गोपालपुर पीएम श्री स्कूल भवन की गुणवत्ता पर ग्रामीणों ने उठाए गंभीर सवाल।
1.34 करोड़ से अधिक की लागत से बन रहे हायर सेकेंडरी भवन में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर शिकायत,ग्रामीणों ने मांगी निष्पक्ष तकनीकी जांच।
ढीमरखेड़ा। कटनी जिले की ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम गोपालपुर में पीएम श्री योजना के तहत निर्माणाधीन हायर सेकेंडरी स्कूल भवन की निर्माण गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। लगभग 134.70 लाख रुपये की लागत से तैयार किए जा रहे इस भवन के निर्माण में निर्धारित तकनीकी मापदंडों और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता का पालन किए जाने को लेकर ग्रामीणों ने संदेह जताते हुए जिला प्रशासन से निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि गोपालपुर के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासन द्वारा बड़ी राशि स्वीकृत कर स्कूल भवन का निर्माण कराया जा रहा है। ऐसे में निर्माण कार्य में गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निर्माण स्थल पर उपयोग की जा रही कुछ सामग्री अपेक्षित गुणवत्ता की दिखाई नहीं दे रही है। हालांकि निर्माण सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप है अथवा नहीं, इसका अंतिम निर्धारण सक्षम तकनीकी अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण एवं प्रयोगशाला परीक्षण के बाद ही किया जा सकता है।
बताया गया है कि गोपालपुर के हाई स्कूल को हायर सेकेंडरी स्तर पर उन्नयन किए जाने के बाद विद्यार्थियों की बढ़ती शैक्षणिक आवश्यकताओं को देखते हुए नए भवन का निर्माण कराया जा रहा है। यह भवन क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए लंबे समय तक उपयोगी आधारभूत सुविधा साबित हो सकता है। इसी कारण ग्रामीण चाहते हैं कि निर्माण के प्रत्येक चरण में तकनीकी गुणवत्ता की निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में भवन की मजबूती और सुरक्षा को लेकर कोई समस्या उत्पन्न न हो।
ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में उपयोग की जा रही रेत की गुणवत्ता पर विशेष रूप से सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मौके पर कथित रूप से भसुआ रेत का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा ईंट, गिट्टी, लोहे तथा अन्य निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर भी ग्रामीणों ने आपत्ति दर्ज कराई है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि निर्माण कार्य में सीमेंट और अन्य सामग्री का अनुपात निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप है या नहीं, इसकी जांच की आवश्यकता है।
ग्रामीणों ने निर्माण कार्य करा रहे ठेकेदार श्री विश्वकर्मा की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए संबंधित विभाग से पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल निर्माण कार्य की गति पर ध्यान देने के बजाय सामग्री की गुणवत्ता, मिश्रण का अनुपात, संरचनात्मक मजबूती और स्वीकृत तकनीकी डिजाइन के अनुरूप निर्माण पर विशेष निगरानी रखी जानी चाहिए।
ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता स्कूल भवन की मजबूती और विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर है। उनका कहना है कि स्कूल भवन में आने वाले वर्षों तक बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षक और कर्मचारी नियमित रूप से उपस्थित रहेंगे। इसलिए भवन निर्माण में किसी भी स्तर पर गुणवत्ता से समझौते की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। ग्रामीणों का मानना है कि यदि निर्माण के दौरान ही तकनीकी स्तर पर जांच कर ली जाए तो भविष्य में संभावित खामियों को समय रहते दूर किया जा सकता है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि संबंधित विभाग के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों की टीम गठित कर निर्माणाधीन भवन का स्थल निरीक्षण कराया जाए। साथ ही निर्माण में इस्तेमाल हो रही रेत, ईंट, गिट्टी, सीमेंट और लोहे सहित आवश्यक सामग्री के नमूने लेकर अधिकृत प्रयोगशाला से गुणवत्ता परीक्षण कराया जाए। इसके अलावा स्वीकृत नक्शे, डिजाइन, तकनीकी स्वीकृति, एस्टीमेट और निर्माण की निर्धारित शर्तों के अनुरूप कार्य हो रहा है या नहीं, इसकी भी विस्तृत जांच कराई जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि जांच केवल औपचारिक निरीक्षण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। भवन की नींव, कॉलम, बीम, छत, दीवारों और अन्य महत्वपूर्ण संरचनात्मक हिस्सों के निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन हुआ है या नहीं, इसका परीक्षण विशेषज्ञ इंजीनियरों की निगरानी में कराया जाना चाहिए। इससे ग्रामीणों द्वारा उठाए गए सवालों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि निर्माण कार्य की निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जाए। उनका कहना है कि शासन की बड़ी राशि से तैयार हो रहे इस भवन में संबंधित विभाग के अधिकारियों और इंजीनियरों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण कर गुणवत्ता सुनिश्चित की जानी चाहिए। यदि नियमित निरीक्षण और गुणवत्ता परीक्षण की व्यवस्था प्रभावी रहेगी तो निर्माण के दौरान ही संभावित कमियों को दूर किया जा सकेगा।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि तकनीकी जांच में उनके द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं और निर्धारित मापदंडों से विचलन या घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग की पुष्टि होती है, तो संबंधित ठेकेदार सहित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि तकनीकी जांच में भवन निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप पाया जाता है, तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर ग्रामीणों की शंकाओं का समाधान किया जाना चाहिए, ताकि निर्माण कार्य को लेकर किसी प्रकार का भ्रम या विवाद बना न रहे।
पीएम श्री योजना के तहत सरकारी विद्यालयों को बेहतर अधोसंरचना और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने का उद्देश्य है। ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि योजना के अंतर्गत बनने वाले भवन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाना जरूरी है। शासन की राशि से तैयार होने वाला भवन केवल वर्तमान जरूरत को पूरा करने वाला ढांचा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के विद्यार्थियों के लिए लंबे समय तक उपयोगी शैक्षणिक परिसर होना चाहिए।
ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य की गुणवत्ता की नियमित निगरानी की जाए और निर्माण एजेंसी को निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार ही कार्य करने के निर्देश दिए जाएं। उनका कहना है कि यदि निर्माण में किसी स्तर पर कमी सामने आती है तो उसे भवन पूर्ण होने के बाद सुधारने के बजाय निर्माण के दौरान ही दुरुस्त किया जाना अधिक उचित होगा।
फिलहाल गोपालपुर में निर्माणाधीन पीएम श्री हायर सेकेंडरी स्कूल भवन की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों द्वारा उठाए गए सवालों के बाद संबंधित विभाग और जिला प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि शिकायत को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाएगी और जांच के आधार पर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाएगी।
ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कर निर्माण में उपयोग की जा रही सामग्री का वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाए। यदि निर्माण मानकों के अनुरूप पाया जाता है तो इसकी स्पष्ट जानकारी ग्रामीणों को दी जाए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के साथ आवश्यक सुधारात्मक कार्य कराया जाए। इससे न केवल शासन की राशि के सदुपयोग की पुष्टि होगी, बल्कि गोपालपुर के विद्यार्थियों को मजबूत, सुरक्षित और टिकाऊ स्कूल भवन उपलब्ध कराने की दिशा में भी ठोस कदम सुनिश्चित हो सकेगा।


