आंगनबाड़ी के नन्हे बच्चों ने किया शासकीय प्राथमिक शाला का शैक्षणिक भ्रमण,विद्यालय से जुड़ाव बढ़ाने की अनूठी पहल।

 आंगनबाड़ी के नन्हे बच्चों ने किया शासकीय प्राथमिक शाला का शैक्षणिक भ्रमण,विद्यालय से जुड़ाव बढ़ाने की अनूठी पहल।

पथवारी आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-02 के बच्चों का आत्मीय स्वागत, सामान्य ज्ञान,कविता,एबीसीडी अभ्यास और चॉकलेट वितरण के माध्यम से सीखने का मिला नया अनुभव।

पथवारी,ग्रामीण खबर MP।

महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी इंद्र कुमार साहू एवं परवीन बानो के निर्देशानुसार आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक पथवारी-02 के बच्चों का शासकीय प्राथमिक शाला झिरिया टोला पथवारी में शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया। इस पहल का उद्देश्य नौनिहालों में विद्यालय के प्रति रुचि विकसित करना, उन्हें विद्यालयीन वातावरण से परिचित कराना तथा प्रारंभिक शिक्षा के प्रति सकारात्मक सोच का निर्माण करना था।

विद्यालय पहुंचने पर प्रधानाध्यापक मिथिलेश पुरी गोस्वामी ने आंगनबाड़ी के बच्चों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने बच्चों से स्नेहपूर्ण संवाद करते हुए सामान्य ज्ञान से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका बच्चों ने पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ उत्तर दिया। बच्चों की जिज्ञासा और प्रतिभा से प्रभावित होकर प्रधानाध्यापक ने उनका उत्साहवर्धन किया तथा उन्हें चॉकलेट वितरित की। साथ ही बच्चों को रोचक एवं सरल तरीके से अध्ययन भी कराया गया।

शैक्षणिक गतिविधियों के दौरान कुमारी सौम्या गोस्वामी ने एबीसीडी का अभ्यास कर अपनी सीखने की क्षमता का प्रदर्शन किया, जबकि कुमारी वैष्णवी भूमिया ने सुंदर कविता प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। प्रधानाध्यापक मिथिलेश पुरी गोस्वामी ने दोनों बालिकाओं सहित सभी बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शुभा गोस्वामी द्वारा बच्चों के सर्वांगीण विकास एवं प्रारंभिक शिक्षा को लेकर किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की गई। उपस्थित लोगों ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण बच्चों में विद्यालय के प्रति अपनापन विकसित करने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास, सीखने की क्षमता और सामाजिक व्यवहार को भी मजबूत बनाते हैं।

कार्यक्रम का समापन बच्चों के उत्साहपूर्ण सहभागिता के साथ हुआ। इस शैक्षणिक भ्रमण से बच्चों को विद्यालय के वातावरण को निकट से समझने का अवसर मिला तथा उनके मन में नियमित रूप से विद्यालय आने और शिक्षा ग्रहण करने के प्रति नई प्रेरणा जागृत हुई।

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