जर्जर मकान बना गंभीर खतरा,4-5 महीने पहले दिए आवेदन के बाद भी कार्रवाई नहीं।
उमरियापान के वार्ड क्रमांक 17 में हादसे का इंतजार कर रहा प्रशासन? 8-9 वर्षों से जर्जर मकान की नहीं हुई जांच, आवेदक ने कहा-जनहानि हुई तो प्रशासन की होगी पूरी जवाबदेही।
उमरियापान। ग्राम उमरियापान के वार्ड क्रमांक 17 में स्थित एक अत्यधिक जर्जर मकान को लेकर स्थानीय स्तर पर सुरक्षा का गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। मकान की जर्जर हालत को देखते हुए आवेदक अभिषेक तिवारी, पिता आर.के. तिवारी, निवासी ग्राम उमरियापान, तहसील ढीमरखेड़ा, जिला कटनी द्वारा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को आवेदन प्रस्तुत कर मकान की स्थिति की जांच कराने, आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा उचित कार्रवाई की मांग की गई थी। लेकिन आवेदक के अनुसार आवेदन दिए लगभग 4-5 महीने गुजर जाने के बाद भी प्रशासन की ओर से न तो मौके पर पहुंचकर कोई जांच की गई और न ही जर्जर मकान को लेकर कोई ठोस कार्रवाई की गई है।
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि ग्राम उमरियापान के वार्ड क्रमांक 17 के आबादी क्षेत्र में स्थित उक्त मकान काफी पुराना है और वर्तमान में अत्यधिक जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। मकान की स्थिति ऐसी बताई गई है कि वह वर्तमान समय में रहवास के योग्य भी नहीं है। आवेदन के अनुसार पिछले लगभग 8-9 वर्षों से मकान का उचित रखरखाव नहीं किया गया है, जिसके चलते उसकी हालत लगातार खराब होती चली गई।
सबसे गंभीर बात यह है कि उक्त जर्जर मकान के आसपास अन्य ग्रामीणों के मकान भी बने हुए हैं तथा वहां लोगों का आवागमन और निवास रहता है। ऐसे में यदि अचानक मकान की दीवार, छत या उसका कोई अन्य हिस्सा गिरता है तो आसपास रहने वाले लोगों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। आवेदक ने आवेदन के माध्यम से आशंका जताई है कि जर्जर भवन किसी भी समय धराशायी हो सकता है और इससे जनहानि अथवा अन्य अप्रिय घटना घटित होने की संभावना बनी हुई है।
आवेदक के अनुसार जर्जर मकान को लेकर संबंधित अधिकारियों को समय रहते अवगत कराया गया था, ताकि किसी संभावित हादसे से पहले प्रशासन मौके का निरीक्षण कर आवश्यक कदम उठा सके। आवेदन अनुविभागीय अधिकारी ढीमरखेड़ा, नायब तहसीलदार उमरियापान, ग्राम पंचायत उमरियापान तथा थाना प्रभारी उमरियापान को संबोधित किया गया था। इसके बावजूद लगभग 4-5 महीने का समय बीत जाने के बाद भी मामले में किसी प्रकार की जांच या मौके का निरीक्षण नहीं होने की बात आवेदक द्वारा कही गई है।
आवेदन में जुगल असाटी पिता स्वर्गीय लक्ष्मीप्रसाद, मीना पत्नी मुकेश असाटी तथा आरती असाटी पत्नी दिनेश असाटी का उल्लेख अनावेदक के रूप में किया गया है। सभी को ग्राम उमरियापान, तहसील ढीमरखेड़ा, जिला कटनी का निवासी बताया गया है। आवेदक ने संबंधित अधिकारियों से जर्जर मकान की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तत्काल मौके का निरीक्षण कराने तथा भवन की वास्तविक स्थिति के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की थी।
स्थानीय स्तर पर अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि किसी जर्जर भवन को लेकर कई महीने पहले प्रशासन को लिखित आवेदन के माध्यम से जानकारी दी जा चुकी है, तो अब तक मौके पर जांच क्यों नहीं की गई। आखिर प्रशासन द्वारा संभावित खतरे को लेकर समय रहते सुरक्षा संबंधी कदम क्यों नहीं उठाए गए। यदि भवन वास्तव में इतना जर्जर है कि उसके गिरने की आशंका है, तो किसी अप्रिय घटना का इंतजार करने के बजाय पहले से आवश्यक कार्रवाई किया जाना जरूरी है।
आवेदक अभिषेक तिवारी ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित मकान का तत्काल स्थल निरीक्षण कराया जाए और उसकी जर्जर स्थिति का परीक्षण कर आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी मांग की गई है कि आसपास निवास करने वाले लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाए, जिससे किसी भी संभावित दुर्घटना को समय रहते रोका जा सके।
आवेदक ने अपनी शिकायत में यह भी स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि उक्त जर्जर मकान के गिरने अथवा उसके किसी भी हिस्से के गिरने से भविष्य में किसी प्रकार की जनहानि होती है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन की होगी। उनका कहना है कि जब प्रशासन को कई महीने पहले ही लिखित रूप से संभावित खतरे की जानकारी दी जा चुकी है, इसके बावजूद यदि जांच और आवश्यक कार्रवाई नहीं की जाती है तथा बाद में कोई अप्रिय घटना घटित होती है, तो जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
फिलहाल मामला प्रशासन के समक्ष लंबित बताया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि संबंधित अधिकारी इस गंभीर मामले में कब तक मौके का निरीक्षण कराते हैं और जर्जर मकान से उत्पन्न संभावित खतरे को देखते हुए क्या कदम उठाते हैं। ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़े इस मामले में समय रहते कार्रवाई होना इसलिए भी आवश्यक है, क्योंकि किसी दुर्घटना के बाद की गई कार्रवाई संभावित जनहानि को वापस नहीं ला सकती।
आवेदन में दर्ज मोबाइल नंबर 9893042380 भी उपलब्ध कराया गया है। आवेदन पर संबंधित कार्यालयों की मुहर एवं हस्ताक्षर भी दिखाई दे रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आवेदन संबंधित स्तर पर प्रस्तुत किया गया था। अब आवेदक द्वारा प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि जर्जर मकान के कारण किसी भी व्यक्ति की जान जोखिम में न पड़े।


