विकास की 14 मांगों को लेकर उमरियापान में गूंजी आवाज,आश्वासन के बाद थमा आंदोलन।

 विकास की 14 मांगों को लेकर उमरियापान में गूंजी आवाज,आश्वासन के बाद थमा आंदोलन।

आईटीआई से अस्पताल और मंडी से सड़क तक उठे क्षेत्रीय मुद्दे,मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो फिर आंदोलन की चेतावनी।

उमरियापान। क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही जनसमस्याओं और विकास से जुड़ी 14 सूत्रीय मांगों को लेकर उमरियापान न्यू बस स्टैंड पर 1 सितंबर 2026 से चंद्रकांत (चंदू भाई) चौरसिया द्वारा चलाया जा रहा अनिश्चितकालीन धरना आखिरकार प्रशासन के आश्वासन के बाद समाप्त हो गया। आंदोलन के दौरान क्षेत्र की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, परिवहन, सड़क, कृषि और प्रशासनिक सुविधाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।

चंद्रकांत चौरसिया द्वारा मुख्यमंत्री के नाम जिला दंडाधिकारी, कटनी के माध्यम से 14 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन प्रस्तुत किया गया था। इन मांगों में कई ऐसे मुद्दे शामिल हैं, जिन्हें क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही आवश्यकताओं के रूप में देखा जा रहा है। धरने के दौरान मांगों को लेकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया और स्थानीय नागरिकों की समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की गई।

आईटीआई की स्थापना और अस्पताल के विस्तार की मांग

14 सूत्रीय मांगपत्र में उमरियापान क्षेत्र में आईटीआई की स्थापना कर शैक्षणिक सत्र 2027-28 से प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ कराने की मांग प्रमुख रूप से रखी गई। क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा की सुविधा उपलब्ध होने से स्थानीय युवाओं को रोजगारपरक शिक्षा का अवसर मिलने की उम्मीद जताई गई है।

इसके साथ ही उमरियापान अस्पताल के विस्तार तथा स्वीकृत चिकित्सकीय पदों पर डॉक्टरों की नियुक्ति की मांग भी उठाई गई। क्षेत्र की बड़ी आबादी को देखते हुए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सकीय व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

कृषि उपज मंडी और बस स्टैंड निर्माण का मुद्दा

मांगपत्र में उमरियापान में प्रस्तावित कृषि उपज मंडी को स्वीकृति प्रदान करने की मांग भी शामिल रही। किसानों को अपनी कृषि उपज के विक्रय के लिए बेहतर स्थानीय सुविधा उपलब्ध कराने की आवश्यकता को इस मांग के माध्यम से सामने रखा गया।

वहीं उमरियापान न्यू बस स्टैंड के साथ बम्हनी में स्वीकृत बस स्टैंड का निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ कराने की मांग की गई। क्षेत्र में यात्री सुविधाओं और व्यवस्थित परिवहन व्यवस्था को लेकर भी आंदोलन के दौरान आवाज उठाई गई।

स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग

मांगपत्र में ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र में उद्योग स्थापना के लिए पूर्व में चिन्हित भूमि पर उद्योग लगाने की स्वीकृति प्रदान करने की मांग की गई। आंदोलनकारियों का कहना है कि क्षेत्र में उद्योग स्थापित होने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

इसके अलावा उमरियापान में एसडीएम टप्पा कोर्ट की स्थापना की मांग भी रखी गई। इससे क्षेत्र के लोगों को राजस्व एवं प्रशासनिक मामलों के लिए दूर-दराज के कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद जताई गई।

शिक्षा और खेल सुविधाओं को लेकर भी उठी आवाज

नवीन सांदीपनी स्कूल के लिए चिन्हित भूमि पर निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ कराने की मांग भी 14 सूत्रीय ज्ञापन में शामिल रही। इसके साथ ही खेल मैदान के लिए आवंटित भूमि पर आवश्यक राशि स्वीकृत कर निर्माण कार्य कराने की मांग की गई, ताकि क्षेत्र के युवाओं को खेल गतिविधियों के लिए बेहतर सुविधा उपलब्ध हो सके।

