“सब कहते हैं सिहोरा जिला के साथ,फिर धरातल पर प्रयास क्यों नहीं ?”

 “सब कहते हैं सिहोरा जिला के साथ,फिर धरातल पर प्रयास क्यों नहीं ?”

जनपद अध्यक्ष ने भी दोहराया नगर पालिका अध्यक्ष का दावा,नवंबर 2024 में जिला बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजे जाने की बात,समिति ने नेताओं से मांगा ठोस जवाब।

सिहोरा। सिहोरा को जिला बनाने की मांग को लेकर लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति का अभियान लगातार जारी है। इसी क्रम में रविवार को समिति के प्रतिनिधिमंडल ने जनपद पंचायत सिहोरा की अध्यक्ष रश्मि मनेन्द्र अग्निहोत्री के निवास पर पहुंचकर उन्हें स्मरण पत्र सौंपा और सिहोरा जिला गठन की मांग को शासन स्तर पर प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की अपील की।

स्मरण पत्र सौंपने के दौरान जनपद पंचायत अध्यक्ष ने भी वही बात दोहराई, जो हाल ही में नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा कही गई थी। उन्होंने बताया कि जनपद पंचायत सिहोरा में नवंबर 2024 में ही सिहोरा को जिला बनाने संबंधी प्रस्ताव पारित कर शासन को भेजा जा चुका है। इस जानकारी के सामने आने के बाद आंदोलन समिति ने सवाल उठाया कि जब स्थानीय निकाय स्तर से प्रस्ताव शासन तक भेजा जा चुका है, तो फिर जिला गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए शासन और राजनीतिक नेतृत्व की ओर से अब तक निर्णायक पहल क्यों नहीं दिखाई दे रही है।

समिति का कहना है कि सिहोरा को जिला बनाने की मांग को लेकर क्षेत्र के लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों से जुड़े जनप्रतिनिधि और नेता समर्थन की बात करते रहे हैं। समय-समय पर नेताओं द्वारा सिहोरा जिला के लिए हरसंभव प्रयास करने का आश्वासन भी दिया गया, लेकिन धरातल पर जिला गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने वाला कोई ठोस और प्रभावी प्रयास दिखाई नहीं दे रहा है।

समिति सदस्यों ने कहा कि यह पहला अवसर नहीं है, जब सिहोरा जिला के मुद्दे को लेकर राजनीतिक नेतृत्व से सवाल किए जा रहे हैं। इससे पूर्व भी समिति द्वारा सत्ता समर्थक नेताओं के घर घंटा बजाकर उन्हें सिहोरा जिला के पुराने वादे की याद दिलाई गई थी। उस समय भी नेताओं ने मांग के समर्थन में हरसंभव सहयोग और प्रयास का भरोसा दिलाया था, लेकिन समय बीतने के बावजूद स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया।

विधानसभा चुनाव से पहले हुई घोषणा के समय मंच पर मौजूद नेताओं का भी समिति ने उल्लेख किया। समिति के अनुसार, भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी द्वारा सिहोरा को जिला बनाने की घोषणा किए जाने के दौरान जनपद अध्यक्ष भी मंच पर मौजूद थीं। घोषणा के बाद क्षेत्रवासियों को उम्मीद जगी थी कि लंबे समय से चली आ रही मांग अब जल्द पूरी होगी और सिहोरा को जिला बनाने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। लेकिन सरकार बनने के बाद काफी समय बीत जाने के बावजूद जिला गठन को लेकर कोई निर्णायक घोषणा या ठोस कार्रवाई सामने नहीं आने से क्षेत्रवासियों में निराशा बढ़ रही है।

समिति ने सवाल उठाया कि जब स्थानीय निकायों द्वारा जिला गठन के प्रस्ताव पारित कर शासन को भेजे जाने की बात सामने आ रही है और क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी सिहोरा जिला के समर्थन में होने का दावा कर रहे हैं, तो फिर शासन स्तर पर इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए राजनीतिक नेतृत्व प्रभावी हस्तक्षेप क्यों नहीं कर रहा है।

समिति ने यह भी कहा कि सिहोरा क्षेत्र की जनता चुनावों में लगातार अपना समर्थन व्यक्त करती रही है। इसके बावजूद लंबे समय से चली आ रही जिला गठन की मांग का समाधान नहीं होने से लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि मजबूत राजनीतिक समर्थन के बावजूद सिहोरा की इस मांग को प्राथमिकता क्यों नहीं मिल रही है।

आंदोलन समिति ने स्पष्ट किया कि अब सिहोरा की जनता केवल आश्वासन सुनने के बजाय जिला गठन की दिशा में वास्तविक और दिखाई देने वाली कार्रवाई चाहती है। समिति का कहना है कि जब प्रस्ताव पारित होकर शासन तक पहुंच चुका है, तो अब जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक नेतृत्व की जिम्मेदारी है कि वे इस मुद्दे को शासन के समक्ष मजबूती से उठाएं और जिला गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रभावी प्रयास करें।

सोमवार को समिति का प्रतिनिधिमंडल सिहोरा के भाजपा नेताओं राजेश दाहिया और अनुपम सराफ के निवास पर भी पहुंचकर स्मरण पत्र सौंपेगा। समिति ने कहा कि अभियान आगे भी जारी रहेगा और सत्ता समर्थक सभी प्रमुख नेताओं को सिहोरा जिला के पुराने वादे की याद दिलाते हुए उनसे शासन स्तर पर प्रभावी पहल की मांग की जाएगी।

रविवार को स्मरण पत्र सौंपने के दौरान समिति के कृष्ण कुमार कुररिया, अनिल जैन, विकास दुबे, रामजी शुक्ला, संतोष वर्मा, संजय पाठक, शरद सेठ, मोहन सोंधिया, संतोष पांडे, जितेंद्र श्रीवास, राजभान मिश्रा, राजा ठाकुर, मानस तिवारी, अमित बक्शी, आलोक जैन, सुनील कुररिया, सुमित शुक्ला, मुन्ना उपाध्याय सहित अनेक सिहोरा वासी उपस्थित रहे।

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