वसुंधरा राजे के गढ़ झालावाड़ में बड़ा उलटफेर,कांग्रेस ने भाजपा से छीनी नगर परिषद की सत्ता।

 वसुंधरा राजे के गढ़ झालावाड़ में बड़ा उलटफेर,कांग्रेस ने भाजपा से छीनी नगर परिषद की सत्ता।

राजेश गुर्जर बने नए सभापति,भाजपा के राजकुमार सोनी को 15 वोटों से हराया,45 वार्डों में कांग्रेस के 29 पार्षद चुने गए।

जयपुर/झालावाड़। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनावों में झालावाड़ नगर परिषद का परिणाम राजनीतिक रूप से खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रमुख राजनीतिक प्रभाव वाले झालावाड़ में कांग्रेस ने नगर परिषद की सत्ता भाजपा से अपने कब्जे में ले ली है। सोमवार को हुए सभापति पद के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी राजेश गुर्जर ने भाजपा के राजकुमार सोनी को 15 मतों के अंतर से पराजित कर सभापति पद पर कब्जा जमा लिया। राजेश गुर्जर को कुल 30 मत मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी राजकुमार सोनी के पक्ष में 15 मत पड़े।

इस जीत के साथ झालावाड़ नगर परिषद में कांग्रेस का बोर्ड बनना तय हो गया है। इससे पहले हुए पार्षद चुनाव में भी कांग्रेस ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए 45 वार्डों में से 29 वार्डों पर जीत दर्ज की थी। भाजपा को 13 वार्डों में सफलता मिली थी, जबकि दो वार्डों में निर्दलीय और एक वार्ड में आम आदमी पार्टी का प्रत्याशी विजयी हुआ था। इस प्रकार कांग्रेस ने पार्षदों की संख्या के लिहाज से ही स्पष्ट बढ़त बना ली थी।

सभापति पद के चुनाव में कांग्रेस के राजेश गुर्जर को वार्ड चुनाव के मुकाबले एक अतिरिक्त मत मिला, जबकि भाजपा प्रत्याशी को भी दो अतिरिक्त मत प्राप्त हुए। इससे चुनाव में क्रॉस वोटिंग के समीकरण सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि अंतिम परिणाम में कांग्रेस प्रत्याशी ने 30-15 के अंतर से जीत दर्ज की।

राजेश गुर्जर झालावाड़ नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 26 से पार्षद निर्वाचित हुए हैं। पार्षद चुनाव में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी और अपने रिश्तेदार मनोज गुर्जर को हराया था। इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें सभापति पद के लिए प्रमुख दावेदार के रूप में आगे किया। सभापति पद का चुनाव ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित था।

झालावाड़ नगर परिषद में कांग्रेस की इस जीत को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि झालावाड़ लंबे समय से भाजपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से जुड़ा प्रमुख राजनीतिक क्षेत्र रहा है। ऐसे में स्थानीय निकाय के स्तर पर भाजपा के हाथ से नगर परिषद की सत्ता निकलना प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।

हालांकि इस परिणाम को पूरे राजस्थान में कांग्रेस की जीत के रूप में देखना उचित नहीं होगा। 21 सितंबर को प्रदेश के 273 नगरीय निकायों में महापौर, सभापति और अध्यक्ष पदों के लिए चुनाव हुए। उपलब्ध घोषित परिणामों में अलग-अलग निकायों में भाजपा, कांग्रेस और अन्य दलों के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। इसलिए झालावाड़ के परिणाम को स्थानीय निकाय स्तर पर हुआ महत्वपूर्ण राजनीतिक उलटफेर माना जाना अधिक सटीक है।

झालावाड़ जिले की अन्य नगरीय निकायों में भी अलग-अलग तस्वीर सामने आई है। झालरापाटन में भाजपा की अंशु गुप्ता, अकलेरा में भाजपा की याशिका मेवाड़ा, मनोहरथाना में भाजपा के देवेंद्र शर्मा और पिड़ावा में भाजपा के राजू माली विजयी हुए। वहीं भवानीमंडी में कांग्रेस की पिंकी गुर्जर, खानपुर में कांग्रेस की कांता साहू और डग में कांग्रेस की टीना नागर ने अध्यक्ष पद हासिल किया। इससे स्पष्ट है कि पूरे जिले में किसी एक दल का एकतरफा परिणाम नहीं रहा।

झालावाड़ नगर परिषद में कांग्रेस के राजेश गुर्जर के सभापति चुने जाने के बाद अब नई परिषद के सामने शहर के विकास, साफ-सफाई, सड़क, नाली, पेयजल और अन्य नगरीय सुविधाओं से जुड़े मुद्दों के समाधान की जिम्मेदारी होगी। राजेश गुर्जर ने जीत के बाद शहर को स्वच्छ और बेहतर बनाने तथा सभी वार्डों में विकास कार्यों को प्राथमिकता देने की बात कही है।

झालावाड़ में सत्ता परिवर्तन के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है, वहीं भाजपा के लिए यह परिणाम स्थानीय स्तर पर आत्ममंथन का विषय माना जा रहा है। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनावों के परिणामों में अलग-अलग क्षेत्रों में सामने आए राजनीतिक समीकरण आने वाले समय में प्रदेश की स्थानीय राजनीति की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।

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