सायना इंटरनेशनल कॉलेज में रिसर्च पेपर,जर्नल लेखन एवं प्रकाशन पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित।

 सायना इंटरनेशनल कॉलेज में रिसर्च पेपर,जर्नल लेखन एवं प्रकाशन पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित।

विशेषज्ञों ने शोध लेखन की आधुनिक तकनीकों,प्रकाशन प्रक्रिया,शोध नैतिकता एवं यूजीसी-केयर जर्नलों के चयन की दी विस्तृत जानकारी।

कटनी,ग्रामीण खबर MP।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शोध संस्कृति को प्रोत्साहित करने तथा प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण अकादमिक लेखन के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से सायना इंटरनेशनल कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, कटनी में "रिसर्च पेपर, जर्नल लेखन विधि एवं प्रकाशन" विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला में शोध लेखन की नवीनतम तकनीकों, अंतरराष्ट्रीय मानकों तथा प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं में प्रकाशन की प्रक्रिया पर विस्तारपूर्वक मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

कार्यशाला के मुख्य वक्ता डॉ. भरत मिश्रा, प्रोफेसर एवं डायरेक्टर, डॉ. शकुंतला मिश्रा नेशनल रिहैबिलिटेशन यूनिवर्सिटी, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) रहे। उन्होंने अपने व्याख्यान में शोध कार्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध किसी भी राष्ट्र की बौद्धिक प्रगति और नवाचार की आधारशिला होता है। उन्होंने प्रतिभागियों को शोध विषय के चयन, शोध समस्या की पहचान, शोध पद्धति, साहित्य समीक्षा, संदर्भ लेखन, शोध पत्र की वैज्ञानिक संरचना तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में शोध पत्र प्रकाशित कराने की संपूर्ण प्रक्रिया का विस्तृत एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।

मुख्य वक्ता ने शोध कार्य में नैतिक मूल्यों के पालन पर विशेष बल देते हुए प्लेगरिज्म से बचाव के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मौलिकता किसी भी शोध की सबसे बड़ी पहचान होती है तथा शोधार्थियों को सदैव प्रमाणिक एवं विश्वसनीय स्रोतों का उपयोग करना चाहिए। साथ ही यूजीसी-केयर सूचीबद्ध जर्नलों के चयन, शोध पत्र की गुणवत्ता में सुधार तथा प्रकाशन के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियों के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

कार्यशाला के दौरान प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने शोध लेखन से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपनी जिज्ञासाएं व्यक्त कीं, जिनका विशेषज्ञ द्वारा सरल एवं व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समाधान किया गया। प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि गुणवत्तापूर्ण शोध न केवल व्यक्तिगत शैक्षणिक उपलब्धि का आधार बनता है, बल्कि समाज, शिक्षा एवं राष्ट्र के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सी. राजेश कुमार ने मुख्य अतिथि एवं सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महाविद्यालय भविष्य में भी इसी प्रकार की शोधोन्मुखी एवं ज्ञानवर्धक कार्यशालाओं का आयोजन करता रहेगा, जिससे विद्यार्थियों एवं शिक्षकों में शोध के प्रति रुचि विकसित हो तथा अकादमिक गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सके।

कार्यशाला के समापन अवसर पर उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे अत्यंत उपयोगी, ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शोध कार्य की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ-साथ उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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