गाजियाबाद में जिसे मृत समझकर कर दिया अंतिम संस्कार,वही अपनी तेरहवीं पर जिंदा घर लौटा।
शव की गलत पहचान से पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल,अब अज्ञात शव की असली पहचान और पूरे मामले की दोबारा जांच शुरू।
गाजियाबाद, ग्रामीण खबर MP
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की जांच प्रणाली, शव की पहचान प्रक्रिया और प्रशासनिक सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस व्यक्ति को मृत मानकर उसके परिजनों ने पूरे रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार कर दिया और तेरहवीं तक की सभी धार्मिक रस्में पूरी कर लीं, वही व्यक्ति तेरहवीं के दिन अचानक जीवित अपने घर लौट आया। इस अप्रत्याशित घटना से परिवार, रिश्तेदार और पूरे इलाके में हैरानी का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार, गाजियाबाद के कौशाम्बी क्षेत्र निवासी गिरधर सिंह बिष्ट कुछ समय पहले घर से लापता हो गए थे। परिजनों ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी और पुलिस उनकी तलाश कर रही थी। इसी दौरान मसूरी थाना क्षेत्र में एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद हुआ। परिस्थितियों और उपलब्ध संकेतों के आधार पर परिजनों ने उस शव को गिरधर सिंह बिष्ट का शव मान लिया। पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया।
इसके बाद परिवार ने पूरे धार्मिक रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया। शोकसभा आयोजित हुई और तेरहवीं की तैयारियां भी पूरी कर ली गईं। इस बीच पुलिस ने अज्ञात शव को गिरधर मानते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी थी।
लेकिन तेरहवीं के दिन उस समय सभी लोग स्तब्ध रह गए, जब गिरधर सिंह बिष्ट स्वयं जीवित अपने घर पहुंच गए। उन्हें सामने देखकर परिजनों की आंखों पर विश्वास करना मुश्किल हो गया। परिवार के सदस्य भावुक हो उठे और पूरे मोहल्ले में यह खबर आग की तरह फैल गई।
गिरधर सिंह बिष्ट ने बताया कि वे अपनी इच्छा से घर छोड़कर पंजाब स्थित डेरा सच्चा सौदा आश्रम चले गए थे, जहां वे कुछ समय तक रहे। उन्होंने किसी से संपर्क नहीं किया। बाद में परिवार की याद आने पर वे वापस घर लौट आए। उनके लौटने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि जिस शव का अंतिम संस्कार किया गया था, वह किसी अन्य व्यक्ति का था।
घटना सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अज्ञात शव की पहचान केवल परिजनों के अनुमान के आधार पर नहीं की जानी चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर डीएनए परीक्षण और अन्य वैज्ञानिक तरीकों से पहचान की पुष्टि करना बेहद जरूरी होता है, ताकि ऐसी गंभीर त्रुटियों से बचा जा सके।
अब पुलिस ने पूरे मामले की पुनः जांच शुरू कर दी है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जिस अज्ञात शव का अंतिम संस्कार किया गया, वह आखिर किस व्यक्ति का था। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि शव की पहचान में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
यह मामला न केवल पुलिस जांच प्रणाली के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अज्ञात शवों की पहचान में वैज्ञानिक और तकनीकी प्रक्रियाओं का पालन कितना आवश्यक है। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है और संबंधित अधिकारियों से भी पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तलब की गई है।

