बेटी की सगाई के अगले दिन पिता का निधन,बड़वारा विधायक ने निभाया ‘पिता’ का फर्ज,अपने खर्च से कराया कन्यादान।

 बेटी की सगाई के अगले दिन पिता का निधन,बड़वारा विधायक ने निभाया ‘पिता’ का फर्ज,अपने खर्च से कराया कन्यादान।

कछार गांव बड़ा की गरीब कन्या के विवाह में जनप्रतिनिधि और ग्रामीणों ने दिखाई संवेदनशीलता;सहयोग से सादगीपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ विवाह।

सिलौंडी,ग्रामीण खबर MP।

कटनी जिले के बड़वारा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कछार गांव बड़ा से एक ऐसी मार्मिक घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया और समाज में मानवीय संवेदनाओं की एक मिसाल पेश की है। एक गरीब मजदूर पिता द्वारा बेटी की सगाई के ठीक अगले ही दिन उसके निधन से जहां परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, वहीं इस संकट की घड़ी में जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने मिलकर जो सहयोग और संवेदनशीलता दिखाई, वह पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम कछार गांव बड़ा निवासी सुमंत कोल, जो मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे, ने बड़ी मेहनत और उम्मीदों के साथ अपनी बेटी का रिश्ता तय कर सगाई संपन्न कराई थी। परिवार में इस अवसर को लेकर खुशी का माहौल था और विवाह की तैयारियों को लेकर योजनाएं बन रही थीं। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। सगाई के अगले ही दिन सुमंत कोल का अचानक निधन हो गया। इस अप्रत्याशित घटना ने पूरे परिवार को गहरे शोक में डाल दिया।

परिवार के सामने सबसे बड़ी चिंता बेटी के विवाह को लेकर खड़ी हो गई। घर का मुखिया चले जाने के बाद आर्थिक और सामाजिक दोनों ही स्तर पर परिवार पूरी तरह असहाय हो गया। ऐसे कठिन समय में जहां कई बार लोग असमंजस और निराशा में घिर जाते हैं, वहीं इस परिवार के लिए समाज और जनप्रतिनिधियों का सहारा उम्मीद की किरण बनकर सामने आया।

इस घटना की सूचना जैसे ही बड़वारा विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह तक पहुंची, उन्होंने तुरंत संवेदनशीलता और सक्रियता का परिचय दिया। उन्होंने बिना किसी देरी के शोक संतप्त परिवार से संपर्क कर उन्हें ढांढस बंधाया और बेटी के विवाह की पूरी जिम्मेदारी स्वयं उठाने का निर्णय लिया। विधायक ने अपने निजी खर्च से 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की, जिससे विवाह की आवश्यक तैयारियों में मदद मिल सकी।

इतना ही नहीं, विधायक ने स्वयं ‘पिता’ की भूमिका निभाते हुए कन्यादान कर एक सामाजिक और मानवीय दायित्व का निर्वहन किया। यह दृश्य वहां उपस्थित लोगों के लिए अत्यंत भावुक करने वाला था, जब एक जनप्रतिनिधि ने आगे बढ़कर एक असहाय बेटी के जीवन के सबसे महत्वपूर्ण क्षण में पिता का स्थान ग्रहण किया।

इस सराहनीय कार्य में भाजपा मंडल अध्यक्ष मनीष सिंह बागरी, ग्रामपंचायत सरपंच कैलाश चंद्र जैन, भाजपा जिला मंत्री डॉ. प्रशांत राय, मंडल उपाध्यक्ष शैलेश जैन, प्रवीण बर्मन सहित अनेक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने भी सक्रिय सहयोग दिया। सभी ने मिलकर विवाह की व्यवस्थाएं संभालीं और यह सुनिश्चित किया कि समारोह सादगीपूर्ण होते हुए भी सम्मानजनक और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हो।

ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं समाज में आपसी सहयोग और मानवीय मूल्यों को मजबूत करती हैं। कठिन समय में जब कोई परिवार अकेला पड़ जाता है, तब समाज और जनप्रतिनिधियों का साथ उसे नई ताकत देता है। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि आज भी समाज में संवेदनाएं जीवित हैं और लोग जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आते हैं।

विवाह समारोह में उपस्थित लोगों ने विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह की इस पहल की सराहना करते हुए इसे एक अनुकरणीय उदाहरण बताया। उनका कहना था कि जनप्रतिनिधियों का कार्य केवल प्रशासनिक दायित्व निभाना ही नहीं होता, बल्कि समाज के दुख-दर्द में सहभागी बनना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। विधायक ने जिस प्रकार से एक पिता की भूमिका निभाई, वह निश्चित रूप से समाज के लिए प्रेरणादायक है।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान गांव में एकजुटता और सहयोग की भावना स्पष्ट रूप से देखने को मिली। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर भी हर संभव सहायता प्रदान की, जिससे विवाह में किसी प्रकार की कमी महसूस न हो। यह सामूहिक प्रयास इस बात का प्रमाण है कि जब समाज एकजुट होकर किसी के साथ खड़ा होता है, तो बड़ी से बड़ी विपत्ति का सामना भी सहजता से किया जा सकता है।

घटना के बाद क्षेत्र में विधायक की इस मानवीय पहल की व्यापक चर्चा हो रही है। आमजन ने इसे जनसेवा का सच्चा उदाहरण बताते हुए उनका आभार व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि इस प्रकार के कार्य समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और दूसरों को भी जरूरतमंदों की मदद के लिए प्रेरित करते हैं।

यह घटना केवल एक परिवार की मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के उन मूल्यों को उजागर करती है, जिनमें करुणा, सहयोग और जिम्मेदारी का भाव निहित है। यह संदेश देती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी यदि समाज और नेतृत्व साथ खड़ा हो, तो किसी भी कठिनाई को पार किया जा सकता है।

कुल मिलाकर, ग्राम कछार गांव बड़ा की यह घटना मानवता, संवेदनशीलता और सामाजिक एकता की एक जीवंत मिसाल बनकर सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया कि दुख की घड़ी में दिया गया साथ ही सबसे बड़ा सहारा होता है।

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