शासकीय स्कूल,मंदिर और ट्रांसफार्मर की जमीन पर निजी नाम दर्ज होने का आरोप,बिचपुरा में मचा हड़कंप।

 शासकीय स्कूल,मंदिर और ट्रांसफार्मर की जमीन पर निजी नाम दर्ज होने का आरोप,बिचपुरा में मचा हड़कंप।

खसरा नंबर 110 को लेकर ग्रामीणों ने खोला मोर्चा,नायब तहसीलदार को सौंपा शिकायती ज्ञापन,पुराने राजस्व रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच और कथित फर्जी नामांतरण निरस्त करने की मांग।

बड़वारा, कटनी। तहसील बड़वारा अंतर्गत ग्राम पंचायत भगवनवारा के ग्राम बिचपुरा में शासकीय एवं सार्वजनिक उपयोग की भूमि के स्वामित्व को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। गांव के खसरा नंबर 110 की भूमि पर कथित रूप से निजी व्यक्तियों के नाम भू-स्वामी के रूप में दर्ज किए जाने को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। इस मामले में ग्राम बिचपुरा के बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने एकजुट होकर नायब तहसीलदार को शिकायती ज्ञापन सौंपा और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि खसरा नंबर 110 की भूमि वर्षों से शासकीय एवं सार्वजनिक उपयोग में रही है। इस भूमि पर शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय के भवन, सामुदायिक भवन तथा ग्रामीणों की आस्था का केंद्र प्राचीन मंदिर स्थित हैं। इसके अलावा इसी भूखंड से होकर शासकीय मुख्य सड़क भी गुजरती है। ग्रामीणों के मुताबिक इस भूमि का उपयोग गांव के लोग कई पीढ़ियों से शिक्षा, धार्मिक गतिविधियों और अन्य सार्वजनिक कार्यों के लिए करते आ रहे हैं। ऐसे में इस जमीन पर निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज होने का मामला कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

ग्रामीणों ने अपने शिकायती आवेदन में आरोप लगाया है कि खसरा नंबर 110 की भूमि पर अवसरलाल पिता शिवशंकर प्रसाद, मायाबाई, स्वर्गीय उत्तमचंद, नितिनकुमार एवं श्रवणकुमार वल्द उत्तमचंद गुप्ता, निवासी देवराकलां, जिला कटनी के नाम भू-स्वामी के रूप में दर्ज किए गए हैं। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि उक्त भूमि मूल रूप से शासकीय और सार्वजनिक उपयोग की थी, तो आखिर किस आधार पर और किन दस्तावेजों के सहारे निजी व्यक्तियों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज किए गए? इस प्रक्रिया में नियमों का पालन किया गया या नहीं, इसकी विस्तृत जांच कराए जाने की मांग की गई है।

ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष एक और महत्वपूर्ण सवाल उठाया है कि यदि संबंधित भूमि वास्तव में निजी स्वामित्व की थी, तो शासन द्वारा उसी स्थान पर शासकीय स्कूल भवन, सामुदायिक भवन, बोरवेल तथा बिजली ट्रांसफार्मर जैसी सार्वजनिक सुविधाएं किस आधार पर स्थापित की गईं? ग्रामीणों का कहना है कि इन स्थायी सार्वजनिक निर्माणों और वर्षों से चले आ रहे सरकारी उपयोग को देखते हुए भूमि के पुराने राजस्व अभिलेखों की जांच अत्यंत आवश्यक है। उनका आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड में कथित अनियमितता के कारण सरकारी एवं सार्वजनिक संपत्ति के अधिकारों पर संकट पैदा हो गया है।

मामले में ग्रामीणों ने शासकीय स्कूल भवन के कथित दुरुपयोग का मुद्दा भी उठाया है। उनका आरोप है कि जिस भवन में पहले स्कूल संचालित होता था, उस पर अब अवैध रूप से कब्जा कर निजी सामग्री रखी जा रही है। ग्रामीणों ने इसे सार्वजनिक संपत्ति के उपयोग और संरक्षण से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए प्रशासन से तत्काल स्थल निरीक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्मित भवनों और परिसरों पर किसी भी व्यक्ति का निजी कब्जा स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।

ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने मांग की है कि खसरा नंबर 110 से संबंधित पुराने मिसल बंदोबस्त, निस्तार पत्रक, अधिकार अभिलेख तथा वर्षवार खसरा-खतौनी की बारीकी से जांच कराई जाए। साथ ही पटवारी एवं राजस्व निरीक्षक से मौके का निरीक्षण कर पंचनामा और विस्तृत मैदानी प्रतिवेदन प्राप्त किया जाए, ताकि भूमि की वास्तविक स्थिति और उसके स्वामित्व से जुड़े तथ्यों का पता चल सके।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि यदि जांच में निजी नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया में कूटरचना, गलत दस्तावेजों अथवा नियम विरुद्ध कार्रवाई की पुष्टि होती है, तो संबंधित प्रविष्टियों को नियमानुसार निरस्त किया जाए तथा भूमि को उसके वास्तविक शासकीय एवं सार्वजनिक स्वरूप के अनुरूप राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराया जाए। इसके साथ ही मामले में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक, विभागीय एवं आपराधिक कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला केवल जमीन के स्वामित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव की शिक्षा व्यवस्था, धार्मिक आस्था, सार्वजनिक सुविधाओं और सरकारी संपत्ति के संरक्षण से भी जुड़ा हुआ है। यदि सार्वजनिक उपयोग की भूमि के राजस्व रिकॉर्ड में अनियमितता हुई है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपने के दौरान कोइलाल कोल, राज प्रसाद चौधरी, मोहन सहित बड़ी संख्या में ग्राम बिचपुरा के ग्रामीण एवं प्रार्थीगण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की अपेक्षा जताई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मामले में जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे उच्च अधिकारियों के समक्ष शिकायत लेकर जाएंगे और अपने अधिकारों की लड़ाई आगे भी जारी रखेंगे।

अब देखना यह होगा कि राजस्व विभाग इस पूरे मामले में पुराने अभिलेखों और मौके की वास्तविक स्थिति की जांच कर क्या निष्कर्ष निकालता है। फिलहाल ग्राम बिचपुरा के खसरा नंबर 110 को लेकर उठे सवालों ने स्थानीय राजस्व व्यवस्था और शासकीय भूमि के संरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण मुद्दा खड़ा कर दिया है।

Post a Comment

Previous Post Next Post