पत्नी की हत्या को सांप के डंसने का रूप देने वाला पति उम्रकैद की सजा से दंडित।
साढ़े छह वर्ष पुराने बहुचर्चित शिवानी हत्याकांड में अदालत का बड़ा फैसला,हत्या,साक्ष्य मिटाने और संरक्षित कोबरा सांप की हत्या के मामले में दोषी ठहराया।
इंदौर,ग्रामीण खबर mp।
मध्यप्रदेश के इंदौर शहर के कनाड़िया थाना क्षेत्र में वर्ष 2019 में हुए बहुचर्चित शिवानी हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी पति अमितेश उर्फ शालू पटेरिया को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी को पत्नी की सुनियोजित हत्या, अपराध के साक्ष्य मिटाने तथा संरक्षित प्रजाति के कोबरा सांप की हत्या करने का दोषी माना। इसके साथ ही विभिन्न धाराओं के तहत अर्थदंड भी लगाया गया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना के बाद आरोपी ने पूरे मामले को प्राकृतिक मृत्यु या सांप के डंसने से हुई मौत का रूप देने का प्रयास किया था। जांच के दौरान पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की जांच तथा अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया। जांच में यह सामने आया कि आरोपी ने पहले अपनी पत्नी की हत्या की और बाद में घटना को सांप के डंसने से हुई मौत साबित करने की साजिश रची। साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से बाद में कोबरा सांप को भी मार दिया गया।
अतिरिक्त लोक अभियोजक चंद्रशेखर चौधरी ने बताया कि अभियोजन पक्ष द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत किए गए वैज्ञानिक प्रमाण, गवाहों के बयान और फॉरेंसिक रिपोर्ट ने यह सिद्ध कर दिया कि यह एक पूर्व नियोजित हत्या थी। न्यायालय ने सभी साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास का दंड सुनाया।
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि विवाह के बाद से ही शिवानी को दहेज और पैसों की मांग को लेकर लगातार प्रताड़ित किया जाता था। पुलिस ने विवेचना के आधार पर आरोपी के पिता ओमप्रकाश तथा एक अन्य महिला को भी सह-आरोपी बनाते हुए न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया था। उनके संबंध में न्यायालय की कार्यवाही विधिक प्रक्रिया के अनुसार जारी रही।
यह मामला प्रदेश के चर्चित हत्याकांडों में शामिल रहा, क्योंकि आरोपी द्वारा हत्या के बाद उसे सांप के डंसने से हुई मौत का रूप देने की कथित साजिश ने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था। साढ़े छह वर्ष तक चली सुनवाई के बाद आए इस फैसले को अभियोजन पक्ष ने वैज्ञानिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया की महत्वपूर्ण सफलता बताया है।
न्यायालय के इस निर्णय को ऐसे मामलों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है, जिसमें आधुनिक वैज्ञानिक जांच, फॉरेंसिक साक्ष्य और परिस्थितिजन्य प्रमाणों के आधार पर अपराध की परतें खुलीं और दोषी को कानून के अनुसार कठोर दंड मिला।

