श्री पंचमुखी दरबार में 40 दिनों से निरंतर चल रहा श्री सीताराम संकीर्तन।
भक्तों की इच्छा पर जारी रहेगा अखंड संकीर्तन,गांव-गांव से श्रद्धालु पहुंचकर कर रहे सहभागिता।
सिलौंडी। श्री पंचमुखी दरबार के तत्वावधान में 28 जून 2026 से प्रारंभ हुआ अखंड श्री सीताराम संकीर्तन लगातार जारी है। भक्तों की आस्था और इच्छा के चलते संकीर्तन को निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है। इस वर्ष भी ग्रामवासियों के सहयोग और सामूहिक सहभागिता से अखंड श्री सीताराम संकीर्तन के 40 दिन पूर्ण हो चुके हैं, लेकिन श्रद्धालुओं में उत्साह और भक्ति का भाव लगातार बना हुआ है।
श्री सीताराम नाम के निरंतर संकीर्तन में गांव के वरिष्ठ नागरिकों के साथ महिलाएं, युवा और बच्चे भी उत्साहपूर्वक शामिल हो रहे हैं। प्रतिदिन श्रद्धालु श्री पंचमुखी दरबार पहुंचकर सामूहिक रूप से सीताराम नाम का जाप एवं संकीर्तन कर रहे हैं। संकीर्तन के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है और श्रद्धालु धार्मिक आस्था के साथ इस आयोजन में अपनी सहभागिता निभा रहे हैं।
इस अखंड संकीर्तन में सिलौंडी के साथ आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। नेगई, अतरसुमा, सगवा सहित विभिन्न गांवों के लोग भी श्री सीताराम संकीर्तन में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। ग्रामीणों की सामूहिक सहभागिता से यह आयोजन धार्मिक एकता और सामाजिक समरसता का भी संदेश दे रहा है।
संयोजक अमरेश राय ने बताया कि अखंड श्री सीताराम संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य सनातन संस्कृति की प्राचीन परंपराओं को घर-घर तक पहुंचाना तथा समाज में भक्ति, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना की भावना को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि सामूहिक रूप से भगवान श्रीराम के नाम का संकीर्तन करने से लोगों में सकारात्मक ऊर्जा और आपसी प्रेम की भावना बढ़ती है।
उन्होंने बताया कि भक्तों की लगातार इच्छा और श्रद्धा को देखते हुए अखंड श्री सीताराम संकीर्तन अभी आगे भी निरंतर चलता रहेगा। आयोजन में ग्रामवासियों का सहयोग लगातार प्राप्त हो रहा है। 40 दिन पूर्ण होने के बाद भी श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है और प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग संकीर्तन में अपनी सहभागिता निभा रहे हैं।
श्री पंचमुखी दरबार में निरंतर चल रहे इस अखंड संकीर्तन ने क्षेत्र में धार्मिक वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान श्री सीताराम के नाम का निरंतर जाप मन को शांति प्रदान करता है तथा समाज में धर्म, संस्कार और सद्भाव की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


