अदाणी फाउंडेशन की पहल से सहेजा गया 25 करोड़ लीटर से अधिक वर्षा जल।

 अदाणी फाउंडेशन की पहल से सहेजा गया 25 करोड़ लीटर से अधिक वर्षा जल।

जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्यों से ग्रामीण क्षेत्रों में दिखने लगा सकारात्मक असर,भूजल स्तर में सुधार के साथ गर्मी में भी बढ़ी पानी की उपलब्धता।

कैमोर। कटनी जिले के विजयराघवगढ़ विकासखंड में जल संरक्षण और संवर्धन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक असर अब धरातल पर दिखाई देने लगा है। अदाणी सीमेंट बिजनेस कैमोर एवं अमेहटा सीमेंट वर्क्स के सीएसआर कार्यक्रम के अंतर्गत अदाणी फाउंडेशन द्वारा क्षेत्र के विभिन्न गांवों में कराए गए जल संरक्षण कार्यों से न केवल बारिश के पानी को रोकने में मदद मिली है, बल्कि भूजल स्तर को बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए हैं। फाउंडेशन के प्रयासों से क्षेत्र में 25 करोड़ लीटर से अधिक वर्षा जल को सहेजने में मदद मिली है।

कैमोर एवं अमेहटा प्लांट के आसपास स्थित बड़ारी, कलहरा, झिरिया, नन्हवारा, सलैया कौहारी, रजरवारा नंबर-2, अमेहटा, गुड़गुड़ौहा सहित आसपास के गांवों में जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्यक्रम के तहत विभिन्न कार्य कराए गए हैं। इन कार्यों का मुख्य उद्देश्य बारिश के पानी को गांवों के आसपास रोकना, जल संरचनाओं की क्षमता बढ़ाना और वर्षा जल को जमीन में उतारकर भूजल स्तर को रिचार्ज करना है।

जल संरक्षण के लिए तालाबों का गहरीकरण और डी-सिल्टेशन, इनलेट एवं आउटलेट का निर्माण तथा सुधार, चेक डेम, नालों की सफाई, संकेन बॉक्स, गली प्लग, गेवियन तथा लूज बोल्डर स्ट्रक्चर सहित कई प्रकार की संरचनाओं का निर्माण एवं सुधार कार्य किया गया। इन कार्यों के माध्यम से बारिश के दौरान तेजी से बहकर निकल जाने वाले पानी को स्थानीय स्तर पर रोकने की दिशा में प्रभावी प्रयास किए गए हैं।

पहाड़ों से निकलने वाले पानी को स्थानीय स्तर पर रोकने की पहल

क्षेत्र में बारिश के दौरान पहाड़ी इलाकों से निकलने वाला पानी कई छोटे-बड़े नालों के माध्यम से बहकर सीधे महानदी की ओर चला जाता था। इससे बड़ी मात्रा में वर्षा जल का उपयोग स्थानीय स्तर पर नहीं हो पाता था। अदाणी फाउंडेशन द्वारा जल संरक्षण संरचनाओं के माध्यम से इस पानी को रास्ते में ही रोकने और उसे जमीन में उतारने की दिशा में कार्य किया गया।

जल संरचनाओं के निर्माण और पुराने जलस्रोतों के सुधार से अब बारिश का पानी गांवों के आसपास अधिक समय तक रुक रहा है। इससे एक ओर जहां वर्षा जल का संचयन हो रहा है, वहीं दूसरी ओर पानी के जमीन में रिसाव के कारण भूजल स्रोतों के रिचार्ज में भी मदद मिल रही है।

सिल्ट जमा होने से कम हो गई थी तालाबों की क्षमता

ग्रामीण क्षेत्रों में कई तालाब वर्षों से बारिश के पानी के साथ आने वाली मिट्टी और सिल्ट के जमा होने के कारण अपनी मूल जल भंडारण क्षमता खोते जा रहे थे। तालाबों में लगातार सिल्ट जमा होने से उनकी गहराई कम हो गई थी, जिसके कारण बारिश के मौसम में पर्याप्त पानी जमा नहीं हो पाता था और पानी जल्दी बाहर निकल जाता था।

अदाणी फाउंडेशन द्वारा ऐसे तालाबों को चिन्हित कर डी-सिल्टेशन एवं गहरीकरण का कार्य कराया गया। इसके बाद तालाबों की जल भंडारण क्षमता में सुधार हुआ और बारिश के मौसम में पहले की अपेक्षा अधिक पानी को रोकना संभव हो सका। कुछ स्थानों पर जल संरचनाओं के आउटलेट में भी सुधार किया गया, जिससे अनावश्यक रूप से पानी के बहकर निकल जाने की समस्या को कम करने में मदद मिली।

भूजल स्तर में सुधार से ग्रामीणों को राहत

जल संरक्षण के इन कार्यों का असर केवल बारिश के मौसम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका फायदा गर्मी के दिनों में भी ग्रामीणों को मिल रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, तालाबों और अन्य जल संरचनाओं में बारिश का पानी अधिक मात्रा में रुकने के बाद आसपास के क्षेत्रों में भूजल स्तर में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।

ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर पहले हैंडपंप पानी की कमी के कारण गर्मी के दिनों में बंद हो जाते थे। वहीं कुछ बोरिंग में जनवरी के बाद पानी की उपलब्धता कम होने लगती थी। जल संरक्षण के कार्यों के बाद अब कई स्थानों पर मई और जून तक भी पानी उपलब्ध रहने की स्थिति बनी है। इससे ग्रामीणों को गर्मी के मौसम में पेयजल और अन्य आवश्यकताओं के लिए राहत मिल रही है।

स्थानीय जलस्रोतों को मजबूत करने पर जोर

अदाणी फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों का उद्देश्य केवल तत्कालीन जल समस्या का समाधान करना नहीं, बल्कि गांवों में उपलब्ध प्राकृतिक जलस्रोतों को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखना भी है। वर्षा जल को अधिक से अधिक मात्रा में स्थानीय स्तर पर रोककर उसका भूजल रिचार्ज में उपयोग करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में जल सुरक्षा को मजबूत करने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

ग्रामीणों का मानना है कि तालाबों के गहरीकरण, नालों की सफाई, चेक डेम और अन्य जल संरक्षण संरचनाओं के कारण बारिश का पानी तेजी से बहकर बाहर जाने के बजाय गांवों के आसपास रुक रहा है। इससे आने वाले समय में भूजल स्तर को बनाए रखने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

सीएसआर के माध्यम से जल संरक्षण को बढ़ावा

अदाणी सीमेंट बिजनेस कैमोर एवं अमेहटा सीमेंट वर्क्स के सीएसआर के तहत अदाणी फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे इन कार्यों से क्षेत्र में जल संरक्षण को लेकर जागरूकता भी बढ़ रही है। स्थानीय स्तर पर जलस्रोतों के संरक्षण और वर्षा जल के सदुपयोग को लेकर ग्रामीणों में सकारात्मक सोच विकसित हो रही है।

25 करोड़ लीटर से अधिक वर्षा जल को सहेजने की उपलब्धि इस बात का संकेत है कि योजनाबद्ध तरीके से किए गए छोटे-बड़े जल संरक्षण कार्य सामूहिक रूप से बड़े परिणाम दे सकते हैं। बारिश के पानी को रोकने, उसे जमीन में उतारने और जलस्रोतों की क्षमता बढ़ाने के इन प्रयासों से विजयराघवगढ़ क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में जल संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण सामने आया है।

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