सिलौंडी में जन विश्वास अभियान के 28 दिन बाद भी 192 आवेदनों का नहीं हुआ निराकरण।

 सिलौंडी में जन विश्वास अभियान के 28 दिन बाद भी 192 आवेदनों का नहीं हुआ निराकरण।

ग्रामीणों का आरोप-शिविर में आवेदन लेकर शासन-प्रशासन ने निभाई औपचारिकता,समस्याओं के समाधान का अब भी इंतजार।

सिलौंडी। मध्यप्रदेश शासन के जन विश्वास अभियान के तहत सिलौंडी में आयोजित शिविर में ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए 192 आवेदन प्राप्त किए गए थे। शिविर में संभागीय कमिश्नर, जिला कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ, एसडीएम सहित जिले के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे थे। प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को भरोसा दिलाया गया था कि शिविर में प्राप्त सभी आवेदनों को पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज कर संबंधित समस्याओं का निराकरण कराया जाएगा। लेकिन शिविर के 28 दिन बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों का कहना है कि अब तक किसी भी आवेदन की समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

समस्याओं के निराकरण में हो रही देरी को लेकर ग्रामीणों और आवेदकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि जन विश्वास अभियान के नाम पर बड़ी संख्या में आवेदन तो लिए गए, लेकिन उनके निराकरण की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। कई आवेदकों का कहना है कि आवेदन देने के बाद उन्हें यह जानकारी तक नहीं मिली कि उनकी समस्या किस विभाग को भेजी गई और उस पर क्या कार्रवाई की गई।

किसानों ने बताया कि शिविर के दौरान कलेक्टर को सोसायटी से बसेहरा घनहन मार्ग की स्थिति दिखाई गई थी। बारिश के कारण मार्ग पर कीचड़ की समस्या को देखते हुए कलेक्टर द्वारा तत्काल मुरूम डलवाने का आश्वासन दिया गया था। साथ ही बारिश समाप्त होने के बाद सड़क निर्माण की बात भी कही गई थी। ग्रामीणों के अनुसार 28 दिन बीत जाने के बावजूद उक्त मार्ग पर मुरूम नहीं डाली गई है। बारिश के मौसम में मार्ग की स्थिति खराब होने के कारण किसानों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

शिविर में ग्रामीणों ने सिलौंडी के प्रमुख बस स्टैंड से जुड़ी समस्याओं को भी अधिकारियों के समक्ष रखा था। क्षेत्र के सबसे बड़े बस स्टैंड में महिला प्रसाधन की व्यवस्था, आवारा पशुओं के लिए गौशाला, सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने सहित अन्य जनहित से जुड़े मुद्दों पर आवेदन दिए गए थे। ग्रामीणों का कहना है कि बस स्टैंड पर मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को परेशानी होती है।

इसी तरह किसानों और छात्र-छात्राओं के आवागमन से जुड़ी कच्ची सड़कों में सुधार तथा आवश्यक स्थानों पर पक्की सड़क निर्माण की मांग भी अधिकारियों के सामने रखी गई थी। प्रधानमंत्री आवास योजना में पात्र हितग्राहियों के नाम जोड़ने सहित विभिन्न योजनाओं और स्थानीय समस्याओं से संबंधित आवेदन भी ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत किए गए थे।

ग्रामीणों के मुताबिक जन विश्वास अभियान का उद्देश्य आम लोगों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाकर उनका समयबद्ध समाधान करना है। ऐसे में यदि आवेदन लेने के बाद लंबे समय तक उन पर कार्रवाई नहीं होती है तो अभियान की मूल भावना पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। आवेदकों का कहना है कि 28 दिन बाद भी समस्याओं का समाधान तो दूर, कई मामलों में संबंधित आवेदकों से संपर्क तक नहीं किया गया है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जन विश्वास अभियान के दौरान प्राप्त सभी 192 आवेदनों की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए तथा प्रत्येक आवेदन को संबंधित विभाग से जोड़कर समय-सीमा में निराकरण कराया जाए। साथ ही जिन समस्याओं का तत्काल समाधान संभव है, उन पर प्राथमिकता से कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि बड़े अधिकारियों की मौजूदगी में आयोजित शिविर से उन्हें उम्मीद जगी थी कि वर्षों से चली आ रही स्थानीय समस्याओं का समाधान अब शीघ्र होगा, लेकिन 28 दिन बीतने के बाद भी जमीनी स्तर पर अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं देने से लोगों में निराशा बढ़ रही है। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी है और वे चाहते हैं कि जन विश्वास अभियान केवल आवेदन लेने तक सीमित न रहकर वास्तविक रूप से समस्याओं के समाधान का माध्यम बने।

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