भारत ने दोहराया सिंधु जल संधि पर अपना रुख,आतंकवाद रुकने तक नहीं बदलेगा फैसला।

 भारत ने दोहराया सिंधु जल संधि पर अपना रुख,आतंकवाद रुकने तक नहीं बदलेगा फैसला।

सरकार ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई होने तक संधि पर भारत का वर्तमान रुख कायम रहेगा,जियोपॉलिटिकल विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों का किया उल्लेख।

कटनी,ग्रामीण खबर MP।

भारत ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि सिंधु जल संधि को लेकर उसका वर्तमान रुख यथावत रहेगा। सरकार का कहना है कि जब तक पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी और विश्वसनीय कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक भारत अपने निर्णय में कोई बदलाव नहीं करेगा। इस बयान के बाद सिंधु जल संधि को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है।

जियोपॉलिटिकल मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सिंधु जल संधि केवल जल बंटवारे का समझौता नहीं है, बल्कि यह आपसी विश्वास, सद्भावना और शांतिपूर्ण सहयोग की भावना पर आधारित एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था है। उनके अनुसार यदि किसी समझौते के मूल आधार ही प्रभावित हो जाएं, तो उसके क्रियान्वयन पर भी स्वाभाविक रूप से प्रश्न उठते हैं।

ब्रह्मा चेलानी ने अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रसिद्ध लैटिन सिद्धांत "पैक्टा संट सर्वंदा (Pacta Sunt Servanda)" का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका अर्थ है कि अंतरराष्ट्रीय संधियों का ईमानदारी और सद्भावना के साथ पालन किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि यदि कोई पक्ष समझौते की मूल भावना का लगातार उल्लंघन करता है, तो दूसरे पक्ष को भी अंतरराष्ट्रीय कानून के अंतर्गत अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार प्राप्त हो सकता है।

भारत सरकार का कहना है कि आतंकवाद और सामान्य द्विपक्षीय संबंध एक साथ नहीं चल सकते। इसी नीति के अनुरूप सरकार ने दोहराया है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के विरुद्ध ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाता, तब तक सिंधु जल संधि पर भारत का वर्तमान रुख जारी रहेगा।

सिंधु जल संधि वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में संपन्न हुई थी। इस समझौते के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह प्रमुख नदियों के जल के उपयोग और प्रबंधन के संबंध में दोनों देशों के अधिकार एवं दायित्व निर्धारित किए गए थे। लंबे समय तक यह संधि दोनों देशों के बीच सबसे स्थायी द्विपक्षीय समझौतों में गिनी जाती रही है।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञों के बीच इस विषय पर अलग-अलग मत हैं। कुछ विशेषज्ञ भारत के वर्तमान रुख को सुरक्षा परिस्थितियों के संदर्भ में उचित मानते हैं, जबकि अन्य का मत है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय संधि के निलंबन अथवा उसके क्रियान्वयन में परिवर्तन का प्रश्न अंतरराष्ट्रीय कानून की विस्तृत व्याख्या और संबंधित प्रावधानों के आधार पर ही तय किया जाना चाहिए।

फिलहाल भारत ने अपना आधिकारिक रुख दोहराते हुए स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई के बिना सिंधु जल संधि को लेकर उसके वर्तमान निर्णय में कोई परिवर्तन नहीं होगा। इस मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के संबंधों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी लगातार नजर बनी हुई है।

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