उमरियापान में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे का मामला गरमाया,बेदखली आदेशों के बावजूद जारी निर्माण कार्य।
नायब तहसीलदार और अनुविभागीय अधिकारी के आदेशों के बाद भी नहीं हटा कब्जा,सात दिन में भूमि खाली करने और निर्माण रोकने के निर्देश,ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल।
उमरियापान,ग्रामीण खबर MP।
उमरियापान क्षेत्र में शासकीय भूमि पर कथित अवैध कब्जे और लगातार जारी निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। राजस्व न्यायालयों द्वारा एक के बाद एक बेदखली आदेश पारित किए जाने के बावजूद मौके पर न तो कब्जा हटाया जा सका और न ही निर्माण कार्य पर प्रभावी रोक लगाई जा सकी। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब न्यायालय के आदेशों का पालन ही नहीं हो पा रहा है तो आम लोगों का कानून और प्रशासन पर विश्वास कैसे कायम रहेगा।
मामला उमरियापान स्थित शासकीय भूमि के खसरा क्रमांक 306, रकबा 0.445 हेक्टेयर से जुड़ा हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार यह भूमि शासकीय अभिलेखों में दर्ज है, लेकिन इस पर कथित रूप से अवैध कब्जा कर निर्माण कार्य किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित पक्ष द्वारा लगातार भूमि पर अपना अधिकार स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि इस संबंध में राजस्व न्यायालय स्पष्ट रूप से बेदखली के आदेश पारित कर चुका है।
ग्रामीणों द्वारा की गई शिकायतों के आधार पर नायब तहसीलदार न्यायालय ने 29 सितंबर 2025 को संबंधित पक्ष के विरुद्ध बेदखली आदेश पारित किया था। आदेश में स्पष्ट रूप से शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद संबंधित पक्ष ने इस आदेश को चुनौती देते हुए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ढीमरखेड़ा के न्यायालय में अपील प्रस्तुत की। अपीलीय न्यायालय ने पूरे प्रकरण का परीक्षण करने के बाद नायब तहसीलदार के आदेश को सही ठहराते हुए अपील को निरस्त कर दिया तथा बेदखली की कार्रवाई को यथावत बनाए रखा।
ग्रामीणों का कहना है कि अपील निरस्त होने के बाद यह अपेक्षा थी कि प्रशासन तत्काल कार्रवाई कर शासकीय भूमि को कब्जामुक्त कराएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके विपरीत मौके पर निर्माण गतिविधियां जारी रहीं और कथित रूप से भूमि पर लगातार मिट्टी एवं मुरुम डालकर समतलीकरण तथा फिलिंग का कार्य किया जाता रहा।
जब लंबे समय तक आदेशों का पालन नहीं हुआ तो नायब तहसीलदार न्यायालय ने पुनः आदेश जारी करते हुए सात दिवस के भीतर शासकीय भूमि खाली करने के निर्देश दिए। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर कब्जा नहीं हटाया जाता है तो प्रशासन बलपूर्वक बेदखली की कार्रवाई करेगा। इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि आज तक न तो कब्जा हटाया गया और न ही निर्माण कार्य पूरी तरह बंद कराया जा सका।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान स्थिति यह है कि देर रात के समय बड़ी मात्रा में मिट्टी और मुरुम लाकर संबंधित भूमि पर डाली जा रही है। उनका आरोप है कि क्षेत्र में किसी भी स्थान पर ऐसी कोई स्वीकृत खदान संचालित नहीं है, जहां से इतनी मात्रा में मिट्टी अथवा मुरुम का वैध उत्खनन किया जा सके। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठ रहा है कि निर्माण सामग्री आखिर कहां से लाई जा रही है। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले में कथित अवैध उत्खनन की जांच कराने तथा जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शासकीय भूमि पर न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद निर्माण कार्य चलता रहता है तो इससे शासन की मंशा और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उनका कहना है कि आम नागरिक यदि किसी छोटे से नियम का उल्लंघन करता है तो तत्काल कार्रवाई होती है, लेकिन यहां न्यायालय के आदेशों के बाद भी निर्माण कार्य जारी रहना कई तरह की आशंकाओं को जन्म दे रहा है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से अब तक केवल नोटिस जारी किए जाते रहे हैं, लेकिन मौके पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से संबंधित पक्ष के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते निर्माण कार्य नहीं रोका गया तो भविष्य में शासकीय भूमि को मूल स्वरूप में वापस लाना और अधिक कठिन हो जाएगा।
इस पूरे मामले में जब उमरियापान के नायब तहसीलदार इसरार खान से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि संबंधित पक्ष को निर्माण कार्य तत्काल बंद करने के लिए दो दिवस का नोटिस जारी किया गया है। यदि निर्धारित समयावधि के भीतर निर्माण कार्य बंद नहीं किया जाता तथा शासकीय भूमि खाली नहीं की जाती है तो नियमानुसार बलपूर्वक बेदखली की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायालय के आदेशों का पालन कराया जाएगा और आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं है। उनका मानना है कि जब तक मौके पर वास्तविक कार्रवाई दिखाई नहीं देती, तब तक प्रशासन की मंशा पर सवाल उठते रहेंगे। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि राजस्व न्यायालयों द्वारा पारित आदेशों का तत्काल पालन कराया जाए, शासकीय भूमि को कब्जामुक्त कराया जाए, निर्माण कार्य पर प्रभावी रोक लगाई जाए तथा यदि अवैध उत्खनन के माध्यम से मिट्टी और मुरुम लाई गई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर संबंधित लोगों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि शासकीय भूमि सार्वजनिक संपत्ति होती है, जिस पर प्रत्येक नागरिक का समान अधिकार होता है। यदि इस प्रकार के मामलों में समय पर कार्रवाई नहीं की जाती तो भविष्य में अन्य स्थानों पर भी शासकीय भूमि पर अतिक्रमण करने वालों के हौसले बढ़ सकते हैं। उनका कहना है कि प्रशासन की जिम्मेदारी केवल आदेश जारी करना नहीं, बल्कि उन आदेशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना भी है।
फिलहाल यह पूरा मामला क्षेत्र में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। लोगों को उम्मीद है कि न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हुए शासकीय भूमि को शीघ्र अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा तथा यदि किसी प्रकार की अनियमितता या अवैध उत्खनन सामने आता है तो दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी। वहीं यदि कार्रवाई में और विलंब होता है तो यह मामला आने वाले समय में और अधिक गंभीर रूप धारण कर सकता है तथा प्रशासन की कार्यशैली को लेकर जनाक्रोश और बढ़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

