स्लीमनाबाद टनल बनेगी विंध्य की अमृतधारा,पांच जिलों की बदलेगी तस्वीर,मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव।

 स्लीमनाबाद टनल बनेगी विंध्य की अमृतधारा,पांच जिलों की बदलेगी तस्वीर,मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव।

1600 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 12 किलोमीटर लंबी ऐतिहासिक परियोजना से कटनी,रीवा,सतना,मैहर और पन्ना में ढाई लाख हेक्टेयर तक सिंचाई का विस्तार,किसानों से जमीन नहीं बेचने की अपील।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्लीमनाबाद टनल परियोजना विंध्य क्षेत्र के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल एक सुरंग नहीं, बल्कि कटनी, रीवा, सतना, मैहर और पन्ना जिलों के लाखों किसानों के लिए नई उम्मीद, समृद्धि और खुशहाली का मार्ग है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम की पावन भूमि चित्रकूट और संपूर्ण विंध्य क्षेत्र के लिए यह टनल अमृतधारा के समान सिद्ध होगी, जिससे सिंचाई, पेयजल, कृषि उत्पादन और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को स्लीमनाबाद स्थित देश की सबसे लंबी जल सुरंग का अवलोकन करने के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि विंध्य क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद वर्षों से जल संकट की चुनौती का सामना करता रहा है। स्लीमनाबाद टनल इस चुनौती का स्थायी समाधान प्रस्तुत करेगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से पांच जिलों में लगभग ढाई लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का विस्तार होगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और क्षेत्र के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने परियोजना के लिए लगभग 275 करोड़ रुपये का सहयोग प्रदान किया है, जबकि राज्य सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता के साथ इसे पूरा करने का संकल्प निभाया। लगभग 1600 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह परियोजना अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और शीघ्र ही प्रदेशवासियों को इसका लाभ मिलने लगेगा।

उन्होंने बताया कि लगभग 12 किलोमीटर लंबी इस सुरंग का निर्माण अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में किया गया है। कई स्थानों पर इसकी गहराई जमीन से 120 फीट तक है तथा इसे इस प्रकार तैयार किया गया है कि भीषण भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में भी यह लगभग 100 वर्षों तक सुरक्षित रहेगी। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग की दृष्टि से यह परियोजना भविष्य में अध्ययन और शोध का महत्वपूर्ण विषय बनेगी तथा देशभर के इंजीनियरों के लिए एक आदर्श केस स्टडी के रूप में स्थापित होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विज्ञान और आधुनिक तकनीक का अद्भुत उदाहरण है कि अब मां नर्मदा का जल ऐतिहासिक टनल के माध्यम से गंगा बेसिन और सोन नदी के आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचेगा। इससे उन इलाकों में भी हरियाली आएगी, जहां वर्षों से पानी की कमी बनी हुई थी। उन्होंने कहा कि कभी ऐसा भी समय आया था जब इस परियोजना का पूरा होना असंभव प्रतीत होने लगा था, लेकिन मजबूत संकल्प, तकनीकी दक्षता और पूरी टीम की मेहनत ने इस चुनौती को सफलता में बदल दिया।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में एक समय सिंचाई का रकबा केवल साढ़े सात लाख हेक्टेयर था, जिसे पूर्ववर्ती भाजपा सरकारों के प्रयासों से बढ़ाकर 44 लाख हेक्टेयर किया गया और पिछले ढाई वर्षों में यह बढ़कर 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। स्लीमनाबाद टनल परियोजना इस उपलब्धि को और आगे बढ़ाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी तीन माह के भीतर रबी सीजन के लिए लगभग एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हेतु पानी उपलब्ध कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परियोजना से मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभों की जानकारी देते हुए बताया कि सोन कछार क्षेत्र में 152 क्यूबिक डिस्चार्ज क्षमता के माध्यम से सतना जिले के 1 लाख 4 हजार 970 हेक्टेयर, मैहर जिले के 54 हजार 227 हेक्टेयर, कटनी जिले के 21 हजार 823 हेक्टेयर, रीवा जिले के 3 हजार 532 हेक्टेयर तथा पन्ना जिले के 448 हेक्टेयर क्षेत्र सहित कुल लगभग 1 लाख 85 हजार हेक्टेयर कमांड एरिया में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके साथ ही अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम क्षेत्र को मिलाकर कुल लगभग ढाई लाख हेक्टेयर भूमि को परियोजना का लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि संबंधित नहरों का निर्माण कार्य भी तेजी से जारी है।

मुख्यमंत्री ने किसानों से विशेष अपील करते हुए कहा कि वे किसी भी परिस्थिति में अपनी कृषि भूमि न बेचें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में बघेलखंड और बुंदेलखंड का यह क्षेत्र कृषि उत्पादन के मामले में पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों को भी पीछे छोड़ देगा। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से किसानों की आय बढ़ेगी, पलायन रुकेगा, रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे और क्षेत्र आर्थिक रूप से समृद्ध बनेगा।

उन्होंने कहा कि टनल निर्माण का कार्य वर्ष 2015 तक अपेक्षाकृत धीमी गति से आगे बढ़ रहा था और उस समय तक केवल 1406 मीटर खुदाई हो सकी थी। इसके बाद वर्ष 2016 में जर्मनी से मंगाई गई आधुनिक मशीनों की सहायता से अपस्ट्रीम की ओर से कार्य प्रारंभ किया गया। कठिन चट्टानों, तकनीकी बाधाओं और अनेक चुनौतियों के बावजूद इंजीनियरों, तकनीशियनों और मजदूरों ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए लगातार कार्य जारी रखा और अंततः वर्ष 2026 में इस ऐतिहासिक परियोजना को सफलता के मुकाम तक पहुंचाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्लीमनाबाद टनल केवल सिंचाई परियोजना नहीं है, बल्कि यह किसानों, व्यापारियों, उद्योगों और पूरे विंध्य क्षेत्र के आर्थिक एवं सामाजिक विकास की मजबूत आधारशिला है। यह परियोजना आने वाले वर्षों में प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण जल प्रबंधन योजनाओं में शामिल होगी और किसान कल्याण वर्ष में प्रदेश सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनी जाएगी।

प्रेस वार्ता के दौरान नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी, सांसद विष्णुदत्त शर्मा, सांसद गणेश सिंह, विधायक संजय सत्येन्द्र पाठक, संदीप जायसवाल, प्रणय प्रभात पाण्डेय, धीरेंद्र बहादुर सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, संभागायुक्त धनंजय सिंह, आयुक्त जनसंपर्क मनीष सिंह, आईजी प्रमोद वर्मा, कलेक्टर आशीष तिवारी, पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा, पूर्व जिलामंत्री पंडित विजय दुबे, डॉ. यतीन्द्र गौतम, मण्डल अध्यक्ष आशीष चौरसिया सहित जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।



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