खम्हरिuया नं. 1 के शासकीय खेल मैदान पर कब्जे की कोशिश से ग्रामीणों में आक्रोश, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

खम्हरिuया नं. 1 के शासकीय खेल मैदान पर कब्जे की कोशिश से ग्रामीणों में आक्रोश, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

 जेसीबी और ट्रैक्टर से रात के अंधेरे में मैदान की खुदाई कर प्लॉटिंग करने का आरोप, ग्रामीणों ने तहसीलदार, सीईओ और थाना प्रभारी से की कार्रवाई की मांग; चेतावनी- शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो होगा विशाल जनआंदोलन

रीठी। कटनी जिले के रीठी विकासखंड अंतर्गत ग्राम खम्हरिया नं. 1 में शासकीय हाई स्कूल के समीप स्थित खेल मैदान की भूमि पर कथित अवैध कब्जे की कोशिश का मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। गांव के युवाओं और ग्रामीणों ने सार्वजनिक खेल मैदान को बचाने के लिए एकजुट होकर प्रशासन के सामने अपनी आवाज बुलंद की है। इस संबंध में ग्रामीणों ने तहसीलदार रीठी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत रीठी एवं थाना प्रभारी के नाम ज्ञापन सौंपकर शासकीय भूमि पर किए जा रहे कथित अवैध कब्जे की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही प्रशासन द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो वे विशाल जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार,l पिछले एक सप्ताह से गांव के कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर रात के अंधेरे में शासकीय खेल परिसर को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। आरोप है कि जेसीबी मशीन और ट्रैक्टर की मदद से खेल मैदान की भूमि पर खुदाई कर प्लॉटिंग करने तथा कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बीते दो दिनों में यह गतिविधियां और तेज हुई हैं। सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित रखी गई भूमि पर इस तरह की गतिविधियां होना गंभीर चिंता का विषय है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि आखिर शासकीय भूमि पर रातोंरात जेसीबी मशीन से खुदाई और प्लॉटिंग किसकी अनुमति से की जा रही है तथा इसके पीछे किन लोगों का उद्देश्य है?

ग्रामीणों ने अपने ज्ञापन में गांव में पूर्व में खेल मैदान के निर्माण के लिए उपलब्ध कराई गई शासकीय भूमि को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मध्यप्रदेश शासन एवं खेल एवं युवक कल्याण विभाग की मंशा के अनुरूप ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभावान युवाओं को खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाखों रुपये की लागत से ग्राम में खेल मैदान का निर्माण कराया गया था। लेकिन बाद में तत्कालीन ग्राम प्रधान, पटवारी और कुछ गणमान्य नागरिकों की भूमिका को लेकर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि उक्त भूमि दिल्ली के एक व्यवसायी को बेच दी गई। ग्रामीणों के अनुसार, उस समय यह कहकर भूमि को निजी बताया गया कि पहले जिस जमीन को शासकीय समझकर चिन्हित किया गया था, वह वास्तव में निजी भूमि थी। इससे सरकारी धन के उपयोग और भूमि के सीमांकन को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में खेल मैदान के लिए निर्धारित भूमि को लेकर विवाद सामने आने के बाद शासकीय हाई स्कूल के सामने उपलब्ध दूसरी शासकीय भूमि पर खेल मैदान विकसित करने की घोषणा की गई थी। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि ग्रामीणों के अनुसार आज तक उक्त मैदान के विकास के लिए कोई ठोस कार्य नहीं हुआ। अब इसी भूमि पर कथित रूप से जेसीबी और ट्रैक्टर के माध्यम से खुदाई कर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में गांव के युवाओं के सामने खेल गतिविधियों के लिए उपलब्ध एकमात्र सार्वजनिक मैदान भी समाप्त होने का खतरा मंडराने लगा है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि खसरा नंबर 1126 की भूमि का राजस्व अभिलेखों के आधार पर तत्काल सीमांकन एवं भौतिक सत्यापन कराया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि भूमि की वास्तविक स्थिति क्या है और उस पर किसी व्यक्ति को निर्माण, खुदाई अथवा प्लॉटिंग करने की अनुमति दी गई है या नहीं। यदि किसी भी व्यक्ति द्वारा बिना वैधानिक अनुमति के शासकीय भूमि को नुकसान पहुंचाया गया है या उस पर कब्जे का प्रयास किया गया है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।

ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि खेल मैदान की भूमि को सार्वजनिक खेल गतिविधियों के लिए सुरक्षित रखा जाए तथा भविष्य में अतिक्रमण की किसी भी संभावना को समाप्त करने के लिए वहां शीघ्र बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया जाए। साथ ही खेल एवं युवक कल्याण विभाग के माध्यम से मैदान का समुचित विकास कराकर युवाओं को खेलकूद की आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

ग्रामीणों का कहना है कि खेल मैदान केवल जमीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि गांव के बच्चों और युवाओं के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण केंद्र होता है। इसी मैदान में ग्रामीण प्रतिभाएं अभ्यास कर भविष्य में जिला, संभाग और प्रदेश स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं। यदि इस सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण हो जाता है तो गांव के बच्चों और युवाओं के लिए खेल गतिविधियों के अवसर लगभग समाप्त हो जाएंगे। ग्रामीणों ने कहा कि शासन की योजनाओं का उद्देश्य गांवों में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना है, लेकिन यदि शासकीय खेल मैदान ही सुरक्षित नहीं रहेंगे तो ग्रामीण अंचलों के युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर कैसे मिलेगा?

ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले को जनहित से जुड़ा गंभीर विषय मानते हुए तत्काल संज्ञान लेने की अपील की है। उनका कहना है कि केवल ज्ञापन लेकर औपचारिकता पूरी करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि मौके पर पहुंचकर जांच, सीमांकन और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही जब तक भूमि की स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक वहां किसी भी प्रकार की खुदाई, प्लॉटिंग अथवा निर्माण गतिविधि पर रोक लगाई जानी चाहिए।

ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि ग्राम की सार्वजनिक संपत्ति और युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि समय रहते खेल मैदान को अतिक्रमण से मुक्त कराकर सुरक्षित नहीं किया गया तो समस्त ग्रामवासी एकजुट होकर व्यापक स्तर पर आंदोलन करेंगे।

इस अवसर पर श्याम सुंदर विश्वकर्मा, निर्भय सिंह यादव, कमलेश यादव, राजेश यादव, भारत यादव, शिवप्रसाद यादव, विनोद यादव, पुरुषोत्तम यादव, रज्जन विश्वकर्मा, रामसिंह, अजय, सुधीर, छोटू, प्रांशु, शुभम, विक्की सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।

अब देखना यह होगा कि ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन पर राजस्व विभाग, जनपद पंचायत और पुलिस प्रशासन कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है। फिलहाल ग्राम खम्हरिया नं. 1 के ग्रामीणों की एक ही मांग है कि शासकीय खेल मैदान को अतिक्रमण से बचाया जाए, भूमि का निष्पक्ष सीमांकन कराया जाए और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि गांव के बच्चों और युवाओं का खेल भविष्य सुरक्षित रह सके।

Post a Comment

Previous Post Next Post