सड़क निर्माण और यातायात व्यवस्था का मुद्दा भी प्रमुख

आंदोलन के दौरान क्षेत्र की सड़क एवं आवागमन व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया। उमरियापान-सिहोरा सड़क निर्माण, झंडा चौक से बस्ती की मुख्य सड़क के निर्माण तथा उमरियापान से कुदवारी-गुरहा मार्ग के निर्माण की मांग रखी गई।

वहीं सिहोरा-ढीमरखेड़ा मार्ग पर लगातार बढ़ते यातायात दबाव के कारण उत्पन्न होने वाली जाम की समस्या से राहत दिलाने के लिए प्रभावी और स्थायी यातायात व्यवस्था बनाने की मांग भी की गई। आंदोलनकारियों ने क्षेत्र में सुगम आवागमन के लिए सड़क एवं यातायात व्यवस्था को बेहतर किए जाने की आवश्यकता बताई।

पान किसानों की क्षति और राजस्व नियमों में बदलाव की मांग

मांगपत्र में पान किसानों से जुड़ी समस्याओं को भी प्रमुखता से शामिल किया गया। प्राकृतिक आपदा के कारण पान की फसल को हुए नुकसान के एवज में किसानों को उचित अनुदान राशि दिलाने की मांग की गई।

इसके साथ ही पान बरेजा की खेती में उपयोग होने वाली भूमि के मापदंडों का पुनरीक्षण करते हुए राजस्व पुस्तक परिपत्र में आवश्यक संशोधन कराने की मांग भी रखी गई। आंदोलन के माध्यम से किसानों की आर्थिक परेशानियों और कृषि से जुड़े नियमों में व्यावहारिक बदलाव की आवश्यकता को प्रशासन के सामने रखा गया।

स्थानीय समस्याओं पर तत्काल कार्रवाई का आश्वासन

धरना समाप्त कराने के दौरान तहसीलदार उमरियापान इसरार खान ने आंदोलनकारी चंद्रकांत चौरसिया और उपस्थित लोगों को आश्वस्त किया कि मांगपत्र में शामिल जिन समस्याओं का निराकरण स्थानीय प्रशासन एवं पंचायत स्तर पर किया जा सकता है, उन पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

तहसीलदार ने साफ-सफाई, पेयजल व्यवस्था सहित अन्य स्थानीय समस्याओं के शीघ्र निराकरण का भरोसा दिलाया। वहीं जिन मांगों के लिए जिला, संभाग अथवा शासन स्तर पर स्वीकृति अथवा निर्णय आवश्यक है, उन्हें संबंधित विभागों एवं सक्षम उच्च अधिकारियों के समक्ष विधिवत प्रेषित कर अवगत कराने की बात कही गई।

प्रशासन के इस आश्वासन के बाद चंद्रकांत चौरसिया ने अपना अनिश्चितकालीन धरना समाप्त करने की घोषणा की। आंदोलन समाप्त होने के साथ ही क्षेत्रवासियों ने अब प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन पर अमल की उम्मीद जताई है।

मांगों पर अमल नहीं हुआ तो फिर आंदोलन की चेतावनी

धरना समाप्त करने के बाद चंद्रकांत चौरसिया ने कहा कि स्थानीय स्तर पर जिन मांगों के निराकरण का प्रशासन ने आश्वासन दिया है, उन पर अब कार्रवाई की प्रतीक्षा की जाएगी। वहीं जिन मांगों को शासन एवं उच्च अधिकारियों तक भेजे जाने की बात कही गई है, उनके संबंध में भी आगे की कार्रवाई पर नजर रखी जाएगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आश्वासन के बावजूद मांगों पर समयबद्ध तरीके से जमीनी स्तर पर अमल नहीं हुआ और समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो भविष्य में पुनः आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।

फिलहाल प्रशासन के आश्वासन के बाद 1 सितंबर से चल रहा अनिश्चितकालीन धरना समाप्त हो गया है। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 14 सूत्रीय मांगों में से स्थानीय स्तर की मांगों पर कितनी जल्दी कार्रवाई होती है और शासन स्तर से जुड़ी मांगों को लेकर आगे क्या निर्णय सामने आता है।

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