहा, ताकि वे भविष्य में जैविक खेती के क्षेत्र में स्वरोजगार स्थापित कर सकें और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बना सकें।


प्रधान संपादक:अज्जू सोनी,ग्रामीण खबर mp

संपर्क सूत्र:9977110734

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