तमिलनाडु की 80 वर्षीय महिला ने काशी विश्वनाथ मंदिर को दिया तीन करोड़ रुपये से अधिक का दान।
दिवंगत पति और दो बेटों की स्मृति में चेक के माध्यम से की पारदर्शी दान प्रक्रिया,मंदिर ट्रस्ट ने जारी की आधिकारिक रसीद।
वाराणसी। आस्था, श्रद्धा और पारदर्शिता का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। तमिलनाडु की 80 वर्षीय एक महिला ने उत्तर प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर को तीन करोड़ रुपये से अधिक की राशि दान स्वरूप भेंट की है। यह दान उन्होंने अपने दिवंगत पति और दो बेटों की पावन स्मृति तथा उनकी आत्मा की शांति के उद्देश्य से चेक के माध्यम से दिया। हाल के समय में उत्तर प्रदेश के किसी प्रमुख मंदिर को प्राप्त होने वाले बड़े दानों में इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार महिला ने दान देने से पहले वाराणसी के मंडलायुक्त एस. राजलिंगम से संपर्क कर अपनी इच्छा व्यक्त की थी। अधिकारियों ने उन्हें सलाह दी कि वे राशि सीधे श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट को सौंप सकती हैं, लेकिन महिला ने आग्रह किया कि पूरी प्रक्रिया मंडलायुक्त की उपस्थिति में ही संपन्न कराई जाए, ताकि दान की पारदर्शिता और औपचारिकता पूरी तरह सुनिश्चित हो सके।
इसके बाद 12 जुलाई को महिला अपने मैनेजर के साथ वाराणसी पहुंचीं और मंडलायुक्त एस. राजलिंगम से मुलाकात की। उनके अनुरोध पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों को बुलाया गया। मंडलायुक्त की उपस्थिति में महिला ने ट्रस्ट को चेक के माध्यम से तीन करोड़ रुपये से अधिक की राशि सौंप दी। दान प्राप्त होने के बाद मंदिर ट्रस्ट ने उन्हें आधिकारिक रसीदें भी प्रदान कीं।
बताया गया है कि महिला ने अपने जीवन में पति और दोनों बेटों को खोने के बाद उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाने तथा धार्मिक और सामाजिक उद्देश्य की भावना से यह निर्णय लिया। उनकी इस श्रद्धा और समर्पण की व्यापक सराहना की जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी इसे पारदर्शी दान प्रक्रिया का उत्कृष्ट उदाहरण बताया है।
हालांकि विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में दान की राशि को लेकर कुछ अंतर देखने को मिला है। कुछ रिपोर्टों में यह राशि तीन करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है, जबकि कुछ में लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये का उल्लेख किया गया है। हालांकि सभी रिपोर्टों में यह स्पष्ट है कि महिला ने चेक के माध्यम से मंदिर ट्रस्ट को बड़ी धनराशि दान की और पूरी प्रक्रिया प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में संपन्न हुई।
काशी विश्वनाथ मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां प्रतिवर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर को समय-समय पर श्रद्धालुओं द्वारा दान दिया जाता रहा है, लेकिन इस प्रकार सुनियोजित, पारदर्शी और भावनात्मक उद्देश्य से किया गया यह दान विशेष रूप से चर्चा का विषय बना हुआ है। धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह घटना न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से धार्मिक संस्थाओं के प्रति लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत होता है।


