मध्य प्रदेश की सियासत में फिर उठी शिवराज की वापसी की चर्चा,क्या 2028 से पहले बदल सकता है सत्ता का समीकरण?
मूंग की MSP खरीदी को लेकर शिवराज के पत्र के बाद सियासी हलचल तेज,नेताओं की मुलाकातों ने बढ़ाया अटकलों का बाजार।
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की प्रदेश की सत्ता में वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि मुख्यमंत्री पद में किसी बदलाव को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है और डॉ. मोहन यादव ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। इसके बावजूद पिछले कुछ दिनों में सामने आए राजनीतिक घटनाक्रमों ने सत्ता के संभावित बदलाव को लेकर अटकलों को जरूर हवा दे दी है।
मूंग की न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर खरीदी को लेकर किसानों के बीच चल रही नाराजगी और आंदोलन के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर मूंग की खरीदी में तेजी लाने और किसानों को राहत पहुंचाने की मांग की थी। शिवराज के इस पत्र के बाद प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। राजनीतिक विश्लेषकों और नेताओं के बीच इस पत्र के राजनीतिक मायने भी तलाशे जाने लगे।
शिवराज सिंह चौहान का मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबा और मजबूत जनाधार रहा है। वह करीब डेढ़ दशक तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और भाजपा की प्रदेश राजनीति में उनका प्रभाव आज भी महत्वपूर्ण माना जाता है। मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद उन्हें केंद्र की राजनीति में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री बनाया गया। ऐसे में प्रदेश के किसी मुद्दे पर उनका सीधे मुख्यमंत्री को पत्र लिखना राजनीतिक तौर पर चर्चा का विषय बनना स्वाभाविक माना जा रहा है।
इसी बीच प्रदेश के कुछ वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों की शिवराज सिंह चौहान से मुलाकातों ने भी इन चर्चाओं को और तेज कर दिया है। हालांकि इन मुलाकातों को लेकर कोई आधिकारिक राजनीतिक संदेश सामने नहीं आया है, लेकिन सियासी जानकार इन्हें भविष्य की रणनीति और प्रदेश की राजनीति में संभावित समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि क्या आने वाले समय में भाजपा नेतृत्व मध्य प्रदेश में किसी बड़े राजनीतिक बदलाव पर विचार कर सकता है। हालांकि फिलहाल ऐसी किसी योजना की पुष्टि न तो भाजपा नेतृत्व की ओर से हुई है और न ही सरकार की ओर से।
वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग यह भी मानता है कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले यदि प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर पार्टी नेतृत्व को किसी तरह की चुनौती महसूस होती है, तो भाजपा संगठन और केंद्रीय नेतृत्व चुनावी रणनीति के तहत बड़े फैसले ले सकता है। इसी संभावना को शिवराज सिंह चौहान की संभावित वापसी की चर्चाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।
कुछ राजनीतिक जानकारों का दावा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कामकाज और प्रदेश की राजनीतिक स्थिति को लेकर केंद्र नेतृत्व तक पहुंचने वाली रिपोर्टों का आने वाले समय में असर दिखाई दे सकता है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल इसे राजनीतिक विश्लेषण और अटकल के तौर पर ही देखा जाना उचित होगा।
दरअसल, मध्य प्रदेश में भाजपा के सामने 2028 का विधानसभा चुनाव एक महत्वपूर्ण राजनीतिक लक्ष्य है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व संगठन, सरकार और जनभावनाओं से जुड़े हर पहलू पर नजर रखेगा। किसान मुद्दे, प्रशासनिक प्रदर्शन, संगठनात्मक समीकरण और सरकार की लोकप्रियता जैसे विषय आने वाले समय में राजनीतिक फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हैं और उनके स्थान पर शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री बनाए जाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए शिवराज की मुख्यमंत्री पद पर वापसी की खबर को अभी निश्चित राजनीतिक घटनाक्रम के बजाय संभावित भविष्य के समीकरण के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
हालांकि मध्य प्रदेश की राजनीति में शिवराज सिंह चौहान का प्रभाव और उनका व्यापक जनाधार ऐसा है कि उनकी सक्रियता से जुड़ा कोई भी राजनीतिक घटनाक्रम चर्चा का विषय बन जाता है। आने वाले दिनों में यदि भाजपा नेतृत्व की ओर से कोई संकेत मिलता है या प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव होता है, तो शिवराज की वापसी की इन चर्चाओं को नई दिशा मिल सकती है।
फिलहाल प्रदेश की सियासत में सवाल यही है कि क्या यह केवल राजनीतिक अटकल है या 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा किसी बड़े रणनीतिक बदलाव की तैयारी कर रही है। इसका जवाब आने वाला समय ही देगा।


