रणजीत पटेल पर फर्जीवाड़े के आरोप,किसान ने पुलिस को सौंपे सिकमीनामा,चेक और खसरे के दस्तावेज।
ढीमरखेड़ा थाना क्षेत्र में किसान की शिकायत पर जांच शुरू,सिकमीनामा,चेक और खसरे के दस्तावेज पुलिस को सौंपे गए,महर्षि महेश योगी फाउंडेशन की भूमि को भी अपनी बताकर अनुबंध में शामिल करने का आरोप।
कटनी जिले की ढीमरखेड़ा तहसील में कृषि भूमि के सिकमीनामा को लेकर सामने आया एक मामला ग्रामीण क्षेत्रों में निजी कृषि अनुबंधों की पारदर्शिता और वैधानिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। ग्राम बनगवां निवासी किसान सोनू बर्मन ने ग्राम ढीमरखेड़ा निवासी रणजीत पटेल एवं उसके दामाद सर्वेश पटेल के विरुद्ध ढीमरखेड़ा थाना में विस्तृत शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि दोनों ने उससे 1 लाख 55 हजार रुपये लेकर कृषि भूमि सिकमी पर देने का अनुबंध किया, लेकिन अनुबंध की अवधि समाप्त होने से पहले ही कथित रूप से वही भूमि किसी अन्य व्यक्ति को खेती के लिए सौंप दी। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अनुबंध में ऐसी भूमि भी शामिल की गई, जो महर्षि महेश योगी फाउंडेशन के नाम दर्ज है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम से उसे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ रहा है।
शिकायत के अनुसार किसान सोनू बर्मन ने खेती करने के उद्देश्य से रणजीत पटेल और सर्वेश पटेल से ग्राम झिन्ना स्थित खसरा क्रमांक 628 एवं 631 की लगभग 11 एकड़ कृषि भूमि सिकमी पर लेने का निर्णय लिया था। इसके एवज में उसने दोनों आरोपियों को कुल 1 लाख 55 हजार रुपये का भुगतान किया। दोनों पक्षों के बीच 9 जनवरी 2025 को विधिवत सिकमीनामा तैयार किया गया, जिसकी अवधि वर्ष 2026 तक निर्धारित की गई थी। शिकायतकर्ता का कहना है कि अनुबंध के बाद उसने खेती की तैयारी भी प्रारंभ कर दी थी और उसे विश्वास था कि निर्धारित अवधि तक वह बिना किसी विवाद के उक्त भूमि पर खेती कर सकेगा।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि सिकमीनामा की अवधि पूरी होने में अभी लगभग पांच महीने का समय शेष था, लेकिन उससे पहले ही रणजीत पटेल और सर्वेश पटेल ने कथित रूप से अनुबंध की शर्तों की अनदेखी करते हुए वही कृषि भूमि किसी अन्य व्यक्ति को सौंप दी। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस कार्रवाई से न केवल अनुबंध का उल्लंघन हुआ, बल्कि उसके साथ आर्थिक धोखाधड़ी और विश्वासघात भी किया गया। इससे उसकी पूरी कृषि योजना प्रभावित हो गई और उसे आर्थिक नुकसान उठाने की स्थिति का सामना करना पड़ा।
मामले का एक महत्वपूर्ण पक्ष शिकायत में लगाया गया वह आरोप है, जिसमें कहा गया है कि खसरा क्रमांक 631, जिसका रकबा लगभग 1.61 हेक्टेयर है, राजस्व अभिलेखों में महर्षि महेश योगी फाउंडेशन के नाम दर्ज है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद इस भूमि को अपनी बताकर सिकमीनामा में शामिल किया गया और उससे राशि प्राप्त कर ली गई। बाद में जब वास्तविक स्थिति सामने आई तो महर्षि आश्रम प्रबंधन की ओर से उक्त भूमि के संबंध में उससे राशि की मांग की जाने लगी। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस घटनाक्रम के कारण उसे आर्थिक संकट के साथ-साथ मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ रहा है।
पीड़ित किसान ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि खरीफ सीजन की बोनी करने के लिए जब वह खेत पर पहुंचा तो रणजीत पटेल और सर्वेश पटेल ने उसके साथ अभद्र व्यवहार किया। शिकायत के अनुसार दोनों ने कथित रूप से गाली-गलौज करते हुए उसे खेत से भगा दिया तथा विरोध करने पर चोरी के झूठे मामले में फंसाने की धमकी भी दी। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन परिस्थितियों के कारण वह भयभीत हो गया और अंततः न्याय की अपेक्षा में पुलिस के समक्ष शिकायत प्रस्तुत करनी पड़ी।
सोनू बर्मन ने अपने आवेदन के साथ सिकमीनामा की प्रति, भुगतान से संबंधित चेक, भूमि के खसरे की प्रतियां तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज भी पुलिस को उपलब्ध कराए हैं। उसने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और गहन जांच कर आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही उसे अनुबंध के अनुसार न्याय दिलाया जाए, कथित रूप से ली गई राशि वापस कराई जाए तथा हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि का सिकमीनामा अथवा निजी अनुबंध के माध्यम से खेती के लिए दिया जाना एक सामान्य व्यवस्था है, लेकिन ऐसे मामलों में यदि भूमि के वास्तविक स्वामित्व, राजस्व अभिलेखों, अनुबंध की वैधता तथा संबंधित दस्तावेजों का समुचित सत्यापन नहीं किया जाता, तो किसानों को गंभीर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। यह मामला भी इस बात की ओर संकेत करता है कि किसी भी प्रकार का कृषि अनुबंध करने से पहले भूमि के स्वामित्व एवं दस्तावेजों की विधिवत जांच अत्यंत आवश्यक है, ताकि भविष्य में विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।
ढीमरखेड़ा थाना पुलिस ने शिकायत प्राप्त होने के बाद मामले की जांच प्रारंभ कर दी है। पुलिस द्वारा शिकायतकर्ता के प्रस्तुत दस्तावेजों, सिकमीनामा, भुगतान संबंधी अभिलेखों तथा संबंधित भूमि के राजस्व रिकॉर्ड का परीक्षण किया जा रहा है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित पक्षों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे तथा जांच में सामने आने वाले तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल यह मामला शिकायतकर्ता सोनू बर्मन द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। रणजीत पटेल एवं सर्वेश पटेल की ओर से इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई पक्ष सामने नहीं आया है। आरोपों की पुष्टि अथवा खंडन पुलिस जांच और वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव होगा। क्षेत्र के लोगों की नजरें अब जांच के निष्कर्ष और पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।


