अवैध शराब पैकारियों से ग्रामीण परेशान,विधायक के पत्र और निर्देश भी बेअसर।
एसपी को पत्र लिखने के बाद भी कार्रवाई नहीं,तिरंगा यात्रा में विधायक ने थाना प्रभारी को दिए थे तत्काल पैकारियां बंद कराने के निर्देश,ग्रामीण बोले-आखिर किसके संरक्षण में चल रहा अवैध कारोबार?
उमरिया पान। क्षेत्र में कथित अवैध शराब पैकारियों के संचालन को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव-गांव में अवैध शराब की बिक्री को लेकर लंबे समय से शिकायतें की जा रही हैं। अधिकारियों को ज्ञापन दिए गए, शिकायतें की गईं और जनप्रतिनिधियों का ध्यान भी इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित कराया गया, लेकिन इसके बावजूद कथित अवैध शराब कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ग्रामीणों की शिकायत क्षेत्रीय विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह तक पहुंची। ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए विधायक श्री सिंह ने पुलिस अधीक्षक कटनी को पत्र लिखकर बड़वारा विधानसभा क्षेत्र में संचालित बताई जा रही अवैध शराब पैकारियों को तत्काल बंद कराने की मांग की। इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभागों की ओर से ऐसी कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दी, जिससे अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगने का संदेश जाता।
विधायक के सामने फिर उठाया मुद्दा, थाना प्रभारी को दिए निर्देश
13 अगस्त को तिरंगा यात्रा के दौरान जब कुछ ग्रामीणों ने पुनः क्षेत्रीय विधायक के समक्ष अवैध शराब पैकारियों का मुद्दा उठाया तो विधायक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके पर उपस्थित थाना प्रभारी को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। ग्रामीणों के अनुसार विधायक ने स्पष्ट रूप से संचालित पैकारियों को बंद कराने के लिए कहा था।
लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि विधायक के निर्देश के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। यदि जनप्रतिनिधि द्वारा पुलिस अधीक्षक को लिखित पत्र भेजा गया हो और मौके पर थाना प्रभारी को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हों, इसके बावजूद शिकायतें बनी रहें, तो स्वाभाविक रूप से पुलिस एवं आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है।
गांव-गांव में पैकारियों के आरोप, कार्रवाई का इंतजार
ग्रामीणों द्वारा उमरिया पान सहित आसपास के अनेक गांवों में कथित अवैध शराब पैकारियां संचालित होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इनमें उमरिया पान, पचपेढ़ी, पकरिया, बरौदा, बिछिया, देवरी मंगेला, मंगेली, पड़रिया, टोला, इटवां, बारगांव, बरेली, भानपुरा, डुंडी, पिपरिया, सहलावान, भटगवां, तिघरा, भशेड़ा, गढ़वास, कुदवारी, बम्हनी, महनेर, बनहरी, शुक्ल पिपरिया, गर्राघाट, बरही, खाम्हा, नैगवां, परसेल, करही, घुघरा, घुघरी और टोपी सहित अन्य गांव शामिल बताए जा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन स्थानों पर अवैध शराब की बिक्री के आरोप गलत हैं तो विभागीय स्तर पर जांच कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए और यदि शिकायतें सही हैं तो फिर तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है?
जिम्मेदार विभागों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर शिकायतों और जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप के बावजूद कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है? क्या पुलिस और आबकारी विभाग को इन शिकायतों की जानकारी नहीं है? यदि जानकारी है तो अब तक कितने स्थानों पर जांच की गई? कितनी कार्रवाई की गई? कितनी अवैध शराब जब्त हुई? कितने प्रकरण दर्ज किए गए? और यदि कार्रवाई नहीं हुई तो उसका कारण क्या है?
ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार विभागों की निष्क्रियता के कारण अवैध शराब बेचने वालों के हौसले बढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि जब लगातार शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होती तो आम नागरिकों में यह संदेश जाता है कि शिकायत करने का भी कोई लाभ नहीं है।
कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण आंदोलन की राह पकड़ सकते हैं
ग्रामीणों का कहना है कि शराब की अवैध बिक्री केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर ग्रामीण परिवारों और सामाजिक वातावरण पर पड़ता है। ग्रामीणों के मुताबिक गांवों में खुलेआम या कथित रूप से अवैध तरीके से शराब उपलब्ध होने से युवा वर्ग पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और परिवारों में विवाद तथा सामाजिक समस्याएं बढ़ सकती हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर शराब की बिक्री के लाइसेंस, दुकानों एवं कथित पैकारियों की जांच कराई जाए। जिन स्थानों पर अवैध शराब बिक्री की शिकायतें मिल रही हैं, वहां पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम भेजकर वास्तविक स्थिति की जांच की जाए।
अब सवाल कार्रवाई का नहीं, जवाबदेही का है
ग्रामीणों का कहना है कि वे बार-बार शिकायतें करते रहे, जनप्रतिनिधि तक मामला पहुंचाया गया, विधायक ने पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा और तिरंगा यात्रा के दौरान थाना प्रभारी को भी तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसके बाद भी यदि कथित अवैध शराब पैकारियां संचालित होने की शिकायतें सामने आती रहें तो यह केवल अवैध शराब का मामला नहीं रह जाता, बल्कि संबंधित विभागों की जवाबदेही का गंभीर प्रश्न बन जाता है।
अब ग्रामीण यह जानना चाहते हैं कि आखिर विधायक के पत्र और निर्देशों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या पुलिस और आबकारी विभाग ने शिकायतों की जांच की है? यदि जांच की गई है तो उसका परिणाम क्या रहा? और यदि कार्रवाई हुई है तो उसका विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल कागजी कार्रवाई या आश्वासन से समस्या समाप्त नहीं होगी। यदि वास्तव में अवैध शराब का कारोबार संचालित हो रहा है तो उसके खिलाफ मौके पर कार्रवाई दिखाई देनी चाहिए।
फिलहाल उमरिया पान सहित आसपास के गांवों में कथित अवैध शराब पैकारियों को लेकर माहौल गरमाता जा रहा है। ग्रामीणों की निगाह अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जनप्रतिनिधि स्वयं इस मुद्दे को गंभीरता से उठा चुके हैं, तो फिर संबंधित विभाग कब जागेंगे और कब तक कथित अवैध शराब कारोबार पर वास्तविक कार्रवाई होगी?
संबंधित पुलिस एवं आबकारी विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


