सच्चा सतगुरु वही जो दुखों से दे मुक्ति, गति-सद्गति का मार्ग दिखाए — निराकार परमात्मा शिव ही हैं ऐसे सतगुरु: ब्रह्माकुमारी रेखा दीदी।

 सच्चा सतगुरु वही जो दुखों से दे मुक्ति, गति-सद्गति का मार्ग दिखाए — निराकार परमात्मा शिव ही हैं ऐसे सतगुरु: ब्रह्माकुमारी रेखा दीदी।

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर ब्रह्माकुमारी सेवाकेंद्र विदिशा में हुआ भव्य आध्यात्मिक कार्यक्रम, बड़ी संख्या में महिलाओं ने लिया भाग।

विदिशा,ग्रामीण खबर MP:

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा विदिशा के बरेठ रोड स्थित चर्च वाली गली में संचालित सेवाकेंद्र पर गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर एक विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र की बड़ी संख्या में माताएं और बहनें उपस्थित रहीं। इस अवसर पर सेवाकेंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी रेखा दीदी एवं ब्रह्माकुमारी रुक्मणी दीदी ने गहन आध्यात्मिक संदेशों के माध्यम से उपस्थित जनों का मार्गदर्शन किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारी रुक्मणी दीदी ने कहा कि सच्चा गुरु वही होता है जो हमें दुख, अशांति, बुराइयों और अज्ञानता से निकालकर ज्ञान, शांति, और सच्चे सुख की ओर ले जाए। ऐसे गुरु कोई साधारण मनुष्य नहीं हो सकते। सच्चा सतगुरु केवल वही हो सकता है जो स्वयं अजन्मा, अविनाशी और सर्वशक्तिमान हो — और वह हैं निराकार परमपिता परमात्मा शिव। वह स्वयं परकाया प्रवेश कर ब्रह्मा के तन द्वारा मानव आत्माओं को सत्य ज्ञान प्रदान कर रहे हैं और मुक्ति तथा जीवन मुक्ति का मार्ग दिखा रहे हैं।

उन्होंने गीता के विभिन्न श्लोकों का उल्लेख करते हुए बताया कि स्वयं भगवान ने गीता में कहा है कि वे गुरुओं के भी गुरु हैं (अध्याय 11, श्लोक 43), पिता का भी पिता हैं, समस्त सृष्टि के पिता हैं (अध्याय 9, श्लोक 17), और गाइड भी हैं (अध्याय 13, श्लोक 22)। उन्होंने यह भी कहा है कि जब-जब धर्म की हानि होती है तब मैं अवतरित होता हूं (अध्याय 4, श्लोक 7-8)। यह सभी महावाक्य इस बात के प्रमाण हैं कि सच्चा सतगुरु वही है जो हमें दुखों से मुक्त कर सकता है, और यह कार्य केवल निराकार परमात्मा शिव ही कर सकते हैं।

ब्रहमाकुमारी रेखा दीदी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में कुछ देह अभिमानी व्यक्ति स्वयं को गुरु कहकर लोगों को भयभीत कर भ्रम में डाल रहे हैं, जबकि वे स्वयं ही दुखों से घिरे होते हैं। ऐसे लोग किसी को गति या सद्गति नहीं दे सकते। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को हम गुरु कह सकते हैं, क्योंकि वह हमें मार्गदर्शन दे सकता है, लेकिन सतगुरु तो केवल एक होता है — जो मनुष्य आत्माओं को अज्ञानता से निकालकर सत्य की ओर ले जाए।

रेखा दीदी ने स्पष्ट किया कि केवल परमात्मा ही हमें आत्मा का वास्तविक परिचय दे सकते हैं — कि हम यह शरीर नहीं हैं, बल्कि चेतन ऊर्जा स्वरूप आत्मा हैं, जो इस शरीर के माध्यम से कार्य करती है। यह आत्म-ज्ञान कोई भी मनुष्य नहीं दे सकता। यह कार्य केवल परमात्मा का है। सतगुरु का कार्य है आत्मा को उसके मूल स्वरूप की स्मृति दिलाना और उसे उसके निजधाम, परमधाम की ओर ले जाना, जहां से वह आई है।

उन्होंने आगे कहा कि यह समय पुरुषोत्तम संगम युग है — वह समय जब परमपिता परमात्मा स्वयं इस धरती पर अवतरित होकर अपने बच्चों को वापस घर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। यह समय परमात्मा को पहचानने, उनसे जुड़ने और उनकी शिक्षाओं पर चलने का है। मुक्ति और जीवन मुक्ति का वरदान केवल वही दे सकते हैं। अब समय है सच्चे सतगुरु की पहचान कर उनके मार्गदर्शन में जीवन को आध्यात्मिक दिशा देने का।

कार्यक्रम में भक्ति गीत, मंथन सत्र, योगाभ्यास तथा आध्यात्मिक संवाद के माध्यम से वातावरण को पूर्णतः दिव्यता एवं शांति से ओतप्रोत कर दिया गया। उपस्थित सभी महिलाओं ने दीदीयों के संदेशों को गहनता से आत्मसात किया और ईश्वर के प्रति आस्था व श्रद्धा को और प्रबल किया।

कार्यक्रम के अंत में सभी ने ईश्वर से यह प्रार्थना की कि वे सभी आत्माओं को अज्ञानता, अशांति और दुखों से मुक्ति देकर शाश्वत सुख, शांति और आनंद की अनुभूति कराएं।


ग्रामीण खबर MP

विदिशा जिला ब्यूरो चीफ,यशवंत सिंह रघुवंशी

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