गंजबासौदा थाना परिसर में वरिष्ठ पत्रकार पर जानलेवा हमला, अपराधियों के बेखौफ हौसले और पुलिस प्रशासन पर उठे सवाल।
हितकारिणी धर्मशाला से शुरू हुआ विवाद थाने में पहुंचा, पिता-पुत्र दोनों घायल, हमलावरों को नहीं पुलिस का डर, पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद।
गंजबासौदा,ग्रामीण खबर mp:
नगर में अपराधियों के बढ़ते हौसले अब सीधे तौर पर कानून व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। ऐसा ही एक मामला 10 जून को गंजबासौदा थाना क्षेत्र में सामने आया, जहां एक वरिष्ठ पत्रकार और उनके पुत्र पर न केवल जानलेवा हमला किया गया, बल्कि यह दुस्साहसिक हमला थाना परिसर में किया गया, जो पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वरिष्ठ पत्रकार कमलसिंह रघुबंशी के पुत्र देवेन्द्र रघुबंशी पर उस समय हमला हुआ जब वह हितकारिणी धर्मशाला के पास खड़ी अपनी गाड़ी के पास थे। शैलेन्द्र तिवारी उर्फ शैलेष, मधुर तिवारी सहित उनके दो अन्य साथियों ने पहले उनकी गाड़ी की तोड़फोड़ की और फिर उन पर फरसा, लोहे की रॉड और धारदार हथियारों से हमला कर दिया। इस हमले में देवेन्द्र को कई जगह गंभीर चोटें आईं और उनका हाथ फैक्चर हो गया। घटना के बाद उन्हें तत्काल उपचार के लिए भोपाल रेफर किया गया।
घटना की सूचना मिलते ही जब वरिष्ठ पत्रकार कमलसिंह रघुबंशी स्वयं अपने बेटे की शिकायत दर्ज कराने सिटी थाना पहुंचे, तो वहाँ भी उन पर सुनियोजित हमला किया गया। आरोपियों ने स्कूटर में लोहे की रॉड फंसाकर उन्हें गिरा दिया और गिरते ही हमला कर दिया। उनके दाहिने हाथ में गंभीर फैक्चर हुआ और शरीर के अन्य हिस्सों में भी चोटें आईं। यह घटना उसी थाना परिसर में घटित हुई, जहाँ कानून की रक्षा होनी चाहिए थी।
थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों में यह पूरी वारदात कैद हो चुकी है। कैमरे के फुटेज में स्पष्ट दिखता है कि किस प्रकार से हमलावरों ने पुलिस की मौजूदगी में पत्रकार और उनके पुत्र पर हमला किया। इससे यह भी प्रतीत होता है कि हमलावरों को पुलिस का कोई भय नहीं है। सूत्रों का कहना है कि हमलावर एक विशेष जातीय समूह से संबंध रखते हैं और उसी समूह के कुछ लोग घटना के समय थाना परिसर में मौजूद थे, जो हमलावरों का समर्थन करते नजर आए। यह बात भी कैमरों में दर्ज हुई है।
देवेन्द्र रघुबंशी और कमलसिंह रघुबंशी दोनों इस समय भोपाल के अस्पताल में इलाजरत हैं। पुलिस द्वारा बासौदा में एमएलसी कराई गई और संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। हालांकि यह गंभीर सवाल उठता है कि जब थाना परिसर जैसी सुरक्षित जगह पर वरिष्ठ नागरिकों और पत्रकारों पर हमला हो सकता है, तो आम नागरिक कितने सुरक्षित हैं?
वरिष्ठ पत्रकार कमलसिंह रघुबंशी ने उपचार के दौरान मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में बताया कि अभी वे बयान देने की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन हाथ के ऑपरेशन के बाद वह इस पूरे प्रकरण के साक्ष्य और तथ्य पुलिस अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उनके बेटे पर जो झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाए गए हैं, वे पूरी तरह से निराधार हैं और उन्हें नकारने के लिए उनके पास पर्याप्त प्रमाण मौजूद हैं, जो उचित समय पर पुलिस को सौंपे जाएंगे।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि थाना परिसर में इस तरह खुलेआम हमले हो रहे हैं और अपराधी सीसीटीवी की परवाह किए बिना घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं, तो यह कानून व्यवस्था की गंभीर विफलता है। लोगों में भय और आक्रोश का माहौल है। आम जनता की यह मांग है कि आरोपियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए और थाना परिसर में हुई इस शर्मनाक घटना की निष्पक्ष जांच हो।
यह प्रकरण केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और कानून के प्रतीकों पर सीधी चोट है। पत्रकार समाज और आमजन दोनों यह उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर दोषियों के विरुद्ध त्वरित और कठोर कार्यवाही करेगा, जिससे भविष्य में कोई अपराधी पुलिस और कानून व्यवस्था को हल्के में न ले।
