ग्रामपंचायत उमरिया पान मैं गंदे पानी में डूबी नल की चाबी,पेयजल के नाम पर ग्रामीणों के स्वास्थ्य से खिलवाड़!
वार्ड क्रमांक 1 में खुले गड्ढे में लगी पेयजल पाइपलाइन की चाबी,बारिश का गंदा पानी और कीचड़ सीधे गड्ढे में जमा,वार्ड 1 सहित चार मोहल्लों के रहवासी इसी पानी को पीने मजबूर,संक्रमण के खतरे के बीच जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल।
उमरिया पान। ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम पंचायत उमरिया पान में पेयजल व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत के वार्ड क्रमांक 1 बाजार मोहल्ला में पेयजल पाइपलाइन की चाबी एक ऐसे खुले गड्ढे में लगाई गई है, जिसमें गंदा पानी और कीचड़ भरा रहता है। बारिश होने के बाद आसपास का गंदा पानी बहकर इसी गड्ढे में जमा हो जाता है। गड्ढे के आसपास भी गंदगी का आलम है और लंबे समय से साफ-सफाई नहीं होने के कारण स्थिति बद से बदतर होती जा रही है।
सबसे गंभीर बात यह है कि इसी पाइपलाइन से निकलने वाला पानी वार्ड क्रमांक 1 के रहवासियों के साथ-साथ स्टेट बैंक मोहल्ला, बावली मोहल्ला और वार्ड क्रमांक 18 नई बस्ती के लोगों द्वारा भी उपयोग किया जा रहा है। यानी एक गंदे और अस्वच्छ स्थान पर लगाई गई पेयजल चाबी की समस्या का प्रभाव केवल एक परिवार या एक मोहल्ले तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में ग्रामीणों के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है।
स्थानीय रहवासियों का कहना है कि जिस स्थान पर पाइपलाइन की चाबी लगाई गई है, वहां गड्ढा खुला पड़ा रहता है। बारिश के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है। सड़क एवं आसपास का गंदा पानी बहकर गड्ढे में पहुंचता है और वहां लंबे समय तक जमा रहता है। गड्ढे में कीचड़ और गंदे पानी के साथ कीड़े-मकौड़े भी दिखाई देते हैं। ऐसी परिस्थितियों में पेयजल व्यवस्था की स्वच्छता को लेकर स्वाभाविक रूप से गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पेयजल पाइपलाइन की चाबी को गंदे पानी से भरे गड्ढे में लगाने की व्यवस्था अपने आप में चिंता का विषय है। चाबी को खोलने और बंद करने के दौरान लोगों को उसी गंदे पानी के संपर्क में आना पड़ता है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि चाबी के आसपास लगातार गंदा पानी जमा रहता है और वहां स्वच्छता की कोई उचित व्यवस्था नहीं है, तो क्या इस पूरी व्यवस्था की तकनीकी और स्वास्थ्य संबंधी जांच की गई है? क्या संबंधित विभाग ने कभी यह जानने का प्रयास किया कि जिस पानी को ग्रामीण पेयजल के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, उसकी गुणवत्ता वास्तव में कैसी है?
बारिश के मौसम में जल स्रोतों और पेयजल पाइपलाइनों के आसपास स्वच्छता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। गंदगी और दूषित पानी के संपर्क में रहने वाली पेयजल व्यवस्था से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में ग्रामीणों को साफ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना ग्राम पंचायत एवं संबंधित विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। लेकिन उमरिया पान के वार्ड क्रमांक 1 में सामने आई स्थिति जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों के मुताबिक समस्या नई नहीं है। कई बार संबंधित जिम्मेदारों को इस स्थिति से अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद पेयजल चाबी को गंदे पानी से बाहर निकालने और सुरक्षित स्थान पर लगाने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। शिकायतों के बाद भी यदि समस्या उसी स्थिति में बनी हुई है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर ग्रामीणों की शिकायतों पर सुनवाई कब होगी।
ग्रामीणों ने पंचायत स्तर पर जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली को लेकर भी नाराजगी जाहिर की है। उनका आरोप है कि सरपंच एवं सरपंच पुत्र की मनमानी के कारण इस समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और यदि कहीं लापरवाही हुई है तो उसके लिए जिम्मेदारी भी तय हो।
यह मामला केवल नल की चाबी या एक छोटे से गड्ढे का नहीं है, बल्कि लोगों को उपलब्ध कराए जा रहे पेयजल की सुरक्षा और गुणवत्ता का मामला है। जब किसी गांव के लोग रोजाना उसी पाइपलाइन का पानी पी रहे हों, जिसकी चाबी गंदे पानी से भरे खुले गड्ढे में लगी हो, तो प्रशासन और संबंधित विभाग को इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। बारिश लगातार जारी रहने पर गड्ढे में गंदा पानी और कीचड़ जमा होने की संभावना बनी रहती है। ऐसे में आसपास मच्छरों और अन्य कीटों का प्रकोप भी बढ़ सकता है। ग्रामीणों को आशंका है कि गंदगी के कारण विभिन्न प्रकार की जलजनित एवं संक्रमण संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
रहवासियों की मांग है कि संबंधित अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचकर पेयजल चाबी वाले स्थान का निरीक्षण करें। गड्ढे में जमा गंदे पानी एवं कीचड़ को हटाया जाए, आसपास की सफाई कराई जाए और पेयजल पाइपलाइन की चाबी को खुले गड्ढे से हटाकर स्वच्छ एवं सुरक्षित स्थान पर स्थापित किया जाए। इसके साथ ही जिस पाइपलाइन से वार्ड क्रमांक 1, स्टेट बैंक मोहल्ला, बावली मोहल्ला और वार्ड क्रमांक 18 नई बस्ती के लोगों को पानी मिल रहा है, उस पानी की गुणवत्ता की भी जांच कराई जाए।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि केवल गड्ढे की सफाई कर देना पर्याप्त नहीं होगा। जब तक पेयजल चाबी को सुरक्षित स्थान पर स्थायी रूप से स्थापित नहीं किया जाता, तब तक समस्या दोबारा उत्पन्न होने की आशंका बनी रहेगी। इसलिए पंचायत और संबंधित विभाग को अस्थायी खानापूर्ति के बजाय स्थायी समाधान की दिशा में काम करना चाहिए।
गांव में पेयजल व्यवस्था को लेकर यदि इस प्रकार की स्थिति बनी रहती है तो यह जिम्मेदार विभागों के लिए गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए। ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना किसी प्रकार की सुविधा नहीं बल्कि उनकी मूलभूत आवश्यकता है। ऐसे में पेयजल व्यवस्था के किसी भी हिस्से में लापरवाही सीधे आमजन के स्वास्थ्य से जुड़ जाती है।
अब ग्रामीणों की निगाहें संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या अधिकारी मौके पर पहुंचकर इस गंदे पानी में डूबी पेयजल चाबी की वास्तविक स्थिति देखेंगे? क्या पानी की गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी? क्या जिम्मेदारी तय होगी? और सबसे बड़ा सवाल यह है कि लंबे समय से बताई जा रही इस समस्या का स्थायी समाधान आखिर कब होगा?
उमरिया पान के वार्ड क्रमांक 1 की यह तस्वीर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आवश्यकता इस बात की है कि शिकायतों को कागजों तक सीमित न रखकर जिम्मेदार अधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचें और समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करें, ताकि ग्रामीणों को स्वच्छ, सुरक्षित और भरोसेमंद पेयजल मिल सके।


