कटनी के पौनिया गांव में श्रीमद् भागवत कथा के अंतर्गत भगवान श्रीकृष्ण एवं रुक्मणी विवाह उत्सव भक्ति,उल्लास और श्रद्धा के साथ संपन्न।
बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ निकली भव्य बारात, श्रद्धालुओं ने विवाह उत्सव में सहभाग कर भक्ति रस में डूबा गांव का माहौल।
पौनियाँ,ग्रामीण खबर mp:
कटनी जिले के पौनिया गांव में स्थित विमल साहू के निज निवास पर सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन श्रद्धा और भक्ति भाव से किया गया, जिसमें आज के दिन भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मणी के विवाह का भव्य कार्यक्रम संपन्न हुआ।
इस पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के औरैया धाम से पधारे पीठाधीश्वर श्री अंकुश जी महाराज ने कथा व्यास के रूप में श्रीमद् भागवत कथा का संगीतमय, प्रभावशाली और भक्तिप्रद प्रवचन किया। कथा के अंतर्गत रुक्मणी विवाह प्रसंग को अत्यंत सुंदर शैली में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने माता रुक्मणी के प्रेम, श्रद्धा और श्रीकृष्ण की करुणा तथा दिव्यता का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया, जिससे उपस्थित जनसमूह भावविभोर हो गया।
भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मणी की झांकी को सुसज्जित कर विवाह समारोह को जीवंत रूप दिया गया। विवाह की हर एक धार्मिक विधि को परंपरागत रीति से सम्पन्न किया गया। भक्तों ने रुक्मणी विवाह को साक्षात अनुभव किया और भक्ति रस में डूबते हुए श्रीकृष्ण-रुक्मणी के इस पावन मिलन को अपनी आंखों से देखकर स्वयं को धन्य समझा।
कार्यक्रम की विशेषता रही भगवान श्रीकृष्ण की बारात, जिसमें यजमानों और श्रद्धालुओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सजकर भाग लिया। बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ बारात गांव में निकाली गई। नाचते-गाते श्रद्धालु जब रुक्मणी जी के यहां बारात लेकर पहुंचे तो पूरा वातावरण भक्ति, उत्साह और आनंद में डूब गया। विवाह विधि अत्यंत विधिपूर्वक सम्पन्न की गई।
गांव में इस आयोजन के कारण धार्मिक उत्सव जैसा वातावरण देखने को मिला। घर-घर दीप जलाए गए, सड़कों को सजाया गया और श्रद्धालु दिनभर भजन-कीर्तन में लीन रहे। आयोजन में बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों सहित सभी वर्गों की सहभागिता देखने लायक रही।
श्रीमद् भागवत कथा के माध्यम से धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक ज्ञान का सुंदर संगम देखने को मिला। इस अवसर पर यजमानों और सेवकों ने दिन-रात मेहनत कर कार्यक्रम को सफल बनाया। आयोजन के प्रत्येक दिन श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होती रही और रुक्मणी विवाह दिवस पर यह संख्या हजारों तक पहुंची।
इस सात दिवसीय आयोजन ने न केवल धार्मिक चेतना को जागृत किया, बल्कि गांव में भाईचारे, सेवा और सहयोग की भावना को भी प्रबल किया। समस्त आयोजन अत्यंत सुव्यवस्थित और अनुशासित तरीके से संपन्न हुआ, जिसमें आयोजकों का विशेष योगदान रहा।
